बाल कविताएँ

 

0001 animals-3

हाथी राजा बहुत बड़े,

सूंड उठा कर कहाँ चले

मेरे घर तो आओ ना,

हलवा पूरी खाओ न

आओ बैठो कुर्सी पर,

कुर्सी बोली चर चर चर

0002

 कुँए में थोड़ा पानी,

मम्मी मेरी रानी

पापा मेरे राजा

दूध पिलाएँ ताज़ा

सोने की खिड़की

चांदी का दरवाजा

उसमे से कौन झांके

मेरा भैया राजा

0003

गधा जानवर बड़े काम का

जीवन जीता है गुलाम का

धोबी के डंडे से डरता

सब से ज्यादा मेहनत करता

फिर भी कहते लोग, गधा है

सीधे पन की यही सजा है

 

0004

ऊंट मरुस्थल का राजा है CAMEL 

कड़ी धूप में भी ताज़ा है

पानी पी ले एक दो घूँट

मीलों सरपट दौड़े ऊँट 

0005

कितनी सुन्दर कितनी प्यारी  cow

सब पशुओं में न्यारी गाय

सारा दूध हमें डे देती

आओ इसे पिला दें चाय

 

0006

राम नगर से राजा आया

श्याम नगर से रानी

रानी रोटी सेंक रही है

राजा भरता पानी

0007

बिल्ली बोली म्याऊं

मै आऊँ मै आऊँ MICE

चूहा बोला ठहर जा

मै पहले छुप जाऊँ

 0008

बने डाक्टर छोटे भैया

फीस मांगते एक रुपैया

जब इलाज को पहुंची गुड़िया

उसे थमा दी मीठी पुड़िया

 9

चंदा मामा खेले ड्रामा

तो जोकर का काम मिला

नया निराला ढीला ढाला

देखो कैसा सूट सिला

 

चिड़िया, चिड़िया उड़ उड़ जाए

चिड़िया चिड़िया खुशी से गाये

 

दस छोटी चिड़िया, खा रही थी जौ

एक उनमे से उड़ गयी बाकी बची नौ

नौ छोटी चिड़िया पढ़ रही थी पाठ

एक उनमे से उड़ गयी बाकी बची आठ

आठ छोटी चिड़िया कर रही थी बात

एक उनमे से उड़ गयी बाकी बची सात

सात छोटी चिड़िया बोल रही थी जय

एक उनमे से उड़ गयी बाकी बची छे

छे छोटी चिड़िया देख  रही थी नाच

एक उनमे से उड़ गयी बाकी बची पांच

पांच छोटी चिड़िया खाती थी अचार

एक उनमे से उड़ गयी बाकी बची चार

चार छोटी चिड़िया बजा रही थी बीन

एक उनमे से उड़ गयी बाकी बची तीन

तीन छोटी चिड़िया धान रही थी बो

एक उनमे से उड़ गयी बाकी बची दो

दो छोटी चिड़िया धूप रही थी सेंक

एक उनमे से उड़ गयी बाकी बची एक

एक छोटी चिड़िया देख रही थी हीरो

वो चिड़िया भी उड़ गयी बाकी बची जीरो

 halloween

 आपका पद्म- 9716973262

(कविताएँ विभिन्न स्थानों से संकलित हैं)

8 टिप्पणियाँ (+add yours?)

  1. ali syed
    सितम्बर 09, 2010 @ 17:57:56

    अच्छी बाल कवितायेँ !

    प्रतिक्रिया

  2. प्रवीण पाण्डेय
    सितम्बर 09, 2010 @ 21:12:18

    बहुत ही सुन्दर कवितायें, सारी की सारी।

    प्रतिक्रिया

  3. शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
    सितम्बर 10, 2010 @ 14:50:26

    वाह…कितनी प्यारी प्यारी रचनाएं पेश की हैं
    तो जनाब अभी बचपन की यादों में सैर कर रहे हैं!
    अच्छा है…यही तो अनमोल ख़ज़ाना है ज़िन्दगी का.

    प्रतिक्रिया

  4. ABhishek
    अक्टूबर 20, 2010 @ 18:19:24

    nice poems

    प्रतिक्रिया

  5. neha mathews
    नवम्बर 10, 2010 @ 09:06:45

    bachpan yaad dila diya aur ye pyari kavitaye bhi. Dhanyavad

    प्रतिक्रिया

  6. ramya
    अगस्त 21, 2011 @ 22:54:03

    thank u for this beautiful chote -chote bal kavitai thnk u vvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvery much

    प्रतिक्रिया

  7. shashankmisrabharti
    सितम्बर 20, 2011 @ 07:48:23

    chhoti-chhoti sunder geet.bachchon koo banataa apna meet badhaii

    प्रतिक्रिया

  8. anoop tiwari
    अप्रैल 11, 2012 @ 15:19:38

    kafi achchhe kavitayen hai.

    प्रतिक्रिया

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