हास्य

झमकोइया मोरे लाल !!

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हमारे जिले में शुभ कार्यों में अपने मज़ाक वाले रिश्तों के प्रति प्रेम प्रदर्शित करने के लिए सस्वर गाली गाते हैं होली पर ताज़ी ताज़ी नाज़िल हुई गाली कोे इसी संदर्भ में पढ़ा /गाया जाए। 

यूपी की जनता ने कीन्हा कमाल झमकोइया मोरे लाल 
56 इंच का लगा ऐसा धक्का 
पंचर भई साइकिल निकल गवा चक्का
अंदर से ठट्ठा लगावें सिपाल ….झमकोईयामोरे लाल 

बुआ कहें बबुआ से बड़ा बुरा पटका 
कद्दू जो कटता तो आपस में बंटता 
फाट पड़ा जाने कहाँ से बवाल … झमकोइया मोरे लाल 

घूरे भी ताड़े भी पर नहीं पाए 
अपने ही घर की खबर नहीं पाए 
बुर्के के अंदर से होइगा धमाल ….झमकोईया मोरे लाल

यूपी के लड़िकन की लुटि गयी खटिया 
इतना काम बोला कि डूबि गयी लुटिया
 घरहिन मा मुरगी होइगै हलाल … झमकोइया मोरे लाल 

वारे परधान वारे वा रे अमितवा 
वा रे मनोज वा रे वा रे सम्बितवा
धोती को फाड़ कर दीन्हा रुमाल… झमकोइया मोरे लाल 
©पद्म सिंह #निर्मल हास्य 

जूता पचीसी

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कई बार मज़ाक मे लिखी गयी दो चार पंक्तियाँ   अपना कुनबा  गढ़ लेती है… ऐसा ही हुआ इस जूता पचीसी के पीछे… फेसबुक पर मज़ाक मे लिखी गयी कुछ पंक्तियों पर रजनीकान्त जी ने टिप्पणी की कि इसे जूता बत्तीसी तक तो पहुँचाते… बस बैठे बैठे बत्तीसी तो नहीं पचीसी अपने आप उतर आई… अब आ गयी है तो आपको परोसना भी पड़ रहा है… कृपया इसे हास्य व्यंग्य के रूप मे ही लेंगे ऐसी आशा करता हूँ।

जूता मारा तान के लेगई पवन उड़ाय
जूते की इज्ज़त बची प्रभु जी सदा सहाय ।1।
 
साईं इतना दीजिये दो जूते ले आँय
मारहुं भ्रष्टाचारियन जी की जलन मिटाँय   ।2।
 
जूता लेके फिर रही जनता चारिहुं ओर
जित देखा तित पीटिया भ्रष्टाचारी चोर ।3।
 
कबिरा कर जूता गह्यो छोड़ कमण्डल आज
मर्ज हुआ नासूर अब करना पड़े इलाज ।4।
 
रहिमन जूता राखिए कांखन बगल दबाय
ना जाने किस भेस मे भ्रष्टाचारी मिल जाय ।5।
 
बेईमान मचा रहे चारिहुं दिसि अंधेर
गंजी कर दो खोपड़ी जूतहिं जूता फेर ।6।
 
कह रहीम जो भ्रष्ट है, रिश्वत निस दिन खाय
एक दिन जूता मारिए जनम जनम तरि जाय ।7।
 
भ्रष्टाचारी, रिश्वती, बे-ईमानी,   चोर
खल, कामी, कुल घातकी सारे जूताखोर ।8।
 
माया से मन ना भरे, झरे न नैनन नीर
ऐसे कुटिल कलंक को जुतियाओ गम्भीर ।9।
 
ना गण्डा ताबीज़ कुछ कोई दवा न और
जूता मारे सुधरते भ्रष्टाचारी चोर  10।
 
जूता सिर ते मारिए उतरे जी तक पीर
देखन मे छोटे लगें घाव करें गम्भीर ।11।
 
भ्रष्ट व्यवस्था मे चले और न कोई दाँव
अस्त्र शस्त्र सब छाँड़ि के जूता रखिए पाँव ।12।
 
