नज़र बदलती है

नज़र बदलती है नजरिया नहीं बदला करता
चश्मे बदलने से ज़माना नहीं बदला करता ..
कुछ बात तो होगी के परेशां सा है……..
वो इस तरह तो करवट नहीं बदला करता…

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भटकन

कितनी गलियाँ कितने मोड़
तेरी खातिर आया छोड़
भटकन तेरा  अंत नही है
जितनी गलियाँ उतने मोड़…..

डोर

रूखे तुम भी थे
कठोर मै भी
दोनों के बीच
एक डोर थी
नाज़ुक सी..
थोड़े नम जो तुम हो जाते
थोड़े कोमल हम
बस वो डोर सुदृढ़ हो जाती…

रिश्ता एक बुना था मैने

रिश्ता एक बुना था मैने
नयी डिजाइन, नए रंग में
पश्चिम जैसे नए ढंग में
कुछ उलटे कुछ सीधे फंदे
उलझे हुए शिकंजे फंदे
पर अनजाने बीच बीच में
कुछ फंदे जो छूट गए थे
या फिर धागे टूट गए थे
छेद दिखाई देते है,
(मतभेद दिखाई देते है)
जहाँ जहाँ टूटन जोड़ी थी
गांठें सी चुभती रहती है