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चंद तुरंतियाँ -पद्म सिंह Padm Singh

प्यार करना टूट कर … फिर टूट जाना

प्यार का अञ्जाम ही ये है पुराना

तैरने की कोशिशें बेकार हैं सब …

पार पाना है तो गहरे डूब जाना

 

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पतंगों ने ज्योत्सना पर होम होने के लिए

पत्थरों ने दिल लगाया मोम होने के लिए

प्रेम का फलसफा थोड़ा इस तरह भी समझिये

बीज मिट्टी में मिला तो व्योम होने के लिए

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टूट कर चाहने वाले भी अक्सर टूट जाते हैं

बहुत लंबे सफर मे कुछ मुसाफ़िर छूट जाते हैं

ये रिश्ते पकते पकते पकते हैं चट्टान बनते हैं

मगर कच्चे घड़े धक्का लगे तो टूट जाते हैं

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सनम तरसा हुआ आए तो कोई बात होती है

के बारिश रेत पर आए तो कोई बात होती है

कोई प्यासा ही समझेगा के पानी की तड़प क्या है

बिछोहे पर मिलन आए तो कोई बात होती है

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जिसमे आँसू का नमक न हो वो हँसी कैसी

वक्त पर काम न आए तो दोस्ती कैसी

एक ठोकर मे चटख जाए वो रिश्ता कैसा

होश जिसमे बने रहें वो मयकशी कैसी

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कब तलक भेड़ें बचेंगी भेड़ियों के देश मे

बाज़ मंडराने लगे हैं मुर्गियों के वेश मे

कौन बाँधे घण्टियाँ अब बिल्लियों को बोलिए

हर तरफ गद्दार फैले पड़े हैं परिवेश मे

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अँधेरों ने चाल खेली छंट गयी हैं आंधियाँ

क्या हुआ फिर से दलों मे बंट गयी हैं आंधियाँ

कुटिल अट्टाहास करता आज मरघट का धुआँ

दिग्भ्रमित हो टुकड़ियों मे कट गयी हैं आंधियाँ

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चुक गया है आँख का पानी कि पत्थर हो गया

हृदय का चंचल समन्दर क्यों मरुस्थल हो गया

आन भूली, धर्म भूला, साध्य केवल धन रहा

विश्व गुरु भारत कुमारों तुम्हें ये क्या हो गया

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आईना ज़िंदगी को दिखाने की देर है

अपनी खुदी पहचान मे आने की देर है

सोए पड़े समंदरों मे आग बहुत है

चिंगारियों को राह दिखाने की देर है

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मगर यूं नहीं

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रिश्ते बहुत गहरे  होने होते हैं

उकता जाने के लिए

पढ़ता  हूँ  हर बार बस  उड़ती निगाह से …

कि कहीं बासी न पड़  जाए

प्यास की तासीर

सारी उम्र साथ रहने की उम्मीद से बड़ा तो  नहीं हो सकता

बिछोह  का दर्द…

बारहा नज़रें चुरा लूँगा…

मगर यूं नहीं कि …

 तुम्हें खो देने की हद पार करूँ

…. पद्म सिंह

 

भाई हद्द है !

एक थैली मे रहें दिन  रात…. भाई हद्द है …
और उधर संसद मे जूता-लात… भाई हद्द है
 
आपके पैसे की रिश्वत आप को
सड़क बिजली घर की लालच आपको
चुनावी मौसम मे सेवक आपके
जीत कर पूंछें न अपने बाप को 
आप ही के धन से धन्नासेठ हैं
आप ही पर लगाते हैं घात … भाई हद्द है
 
शिकारी या भिखारी हर वेश मे
जहाँ मौका मिले धन्धा कूट लें
क्या गजब का हुनर पाया है कि ये
जिस तरफ नज़रें उठा दें लूट लें
दो धड़ों मे बाँट कर इन्सान को 
एक चिंगारी उछालें   ………फूट लें
अब लगी अपनी बुझाओ आप … भाई हद्द है
 