रिश्वत खोरों ने किया जनता को बेहाल
जनता जूता ले चढ़ी, लाल  कर दिया गाल  ।13।
 
रहिमन काली कामरी, चढ़े न दूजो रंग
पर जूते की तासीर से  भ्रष्टाचारी दंग  ।14।
 
थप्पड़ से चप्पल भली, जूता चप्पल माँहिं
जूता वहि सर्वोत्तम जेहिं भ्रष्टाचारी खाहिं  ।15।
 
रहिमन देखि बड़ेन को लघु न दीजिये डारि
जहाँ काम जूता करे कहाँ  तीर तरवारि ।16।
 
जूता मारे भ्रष्ट को, एकहि काम नासाय
जूत परत पल भर लगे, जग प्रसिद्ध होइ जाय ।17।
 
भ्रष्ट व्यवस्था मे कभी मिले न जब अधिकार
एक प्रभावी मन्त्र है, जय जूतम-पैजार ।18।
 
जूता जू ताकत  फिरें  भ्रष्टाचारी चोर
जूते की ताकत तले अब आएगी भोर ।19।
 
रिश्वत दे दे जग मुआ, मुआ न भ्रष्टाचार
अब जुतियाने का मिले जनता को अधिकार ।20।
 
एक गिनो तब जाय के जब सौ जूता हो जाय
भ्रष्टाचार मिटे तभी जब बलभर जूता खाय।21।
 
दोहरे जूते के सदा  दोहरे होते  काम
हाथों का ये शस्त्र है पैरों का आराम ।22।
 
पनही, जूता, पादुका, पदावरण, पदत्राण
भ्रष्टाचारी भागते नाम सुनत तजि प्राण ।23।
 
जूते की महिमा परम, जो समझे विद्वान
बेईमानी के लिए जूता-कर्म निदान ।24।
 
बेईमानी से दुखी रिश्वत से हलकान
जूत पचीसी जो पढ़े, बने वीर बलवान ।25।

ओ मेरे चरण दास (जस्ट खुराफात)

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मेरे चरण दास…!

            सुनो मेरी अरदासकम लिखे को ज्यादा समझना, खर्चा जो भेजा था आधा समझनाकई दिन से तुम् दिलो दिमाग में रह गए हो फंस के, मन में याद बन के ऐसे कसके, जैसे ऊँगली में घुसी फांसजैसे दमे की सांस, जैसे टी बी की खांसी पुरानी,…..

मेरे पश्चानुगामी  … अब तो जिंदगी लग रही है बेमानी …. तुमारी आस में महाजन से कितना कर्जा कर चुकी हूँ, काम धंधा छोड़ दिया है, कितना हर्जा कर चुकी हूँ अंटी में दाम…! रात को चैन दिन को आराम.. तुम्ही कहो कैसे पड़े चैनकैसे रहूँ खुश

मेरे कामी पुरुष!.…… काम में इतना मगन….? क्या झूठी थी मुझसे तुम्हारी लगन…. तुम्हें भी अकेलापन कैसे भाता होगा, क्या तुम्हें मेरे चेहरे की झाइयां और जुल्फों का घोसला याद आता होगातुम्हारी याद मुझे अंदर तक हिला देती है, मन कसैला, जैसे कच्ची ताड़ी पिला देती हैये देस ये समाज मेरे दिल को तार तार करता है,… रात बेचैन दिन अनमना रहता है रोम रोम में उठती है सुरसुरी …….

मेरे नयनों की किरकिरी...! तुझे तहेतिल्ली से याद करती है तुम्हारी सिरफिरी…. हर पल मेरे नयनों में ही करकते होएकएल पल सीने में कसकते होक्या तुम अपने सारे खेलखिलंदड भूल गए? या किसी सौतन की गलबहियां झूल गएजरा याद करो वो गिल्ली वो  डंडा, वो चकरी वो गोटकभी मैक्सी के पीछे, कभी पेटीकोट की ओट आओ सम्हालो अपना माल असबाबसगरा गाँव पढ़ने को दौड़ता हैजैसे मै हूँ कोई खुली किताब

मेरे सींकिया कबाब  ...कुछ  तो दे दो जवाब …  साज़ बिखरे पड़े हैं बजाए कौनबर्तन को साफ़ करे, घर को सजाये कौन….? और जानेमन मेरी पीठ का एग्जिमा….??? तुम्ही कहो खुजाए कौन? …. तुम बिन तन्हाई में जीती हूँखून के घूँट पीती हूँ …. क्या करूं……जब भी तुम्हारी याद आती हैतुम्हारे पुराने कच्छे की तुरपनकभी फाड़ती हूँकभी सीती हूँअब तो एक ही है मलाल, हाल तो बिगड़ ही चुका है, कब तक सम्हालूँ अपनी चाल…….

