मगर यूं नहीं

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रिश्ते बहुत गहरे  होने होते हैं

उकता जाने के लिए

पढ़ता  हूँ  हर बार बस  उड़ती निगाह से …

कि कहीं बासी न पड़  जाए

प्यास की तासीर

सारी उम्र साथ रहने की उम्मीद से बड़ा तो  नहीं हो सकता

बिछोह  का दर्द…

बारहा नज़रें चुरा लूँगा…

मगर यूं नहीं कि …

 तुम्हें खो देने की हद पार करूँ

…. पद्म सिंह

भाई हद्द है !

एक थैली मे रहें दिन  रात…. भाई हद्द है …
और उधर संसद मे जूता-लात… भाई हद्द है
 
आपके पैसे की रिश्वत आप को
सड़क बिजली घर की लालच आपको
चुनावी मौसम मे सेवक आपके
जीत कर पूंछें न अपने बाप को 
आप ही के धन से धन्नासेठ हैं
आप ही पर लगाते हैं घात … भाई हद्द है
 
शिकारी या भिखारी हर वेश मे
जहाँ मौका मिले धन्धा कूट लें
क्या गजब का हुनर पाया है कि ये
जिस तरफ नज़रें उठा दें लूट लें
दो धड़ों मे बाँट कर इन्सान को 
एक चिंगारी उछालें   ………फूट लें
अब लगी अपनी बुझाओ आप … भाई हद्द है
 
जाति भाषा क्षेत्र वर्गों मे फंसी
सोच अपनी जेल बन कर रह गई
वोट के आखेट पर हैं रहनुमा
राजनीति गुलेल बन कर रह गई 
लोकशाही आज के इस दौर मे
खानदानी खेल बन कर रह गई
जिन्हें उंगली पकड़ चलना सिखाया
वही बन बैठे हैं माई बाप… भाई हद्द है 

चला गजोधर कौड़ा बारा(अवधी)

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कथरी कमरी फेल होइ गई
अब अइसे न होइ गुजारा
चला गजोधर कौड़ा बारा…

गुरगुर गुरगुर हड्डी कांपय
अंगुरी सुन्न मुन्न होइ जाय
थरथर थरथर सब तन डोले
कान क लवर झन्न होइ जाय
सनामन्न सब ताल इनारा
खेत डगर बगिया चौबारा
बबुरी छांटा छान उचारा …
चला गजोधर कौड़ा बारा… 

बकुली होइ गइ आजी माई
बाबा डोलें लिहे रज़ाई
बचवा दुई दुई सुइटर साँटे
कनटोपे माँ मुनिया काँपे
कौनों जतन काम ना आवे
ई जाड़ा से कौन बचावे
हम गरीब कय एक सहारा
चला गजोधर कौड़ा बारा….

कूकुर पिलई पिलवा कांपय
बरधा पँड़िया गैया कांपय
कौवा सुग्गा बकुली पणकी
गुलकी नेउरा बिलरा कांपय
सीसम सुस्त नीम सुसुवानी
पीपर महुआ पानी पानी
राम एनहुं कय कष्ट नेवरा
चला गजोधर कौड़ा बारा …

…. पद्म सिंह (अवधी)


आइये जाने इन्टरनेट पर हिन्दी मे कैसे लिखें .

न जाने तुमने ऊपर वाले से क्या क्या कहा होगा …

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न जाने क्या हुआ है हादसा गमगीन मंज़र है
शहर मे खौफ़ का पसरा हुआ एक मौन बंजर है
फिजाँ मे घुट रहा ये मोमबत्ती का धुआँ कैसा
बड़ा बेबस बहुत कातर सिसकता कौन अन्दर है

 

सहम कर छुप गयी है शाम की रौनक घरोंदों मे
चहकती क्यूँ नहीं बुलबुल ये कैसा डर परिंदों मे
कुहासा शाम ढलते ही शहर को घेर लेता है
समय से कुछ अगर पूछो तो नज़रें फेर लेता है
चिराग अपनी ही परछाई से डर कर चौंक जाता है
न जाने जहर से भीगी हवाएँ कौन लाता है

 

ये सन्नाटा अचानक भभक कर क्यूँ जल उठा ऐसे
ये किसकी सिसकियों ने आग भर दी है मशालों मे
सड़क पर चल रही ये तख्तियाँ किसकी कहानी हैं
पिघलती मोमबत्ती की शिखा किसकी निशानी है\

 

न जाने ज़ख्म कब तक किसी के चीखेंगे सीने मे
न जाने वक़्त कितना लगेगा बेखौफ जीने मे
न जाने इस भयानक ख्वाब से अब जाग कब होगी
न जाने रात कब बीते न जाने कब सुबह होगी

 

न जाने दर्द के तूफान को कैसे सहा होगा
न जाने तुमने ऊपर वाले से क्या क्या कहा होगा
बहुत शर्मिंदगी है आज ख़ुद को आदमी कह कर
ज़माना सर झुकाए खड़ा  ख़ुद की बेजुबानी पर