जाति भाषा क्षेत्र वर्गों मे फंसी
सोच अपनी जेल बन कर रह गई
वोट के आखेट पर हैं रहनुमा
राजनीति गुलेल बन कर रह गई 
लोकशाही आज के इस दौर मे
खानदानी खेल बन कर रह गई
जिन्हें उंगली पकड़ चलना सिखाया
वही बन बैठे हैं माई बाप… भाई हद्द है 
 

चला गजोधर कौड़ा बारा(अवधी)

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कथरी कमरी फेल होइ गई
अब अइसे न होइ गुजारा
चला गजोधर कौड़ा बारा…

गुरगुर गुरगुर हड्डी कांपय
अंगुरी सुन्न मुन्न होइ जाय
थरथर थरथर सब तन डोले
कान क लवर झन्न होइ जाय
सनामन्न सब ताल इनारा
खेत डगर बगिया चौबारा
बबुरी छांटा छान उचारा …
चला गजोधर कौड़ा बारा… 

बकुली होइ गइ आजी माई
बाबा डोलें लिहे रज़ाई
बचवा दुई दुई सुइटर साँटे
कनटोपे माँ मुनिया काँपे
कौनों जतन काम ना आवे
ई जाड़ा से कौन बचावे
हम गरीब कय एक सहारा
चला गजोधर कौड़ा बारा….

कूकुर पिलई पिलवा कांपय
बरधा पँड़िया गैया कांपय
कौवा सुग्गा बकुली पणकी
गुलकी नेउरा बिलरा कांपय
सीसम सुस्त नीम सुसुवानी
पीपर महुआ पानी पानी
राम एनहुं कय कष्ट नेवरा
चला गजोधर कौड़ा बारा …

…. पद्म सिंह (अवधी)


आइये जाने इन्टरनेट पर हिन्दी मे कैसे लिखें .

 

न जाने तुमने ऊपर वाले से क्या क्या कहा होगा …

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न जाने क्या हुआ है हादसा गमगीन मंज़र है
शहर मे खौफ़ का पसरा हुआ एक मौन बंजर है
फिजाँ मे घुट रहा ये मोमबत्ती का धुआँ कैसा
बड़ा बेबस बहुत कातर सिसकता कौन अन्दर है

 

सहम कर छुप गयी है शाम की रौनक घरोंदों मे
चहकती क्यूँ नहीं बुलबुल ये कैसा डर परिंदों मे
कुहासा शाम ढलते ही शहर को घेर लेता है
समय से कुछ अगर पूछो तो नज़रें फेर लेता है
चिराग अपनी ही परछाई से डर कर चौंक जाता है
न जाने जहर से भीगी हवाएँ कौन लाता है

 

ये सन्नाटा अचानक भभक कर क्यूँ जल उठा ऐसे
ये किसकी सिसकियों ने आग भर दी है मशालों मे
सड़क पर चल रही ये तख्तियाँ किसकी कहानी हैं
पिघलती मोमबत्ती की शिखा किसकी निशानी है\

 

न जाने ज़ख्म कब तक किसी के चीखेंगे सीने मे
न जाने वक़्त कितना लगेगा बेखौफ जीने मे
न जाने इस भयानक ख्वाब से अब जाग कब होगी
न जाने रात कब बीते न जाने कब सुबह होगी

 

न जाने दर्द के तूफान को कैसे सहा होगा
न जाने तुमने ऊपर वाले से क्या क्या कहा होगा
बहुत शर्मिंदगी है आज ख़ुद को आदमी कह कर
ज़माना सर झुकाए खड़ा  ख़ुद की बेजुबानी पर

 

मगर जाते हुए भी इक कड़ी तुम जोड़ जाते हो
हजारों दिलों पर अपनी निशानी छोड़ जाते हो
अगर आँखों मे आँसू हैं तो दिल मे आग भी होगी
बहुत उम्मीद है करवट हुई तो जाग भी होगी