मेरे अकेशोज्योतिर्कापाल.….आजा और अपना कुनबा संभाल…. तुम्हारा बड़कू खनगिन काखसमखास‘ (यानी खासम खास) हो गया हैछुटकी  लटक गयी  … मझला पास हो गया हैऔर क्या बताऊँ जीवन खार हो गया हैगाय और सांड की लड़ाई मेंबछिया का बंटाधार हो गया हैकभी तो लगता है कि जान…..कि अब  तो जान गई ..

मेरे तिर्यकनेत्रद्वयी …. इतनी देर काहे भई ….…. कब तक करूँ तुम्हरे नाम का जापतुम्हारा दारू से आरक्त और मदमस्त चेहरा भूले नहीं भूलता हैऔर मन है कि तुम्हारी गालियों और फटकारों में ही झूलता है …. तुम्हारी  मर्दानगी जब याद आती है तो दिल उठता है काँप….. जो जूता, वो चप्पल, वो गालियाँ वो झापतुम्हारी चाहत में टूटी खटिया पर लेटती हूँ और आँख मूँद लेती हूँ …. तुम्हें याद करती हूँ और तुम्हारी गंजी का पसीना सूंघ लेती हूँ…. देख आज फिर हो गयी मेरी आँखें नम …..

मेरे चवन्नी कममेरा कुछ तो रखो भरमअरे इन पैसों का क्या करूँ……?? बत्ती बनाऊं……? . और तेल में डाल के दिया जलाऊंतुम बिन ज़िंदगी कटती नहींचहुं दिस छाई अंधियारी… जैसे कामन वेल्थ की तैयारी तुम्हीं कहो तुम्हारी अमानत का कैसे हिसाब दूँ?? और सुबह शाम नेपथ्य से उठती  सीटियों का क्या जवाब दूँ ? …. दिलो दिमाग में उठते हैं बलबले ,,,

मेरे जिगरजले मेरे बजरबट्टूइंटरनेट के चट्टू …..जाओ   जहाँ रहो आबाद रहो ,,, गाज़ियाबाद चाहे इलाहाबाद रहो  …..  चिट्ठी करती हूँ बंदजब याद आये तो एक पोस्ट मेरे नाम की सजा देनावरना ट्विटर या बज़ पर बजा देना  …बातें लिखते हो कितनी चीपथोड़ा सोच को करियो डीपवरना सबकी उलटी टीप खाओगे ….जहाँ तहां बजाये जाओगे …. कुछ भी हो  तेरा यश हरदम अपनी जुबां पर सजाऊँगी …. और यही गाऊँगी

मुन्नी बदनाम हुई  ………………………तेरे लिए

                                                                                ‘आपकी प्राण‘, प्यासी

 

अकेशोज्योतिर्कापाल=बिना केश और चमकते कपाल वाला

तिर्यकनेत्रद्वयी= तिरछी नज़र वाला …(भेंगा)

ताऊ की "तपस्या" और भतीजे की चुटकी …

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भक्त जनों !!images (1)

आज बसंत पंचमी का पर्व है … शुभकामनायें क्या दूँ… देने को होता तो खुद ही ले लेते… चलिये नमस्ते ले लीजये… आज छुट्टी है… मौसम गरम हो रहा है…  आवारगी का सबसे अच्छा मौसम यही है ….  दिन मे नींद खूब आती है इन दिनों… कोई खास  काम भी नहीं है … सन्नाटा है… फिर भी नहा धो कर तैयार हैं….लेकिन मन सूना सा हो रहा है…और ताऊ को पढ़ रहे हैं।,, मन बैरागी है और मुस्क्यान भी बिखेर  रहे है,,,  देखये कुछ ऐसे-

मुख प्रसन्न मन खुंदक ऐसे

बिना टिप्पणी ब्लागर जैसे ….