 

मगर जाते हुए भी इक कड़ी तुम जोड़ जाते हो
हजारों दिलों पर अपनी निशानी छोड़ जाते हो
अगर आँखों मे आँसू हैं तो दिल मे आग भी होगी
बहुत उम्मीद है करवट हुई तो जाग भी होगी

 

…..पद्म सिंह

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ज्योति पर्व की हार्दिक मंगल कामनाएँ


Deepavali Orkut Scraps, Comments and Greetings

 

अहो भाव का स्वप्निल नवल विहान आपके आंगन में
मन वीणा पर गुम्फित मधुरिम  तान आपके अंगन में

अनुरंजित कर मानस अपना नव संचार संवारने दें
नृत्य चले आनंद भाव का नूपुर टूट बिखरने दें
परम शान्ति सद्भाव प्रेम का गान आपके आँगन में
मन वीणा पर गुम्फित मधुरिम  तान आपके अंगन में

मदिर फुहार झरे चंदनियां मरु अंतस को धो जाए
नर्तन हो इश्वर मय हो कर अपना पन ही खो जाए
शाश्वत अविरल विपुल कान्ति मुस्कान आपके आंगन में
मन वीणा पर गुम्फित मधुरिम  तान आपके अंगन में

जले दीप से दीप जगत में प्रीति भरी अरुणाई हो
मिले गीत से गीत स्वरों में मादकता तरुणाई हो
सत्यम शिवम् सुन्दरम का प्रतिमान आपके आँगन में
मन वीणा पर  गुम्फित मधुरिम तान आपके आँगन में 

….. पद्म सिंह

एक्सेल पर अंकों मे लिखी धनराशि को शब्दों मे स्वतः रूपांतरित करने का आसान तरीका

एक्सेल पर काम करते समय कई बार आवश्यकता होती है कि अंकों मे लिखी गयी धनराशि को शब्दों (रुपए पैसे) मे भी लिखा जाए (जैसे 1254.25 को One thousand two hundred fifty four and twentyfive paise Only)। यद्यपि एक्सेल मे माइक्रोसॉफ्ट की तरफ से यह प्रयोग सीधे नहीं उपलब्ध कराया गया है। लेकिन इसका उपाय अलग से किया जा सकता है। थोड़े से प्रयास से आप भी ऐसा कर पाएंगे। इसके लिए आपको कुछ कोडिंग की आवश्यकता होगी जिसे आपकी सुविधा के लिए फाइल के रूप मे  उपलब्ध कर दिया है जिसे यहाँ क्लिक कर के डाउनलोड कर लें।

1. सबसे पहले यहाँ क्लिक कर के विजुवल बेसिक की फाइल डाउनलोड कर लें। डाउनलोड की गयी फाइलें .rar फॉर्मेट मे ज़िप की गयी हैं, इन्हें डाउन्लोड करने के बाद डेस्कटॉप या कहीं अन्य स्थान पर एक्सट्रैक्ट कर लें जिससे उनको प्रयोग मे लाया जा सके। इनमे से एक फाइल (RsInword.bas) भारतीय रूपये के फॉर्मेट तथा (spellcurr.bas) इंग्लिश फॉर्मेट मे धनराशि का रूपान्तरण करने के लिए है।

2.माइक्रोसॉफ्ट आफिस मे जाएं और एक्सेल प्रोग्राम खोलें

3. Alt+F11 दबाएँ जिससे विजुवल बेसिक की विंडो खुलेगी।

4. File के टैब मे जा कर Import File का चयन करें और अपनी डाउन्लोड की गयी फाइल(RsInwords.bas) को चुनते हुए आयातित करें।

5. विजुवल बेसिक की विंडो बंद कर दें… अब आपकी एक्सेल शीट इस सुविधा के लिए तैयार है।

6. जिस ब्लॉक मे आपको अंकों का शब्द रूपान्तरण लेना है वहाँ निम्न सूत्र लगाएँ =RsInwords(A1) जहां A1 उस ब्लॉक के लिए है जहाँ धनराशि अंकों मे लिखी जानी है। पूर्णस्क्रीन कैप्चर 13-09-2012 084235.bmp

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कर के देखिये… ज़्यादा कठिन नहीं है… :)