 

…..पद्म सिंह

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ज्योति पर्व की हार्दिक मंगल कामनाएँ


Deepavali Orkut Scraps, Comments and Greetings

 

अहो भाव का स्वप्निल नवल विहान आपके आंगन में
मन वीणा पर गुम्फित मधुरिम  तान आपके अंगन में

अनुरंजित कर मानस अपना नव संचार संवारने दें
नृत्य चले आनंद भाव का नूपुर टूट बिखरने दें
परम शान्ति सद्भाव प्रेम का गान आपके आँगन में
मन वीणा पर गुम्फित मधुरिम  तान आपके अंगन में

मदिर फुहार झरे चंदनियां मरु अंतस को धो जाए
नर्तन हो इश्वर मय हो कर अपना पन ही खो जाए
शाश्वत अविरल विपुल कान्ति मुस्कान आपके आंगन में
मन वीणा पर गुम्फित मधुरिम  तान आपके अंगन में

जले दीप से दीप जगत में प्रीति भरी अरुणाई हो
मिले गीत से गीत स्वरों में मादकता तरुणाई हो
सत्यम शिवम् सुन्दरम का प्रतिमान आपके आँगन में
मन वीणा पर  गुम्फित मधुरिम तान आपके आँगन में 

….. पद्म सिंह

 

एक्सेल पर अंकों मे लिखी धनराशि को शब्दों मे स्वतः रूपांतरित करने का आसान तरीका

एक्सेल पर काम करते समय कई बार आवश्यकता होती है कि अंकों मे लिखी गयी धनराशि को शब्दों (रुपए पैसे) मे भी लिखा जाए (जैसे 1254.25 को One thousand two hundred fifty four and twentyfive paise Only)। यद्यपि एक्सेल मे माइक्रोसॉफ्ट की तरफ से यह प्रयोग सीधे नहीं उपलब्ध कराया गया है। लेकिन इसका उपाय अलग से किया जा सकता है। थोड़े से प्रयास से आप भी ऐसा कर पाएंगे। इसके लिए आपको कुछ कोडिंग की आवश्यकता होगी जिसे आपकी सुविधा के लिए फाइल के रूप मे  उपलब्ध कर दिया है जिसे यहाँ क्लिक कर के डाउनलोड कर लें।

1. सबसे पहले यहाँ क्लिक कर के विजुवल बेसिक की फाइल डाउनलोड कर लें। डाउनलोड की गयी फाइलें .rar फॉर्मेट मे ज़िप की गयी हैं, इन्हें डाउन्लोड करने के बाद डेस्कटॉप या कहीं अन्य स्थान पर एक्सट्रैक्ट कर लें जिससे उनको प्रयोग मे लाया जा सके। इनमे से एक फाइल (RsInword.bas) भारतीय रूपये के फॉर्मेट तथा (spellcurr.bas) इंग्लिश फॉर्मेट मे धनराशि का रूपान्तरण करने के लिए है।

2.माइक्रोसॉफ्ट आफिस मे जाएं और एक्सेल प्रोग्राम खोलें

3. Alt+F11 दबाएँ जिससे विजुवल बेसिक की विंडो खुलेगी।

4. File के टैब मे जा कर Import File का चयन करें और अपनी डाउन्लोड की गयी फाइल(RsInwords.bas) को चुनते हुए आयातित करें।

5. विजुवल बेसिक की विंडो बंद कर दें… अब आपकी एक्सेल शीट इस सुविधा के लिए तैयार है।

6. जिस ब्लॉक मे आपको अंकों का शब्द रूपान्तरण लेना है वहाँ निम्न सूत्र लगाएँ =RsInwords(A1) जहां A1 उस ब्लॉक के लिए है जहाँ धनराशि अंकों मे लिखी जानी है। पूर्णस्क्रीन कैप्चर 13-09-2012 084235.bmp

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कर के देखिये… ज़्यादा कठिन नहीं है… :)

 

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