…..हाँ तो ब्लॉग ब्लॉग  टहलते टहलते  जब हम ताऊयांग आश्रम मे पहुँचते हैं… तो देखते क्या हैं… कि ताऊ आजकल "तपस्या" मे गहन रूप से लीन हैं… इसी लीनियारिटी मे ताऊ ने हम ब्लागरन के कष्टों को दूर करने हितार्थ कृपा वर्षण करते हुए चंद छंद उवाचे….  छंदों की वैचारिक शृंखला ऐसी जुड़ी कि मन मे उमड़ घुमड़ वैचारिक बदरिया घिर आई और लगा आज जवाबी क़ौवाली की तर्ज़ पर जवाबी छन्द छेड़ा जाये… ताऊ से अनुरोध हुआ और अनुमति भी मिली… तुरत फुरत कार्य प्रगति पर…. और दिल्ली मेट्रो की स्पीड से कार्य पूरा … अब ताऊ की तपस्या देख कर अपन का  वैराग्य भी ज़ोर मारे तो हम क्या करें… लीजिये एक तरफ ताऊ की तपस्या से उपजे वाचनामृत और एक तरफ भतीजे की चुटकी —

ताऊ के वाचनामृत भतीजे की चुटकी

या टिप्पणी दो रोज की, मत कर या सो हेत 
ब्लाग लिखिये नियम से, जो पूरन सुख हेत

बिना टिप्पणी ब्लॉग है जैसे बंजर खेत

लिखे बहुत टीपे नहीं, तो कोई भाव न देत

ब्लाग की सेवा करो, सदा बढावो ज्ञान
सब फ़ंदों को छोरिके, ताऊ का धरो ध्यान

ब्लागर मीटिंग मे रहो, सदा बघारो ज्ञान

मठाधीश कोई भजो,     तभी बढ़ेगा नाम

मारीच गरजै, सुर्पणखां दमकै, बेनामी बरसैं आय
चहूं दिश फ़ैले गंदगी, ब्लागों पर मोडरेशन लगि जाय

सूर्पनखा चहके कहीं,       या नाचे मारीच

सज्जन सज्जन ही रहे, रहे नीच तो नीच

टिप्पणी तो निज पास है मूरख ढूंढे कहीं और
आपन की बोर्ड चलाइये, चाहे जितनी मोर

मेहनतकाश मोती चुगे, चमचा मांगे भीख

ब्लागर बाबा कह गए, ले लो बेटा सीख

टिप्पणी ना बाड़ी उपजे, ना कहीं हाट बिकाय
ये तो निज के की बोर्ड से, चाहे जितनी लै जाय

आपहिं करिए टिप्पणी, आपहिं लिखिए ब्लॉग

लगा मोडरेशन रखो,      ब्लॉग रहे बेदाग

ब्लागर तो लिख लिख मरा, मिटा ना ब्लाग का फेर
चूस चूस कर टिप्पणी, इच्छा मिटी ना केर

ब्लागिंग मे बौराय के, कितने फंसे सुजान

बीवी से कहते फिरें, इक टिप्पा दे दो जान

ब्लागर बड़े परमारथी, टिप्पणी जो बरसै आय
इच्छा पूरी करे और की, अपनो की बोर्ड चलाय

ब्लागर ऐसा चाहिए,     जैसा सूप सुभाय

अच्छे टिप्पे गहि रहै,    रद्दी देय उड़ाय

चेला सज्जन मठाधीष चतुर, टुटी जुड़ै सौ बार
इक दूजे को गारी बके, थमै ना जूतमपैजार

मठाधीश है चतुर तो, चेला भी कम नाय

गारी बकि, लरि झगरि के, दूना नाम कामाय

जिहिं ब्लागर टिप्पणी न करे, ये ब्लाग की सेवा नाहिं
ते ब्लाग मरघट सारखे, बेनामी बसै तिन माहिं

बेनामी ना आय तो,     नाम कहाँ से होय

चर्चा मे तबहीं रहे, जब जुत्तम जुत्ता होय

मठाधीष संग ना कीजिए, सुर्पणखां ब्लाग ना तिराइ
बेनामी, अनामी, मारीच की, एक टिप्पणी विष भाई

सूर्पनखा, मारीच सब,   चर्चा मे ले आँय बेनामी की कृपा से, जग प्रसिद्ध होई जाँय  

बेनामी सबहुँ निन्दिए, जो बगल में छुपा होय
कबहुँ आय गारी लिखै, ब्लाग बंद करनो पडि जाय