गज़ल

 
कभी तो सामने अंजाम भी आए कोई
मेरी दुवाओं का असर भी तो पाए कोई
 
किसी का नाम जुबां पर न सही दिल मे है
कभी तस्वीर को आईना बनाए कोई
 
कोरे कागज़ के पैरहन कभी रंगीन भी हों
रंग बरसाए कभी झूम के गाए कोई
 
जिसके घर लगता है हर शाम गमों का मेला
जाए भी घर तो सिर्फ नाम को जाए कोई
 
लहू सा उम्र भर जो बहते रहे सीने मे
अब भुलाए तो उन्हें कैसे भुलाए कोई
 
दर्द ऐसा न सहा जाए न छोड़ा जाआए
इश्क कैसे तेरा भी साथ निभाए कोई
 
दर्द से जिसने मरासिम बना लिया हो पद्म
काहे पछताए कोई रंज मनाए कोई
 
….. पद्म सिंह

गज़ल

फिर से घनघोर घाटा छाई है अमराई मे
कहाँ हो आन मिलो शाम की तनहाई मे

विरह की आग पे छींटे न दे अरे बादल
कहीं धुआँ न उठे फिर कहीं रुसवाई मे

चाँद बेज़ार भटकता रहा सरे मंज़र
चाँदनी खोई बादलों की तमाशाई मे

रूठने और मनाने को बहुत हैं मौसम
आज तो चूड़ियाँ मचलने दो कलाई मे

पद्म खिलने लगे हैं झील मे कंवल ऐसे
जैसे केसर का रंग घुल गया मलाई मे

-…. पद्म सिंह- 04-07-2012

क्यों नपुंसक हो गयी हैं आंधियाँ

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कहाँ जाने खो गयी हैं आँधियाँ
क्यों नपुंसक हो गयी हैं आंधियाँ

हवाएँ पश्चिम से कुछ ऐसे चलीं
युवा मन मे सो गयी हैं आंधियाँ

मुट्ठियाँ सब बुद्धिजीवी हो गयीं
और तनहा हो गयी हैं आँधियाँ

आज घर मे शान्ति है धोका न खा
अभी कल ही तो गयी हैं आंधियाँ

शक्ति, साहस, और लड़ने की ललक
जाने क्या क्या बो गयी हैं आंधियाँ

“पद्म” सच मे बदलना है दौर तो
जगाओ जो सो गयी हैं आंधियाँ

पद्म सिंह 02/05/20012

वर्डप्रेस डॉट कॉम ब्लॉग पर ऑडियो कैसे पोस्ट करें।

वर्डप्रेस डॉट कॉम पर काफी समय से ब्लागिंग करते रहने के बावजूद भी कभी पोस्ट मे पॉडकास्ट या आडियो नहीं पोस्ट किया था। एक दो बार कोशिश करने पर भी सफलता नहीं मिली थी। काफी मेहनत के बाद आज आखिर सफलता मिल ही गयी। आप भी कोशिश करिए सफलता अवश्य मिलेगी।

इसके लिए कुछ तैयारियाँ करने की आवश्यकता है -

1- सबसे पहले यहाँ क्लिक कर के सफारी ब्राउज़र डाऊनलोड कर लें(यदि आपके कंप्यूटर मे नहीं है तब)

2- अपने ईमेल का इस्तेमाल करते हुए यहाँ क्लिक कर के आडियो-बू   पर साइन अप कर लें और अपने ईमेल के इनबॉक्स मे आडियो-बू के लिंक पर क्लिक कर के इसे वेरिफ़ाई भी कर लें।

audioboo.fm

 

3 – आपको जो भी आडियो फाइल ब्लॉग पर लगानी है उसे audioboo पर अपलोड करें और सेव कर लें जिसके बाद आपकी अपलोडेड फाइल चलने लायक हो जाएगी। आपकी अपलोडेड फाइल चित्र के अनुसार दिखेगी जिसके सामने RSS फीड का लिंक दिखेगा जिसपर माउस का राइट क्लिक करके सफारी ब्राउसर के न्यू टैब(open in new tab) मे खोल लें

Capture

 

4-  ऊपर चित्र के अनुसार फाइल के RSS फीड लिंक बटन पर राइट क्लिक करके नए टैब(सफारी ब्राउज़र) मे खोलने पर आपको नीचे चित्र के अनुसार कुछ इस तरह से आपकी फाइल दिखाई देगी -

File Link at safari

5- अब हमेशा की तरह अपने वर्डप्रेस डॉट कॉम मे साइन इन करें और New Post आप्शन से नयी पोस्ट लिखने के स्थान पर पहुँचें।

6- html वाले आप्शन मे निम्नानुसार अपनी ऊपर चित्र के अनुसार  मिली RSS लिंक को नीचे लिखे  लाल रंग वाले लिंक के स्थान पर पेस्ट करना है  …शेष html कोड(नीले रंग का) हर बार एक जैसा ही रहेगा।

html कोड जैसा लगाया जाना है -

html coding

 


html coding for audio file

7- अब आपकी आडियो प्लेयर तैयार है…. पोस्ट मे यदि कुछ और लिखना चाहें तो सामान्य पोस्टों की तरह उपरोक्त कोड से ऊपर या नीचे स्वतन्त्रता से लिख सकते हैं और अंततः टैग और कैटेगरी आदि सेट करते हुए अपनी नयी पोस्ट को पब्लिश कर दें। आपकी पोस्ट पर आपका प्लेयर दिखने लगेगा। बधाई !!!

आइये सुनें भारत की महान विभूतियों से परागित एकात्म स्त्रोत -


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