बेनामी पर दया कर,        वो भी है इंसान

पिछवाड़े मे दम होता, तो क्यों रहता बेनाम

टिप्पणी एक अमोल है, जो कोइ करतो जाय
सोच समझि सब ठोक के, तब की बोर्ड चलाय

आह, वाह, दिल छू गया, अरे गज़ब, क्या खूब

इत्ते से यदि काम हो,तो क्यों गहरे मे डूब

ऐसी टिप्पणी किजिये, ब्लागर को हिम्मत बंधाय
औरन को प्रेरित करे, खुद की भी वाह वाह हुई जाय

टीपो यूँ ब्लॉगर बेचारा, चिंता मे परि जाय

वो बेचारा कुढ़ि मरे, अपन धाक जमि जाय

बेनामी नियरे राखिये, ब्लाग पर टिप्पणी करवाय
बिन मेहनत लिखे बिना, नाम प्रसिद्ध हो जाय

निंदक की निंदा सुनो, सूर्पनखा की राय

ना जाने किस रूप, कहाँ नाम होई जाय

मधु चूसे मीठा लगे, भंवरा उडि उडि जाय
चूसकर जो छांडि दे, भव सागर तरि जाय

मधु चूसो मधु चुसाओ, अद्धा पौवा लाय

भँवरा बनि उड़ते फिरो, यही हमारी राय…

(नोट-ज़्यादा शराफत वाली पोस्टें न  लिखें बेनामी भूखों मर जाते हैं 🙂

और अंततः….

ब्लॉग देख कर ना लगे,      लफ़्फ़ाज़ी का ढेर

कम लेकिन सार्थक लिखो, तान ज्ञान की टेर

……. पद्म सिंह

(चित्र गूगल से साभार)

ठहर….ठहर….जाता कहाँ है…

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० क्यूँ रे मुए तेरा दिमाग फिर गया है क्या  ?

-क्या हुआ  जी .. कुछ गलती हो गई मेरे से ?

० मै कहती हूँ तेरे घर में माँ बहन नहीं है क्या?

-क्यों ऐसा क्यों कहती हैं बहन जी … मैंने तो आपको कुछ भी नहीं कहा

०किसी और को ही क्यों कहा … तुम्हारे  अपने घर में माँ बहन नहीं है क्या …!!

-लेकिन बताइये तो सही मेरे से गलती क्या हो गयी? …

अरे तू सठिया गया लगता है मुझे तो .. तभी तो दूसरों की लुगाइयों को अपनी माँ बहन बनाता फिर रहा है

– लेकिन बहन मैंने आपको तो कुछ नहीं बोला ? आप तो खामखा हत्थे से उखड़ी जा रही हैं

० देख तू अपनी ज़बान को लगाम दे… एक तो बहन जी बहन जी बोले जा रहा है ऊपर से शराफत का ढोंग भी दिखा रहा है … बहन होगी तेरी बीवी… खबरदार दुबारा बहन बोला तो ज़बान खींच लुंगी…. मै तुझे बहन नज़र आती हूँ..?

-माफ करना ब् ब् बहन  …सॉरी … माता जी… मै आपका मतलब समझ नहीं पाया था …

अरे मुए… तू ऐसे बाज़ नहीं आएगा …. अब माता जी पर उतर आया? …इतनी भी तमीज़ नहीं कि किस उमर वाली को क्या बनाया जाता है? चखाऊं तुझे मज़ा अभी … ??…

-लेकिन मैंने तो आपको माताजी ही तो कहा है कोई गाली तो नहीं दी……….अब बहन न कहूँ …. माता जी न कहूँ तो और क्या कहूँ….

० आजकल के मर्दों को तमीज़ नाम की चीज़ नहीं रह गयी है….और उसमे ओल्ड फैशन्ड लोगों ने वैचारिक स्वतंत्रता  की वाट लगा रखी  है… अरे भाभी, मैडम मोहतरमा या निक नेम से बुलाते तुम्हारी जीभ जल जाती है क्या ?………देखने में तो पढ़े लिखे मोडर्न लगते हो…काम गँवारों जैसे … और फिर रिश्ते बनाते समय कम से कम उम्र का तो ख़याल कर लिया करो ??………किसी ने ठीक ही कहा है…. पढ़ लिख कर ज्ञान तो सब बटोर लेते हैं…लेकिन कुछ लोग संस्कार से कंगले ही रह जाते हैं… अरे मोडर्न ज़माना है, जानू, डार्लिंग, स्वीटी वगैरह की जगह माता जी, बहन जी …???   कौन से अजायबघर से आये हो?

-देखिये म्म म्मा मैडम जी…मुझे सिखाया गया था कि पराई स्त्रियों को माँ बहन की नज़र से देखो…. इज्ज़त से पेश आओ… इसी लिए मै…वो ..

० अच्छा तो बात अब समझ में आई … मोडर्न कल्चर तो तुम लोग सूँघ भी नहीं पाए हो अभी तक … ये सूट टाई देख के मै धोखा खा गयी थी… अभी हम लोग तुम्हें पापा, अंकल या चचा बोलने लगें तो ..?? चले आते हैं जाने कहाँ से…!!!

जी वो ऐसा था कि ….

अच्छा अच्छा … एक बात बताओ …. तुम करते क्या हो ?

-वो क्या है कि वैसे तो अपना छोटा मोटा काम है … लेकिन टाइम पास करने के लिए थोड़ी बहुत ब्लोगिंग कर लेता हूँ …

० ओहो .. तो नए नए  ब्लॉगर हो … तभी तो कहूँ … ये हर किसी को “जी”, “जी”, भाई साब, सर सर..कहने की आदत कहाँ से सीख ली… वैसे कितने दिन से ब्लोगिंग करते हो..?

-अभी तो नया ही समझिए… फिर भी खा कमा कर दस बारह टिप्पणियाँ खैंच ही लेता हूँ…

० अच्छा ? मतलब अभी  ब्लोगिंग के लडकपन के दौर में हो…

– जी ऐसे ही समझ लीजिए….

० ह्म्म्म… तो मतलब तुमने अभी तक कोई गुरु, केयर टेकर, या गाड-फादर नहीं थामा!!!

-नहीं जी… सलाहें तो बहुत सी पढ़ने को मिलती हैं लेकिन मेरे ऊपर कोई “केयर ही नहीं टेकता… “

० तुम्हें अभी तक मेरी बात समझ में नहीं आई लगता है… अभी तक जी, जी लगा रखा है … इंटरनेट और ब्लोगिंग ग्लोबलाइजेशन के नए दौर की शुरुआत है डूड .. वसुधैव कुटुम्बकम की अवधारणा यहीं तो परवान चढ़ती है… अब औपचारिकताओं के चक्कर में ही पड़े रहोगे तो एक दूसरे के नज़दीक कैसे आओगे ?…

-देखिये मै सीधा सादा शादी शुदा ब्लॉगर हूँ जी… नज़दीक आ कर मै क्या करूँगा …

० अरे तुम रह गए निरे ब्लॉगर के ब्लॉगर …. मेरा मतलब था कि इस तरह लोगों से  जान पहचान कैसे बनेगी कैसे एक दूसरे को जानोगे … फेसबुकिये बनो आर्कुटिंग करो, चैटियाओ तब थोड़ा मोडर्न तहजीब आएगी तुम्हें …

– देखिये जी.. मेरी पत्नी मुझे जब इंटरनेट पर बैठे देखती है, आर्कुट और फेसबुक पर दोस्ती करते देखती है…. ब्लॉग पोस्टों पर महिलाओं के कमेन्ट देखती है उसे जाने क्या हो जाता है…. मेरा जीना हराम करके रख देती है…मुझे निठल्ला, कामचोर जैसी गालियों से नवाजती है और कोसती है सो अलग… मै बड़ी मेहनत से रात भर जाग जाग कर पोस्टें लिखता हूँ …एक तो उनपर टिप्पणी नहीं मिलती ऊपर से घर  के साथ साथ ब्लॉग जगत में मेरी इज्जत भी नहीं हो रही है … आप ही बताओ मै क्या करूँ…

० अरे बुद्धू … इसका मतलब तुम कभी ब्लॉगर मीट में नहीं गए लगता है… मैने कई बार इस समस्या हल ब्लॉग जगत के सामने उद्घाटित किया है… आज तुम भी सुनो .. पहले तो ऐसा फील करना शुरू करो कि हिंदी की रक्षा का सारा दारोमदार तुम्हारे काँधे पर है… अगर तुम नहीं लिखोगे तो हिंदी को कोई नहीं बचा पायेगा… दूसरे घर में जितने सदस्य हो सब को ब्लोगिंग शुरू करवाओ… सब से पहले तो अपनी पत्नी के नाम से ही एक ब्लॉग बनाओ… उसकी पुरानी वाली कोई झकास सी फोटो सहित बढ़िया सी प्रोफाइल बनाओ…

-लेकिन उसे तो कुछ भी लिखना विखना नहीं आता… हाँ किसी की टांग खिंचाई और मुंहजोरी बेहतरीन कर लेती है…हाँ बचपन से उसे नेतागीरी का बड़ा शौक रहा है जी… लेकिन चूल्हे चौके में फंस कर बेचारी…!!!

लो कल्लो बात, … ब्लोगिंग के लिए ये चीज़े तो सबसे ज्यादा ज़रूरी हैं… उसके नाम से अल्लम गल्लम कुछ भी दोचार पोस्टें डालो और लोगों को लिंक मेल कर दो…   इससे भी बात न बने तो दोचार गुरुघंटाल… मठाधीश टाइप के ब्लॉगरों के ब्लॉग पर जा कर खरी खरी जो लगे लिख दो…. बस देखो… अगर मोडरेटर से बच गयी तो एक टिप्पणी ही  तुम्हारी बीवी को (बद)नाम कर देगी….फिर होगा ये कि ब्लोगिंग की रीति के हिसाब से नया पाठक(शिकार) समझ के दोचार लोग ज़रूर उसकी पोस्ट पर  “दिल को छू गया” “ज़बरदस्त” “आपकी लेखनी चूमने को जी चाहता है”, जैसे दो चार कमेन्ट दे ही जायेंगे …और नहीं तो फेमिनिस्ट ब्लॉगर तो हैं ही बैकअप के लिए… धीरे धीरे जितनी उजड्डता करेगी उतनी ही नेतागीरी चमकती जायेगी… उतनी ही चर्चा में रहेगी …बिग बॉस नहीं देखते क्या ?

-अच्छा जी.. फिर मेरी पत्नी का शौक पूरा हो जाएगा  ?

०  और नहीं तो क्या ? … तारीफ़ किसको नहीं अच्छी लगती है… सच्ची हो या झूठी,… धीरे धीरे उसे उसे भी ब्लोगिंग की लत पड़ जायेगी…एक पोस्ट लिखते ही किचेन से दौड़ दौड़ कर टिप्पणी गिनने पहुंचा करेगी… रातों रात कनाडा से ले कर  छत्तीसगढ़ तक शोहरत हो जायेगी …पत्नी इंटरनेशनल हो जायेगी … आप भी खुश वो भी खुश… और इससे दोहरा फायदा भी होगा  हिंदी को (आभासी)तरक्की भी मिलेगी… और ऐडसेंस के हिंदी ब्लॉग पर आने से कमाई के रास्ते भी खुलेंगे…

-देखो जी … आप तो मुझे महारथी लग रही हैं…आपके ब्लोगिंग ज्ञान से मै अभिभूत हूँ… अगर आपको बुरा न  लगे तो दोचार टिप्स और दें सफल ब्लॉगरी के…

० हाँ अब लाइन पर आते दीख रहे हो… संगत में रहोगे तो तुम्हें कहाँ से कहाँ पहुँचा दूंगी  … लेकिन इसके लिए सबसे पहले शराफत छोडनी पड़ेगी तुम्हें… खुद कुछ भी करो… लेकिन दूसरों को कोसने से बाज़ मत आओ…. दुनिया में जाने क्या क्या घट रहा है…सब लिख मारो…ब्लॉग जगत को अपनी देख रेख में रखो…किसी की मज़ाल न हो कि तुम्हारे विचारों से इतर कुछ भी लिखे… दाना पानी ले कर चढ़े रहो… अपने ब्लॉग को निजी हमाम कम पाखाने जैसा समझो …. जहाँ दिन भर की घर और  दुनिया भर से मिली खुन्नस  को दूसरों को लक्ष्य करते हुए वमन कर दो… इससे तुम्हारा चित्त शान्त हो जाएगा… और तुम्हें नींद भी अच्छे से आएगी …(दूसरों की उड़े सो उड़ जाए )

-मुझे माफ कर दीजिए मै अज्ञानी…आपको समझ न पाया था … आप तो ब्लॉग जगत की डॉली निकलीं… जो अपने (उजड्डपन के) दम पर बिगबॉस  से अपना तम्बू उखड़ने नहीं देती  हैं … आप मेरे ऊपर कृपा करें…मै कोई लेखक तो हूँ नहीं… न ही मुझे कविता शविता, रचना वचना करनी आती है… ऐसे में अपनी ब्लोगिंग की दूकान कैसे चलाऊं? जरा इस पर भी अपने आशीर्वचन कहें

० चलो तुम कहते हो तो कुछ मन्त्र और ले लो … ये बहुत आसान है… एक ब्लॉग ऐसा बनाओ जो किसी कम्युनिटी, लिंग  अथवा किसी धड़े विशेष का प्रतिनिधित्व करता हो… स्वयं उसके मोडरेटर बन जाओ और ढेर सारे कंट्रीब्यूटर शामिल कर लो… बस जी…तुम्हारा मल्टीप्लेक्स थियेटर तैयार है… टिप्पणियों का मोडरेटर चालू रखो… अपने हिसाब की टिप्पणियाँ रिलीज़ करो बाकी टिप्पणियों का गर्भ में ही घोट दो… फिर देखो… बिना तुम्हारे कुछ किये धरे दुकान चल निकलेगी… लेकिन हाँ … एक बात ज़रूर याद रखना… बीच बीच में किसी ब्लॉग अथवा पोस्ट के विषय में तंज करते हुए एक दो पोस्ट ज़रूर डालते रहना … इस से तुम्हारा ब्लॉग चर्चा में बना रहेगा…

– अभिभूत हूँ… आपने मेरे ज्ञान चक्षु खोल दिए… मै बेचारा यदि आपके सानिध्य में न आता तो अज्ञानी ही मर जाता … आगे और क्या आज्ञा है आपकी…

० देखो … चंद बातें और याद रखो… खुद भले कोई सृजनात्मक पोस्ट न लिखो… लेकिन सदैव हिंदी हित की बातें… ब्लॉग हित की बातें… और नए ब्लॉगर्स के लिए सलाहें… पुराने ब्लॉगर्स पर चुटकियाँ…अपनी  पोस्टों के रूप में डालना मत भूलना … इससे तुम बरिष्ठ ब्लॉगर्स में शामिल हो जाओगे…

– जी मै साSब समझ गया … अब आप अंतिम मन्त्र और दे कर मुझे कृतार्थ करें…

० अंतिम बात सदैव ध्यान रखना … एक हाथ दे एक हाथ ले की बात कभी मत भूलना … कोई भी एग्रीगेटर खोल कर सारी पोस्टों पर जाना .. धडाधड… दो तीन सौ पोस्टों पर आह वाह की टिप्पणी कर आना… पढ़ना कोई ज़रूरी नहीं … बाक़ी सब भली करेंगे राम..

-(घुटनों पर बैठ कर)…. हे मेरी ब्लॉगर माता… मै अज्ञानी मुझे कुछ नहीं आता … आपका ज्ञान सर आँखों पर … हे मेरी बहना … अगर ब्लॉग जगत में है रहना… तो याद रखूँगा आपका कहना … जय हो…. जय हो…माते ..

० कमीने …तूने फिर माँ बहन बोला… इत्ती देर से तुझे समझा रही हूँ … लेकिन तू ठहरा निरा गधा…. तेरे घर में माँ बहन नहीं है क्या …जो राह चलते किसी को भी माँ बहन कहने लगता है… ठहर तुझे मज़ा चखाती हूँ…

०…… ठहर जाता कहाँ है… मै तेरी खबर लुंगी …छोड़ने वाली नहीं हूँ तुझे मै… अपने ब्लॉग पर लूँगी तेरी …. तू तड़पेगा  अपनी सफाई देने को और तेरी टिप्पणी का गला मोडरेटर में ही घोंट दूंगी…ओय…रुक ..!!!

…ओए…. ठहर ठहर …  जाता कहाँ है…SSSSSSS!!!

 

 

(निर्मल हास्य)…… द्वारा पद्म सिंह