सरोकार

मीनू का हर-सिंगार

Posted on Updated on

दशहरे के बाद के दिन हर पखवारे शीतल होते जाते हैं. सुबह की धूप रुपहली होने लगती है… सुबह घर से निकल कर कुछ दूर यूं ही ठंडी ऑस मे टहलने की मंशा ने अनायास मुझे वहाँ खड़ा कर दिया… उसके घर मे अब ताला पड़ा हुआ है… घर वाले भी गाँव के पैतृक मकान मे जा चुके हैं, पर तुलसी का पेड़ आज भी से वैसे हरा भरा है जैसा उसे आज भी हर शाम दीप जला कर पूजा जाता हो… आज अनायास मै तुलसी के उसी पौधे के पड़ोस मे खड़े रह कर हर-सिंगार के पेड़ से झर रही अगणित तारिकाओं को निहार रहा था तो ऐसे लगा जैसे किसी ने पीछे से पुकारा हो…. “लड्डू वाले भैया”…!!! एक पल को लगा जैसे मै मुस्कुराया भी था, फिर मन भारी हो गया… मुझे पता था ये मेरे मन की अंतरध्वनि थी परन्तु मन एक बारगी थरथरा कर रह गया… बैठ कर हरसिंगार के फूल चुनने लगा… पर एक आवाज़ मेरा पीछा नहीं छोड़ रही थी “लड्डू वाले भैया”….!!!

जितना पढ़ाई मे मेधावी, उतना ही बात व्यवहार मे प्रखर… माँ बाप की साधारण आर्थिक स्थिति मे भी घर को चाँदी सा चमका कर और करीने से सजा कर रखने का पागलपन था उसे.. माँ बाप भाई सब के बीच सामंजस्य की कड़ी कहलाने वाली वो लड़की समझ मे अपनी उम्र से बड़ी थी…भाई बहनों मे सबसे छोटी लड़की होने के कारण परिवार मे और अपनी चपल स्निग्ध मुस्कान वाली चंचल लड़की पूरे मोहल्ले मे सबकी चहेती थी। गली के नुक्कड़ पर उसका घर होने के कारण सब उसके घर के सामने से ही निकलते। अक्सर ऐसा होता कि मै जब भी उधर से निकलता तो वो हर-सिंगार के पेड़ के नीचे खड़ी दिख जाती। मेरी नज़र पड़े न पड़े… एक आवाज़ ज़रूर मेरा पीछा करती… “लड्डू वाले भैया”॥… और मेरी नज़र पड़ते ही वो हँसते हुए दोनों हाथ जोड़ देती … नमस्ते भैया … !!!… मेरे लड्डू कहाँ हैं…? ये लगभग रोज़ का नियम था… मेरा ये नाम उसने कब रखा ये ध्यान तो नहीं पर शायद किसी दिन उसने किसी खुशी के मौके पर बोला था आप बड़े भैया हो आप लड्डू खिलाओगे… और उस लड्डू का तकादा रोज़ हुआ करता था… सुबह भी शाम भी ।

हर किसी के लिए एक सुबह ऐसी बनी होती है जिसे वह कभी छू नहीं पाता.. जीवन के रंग-मञ्च पर हर किरदार की एंट्री और एग्जिट दोनों तय है। न एक क्षण इधर और न एक पल उधर। कई बार पलट कर पीछे देखो तो लगता है पूरा जीवन यूं ही सरसराती रेलगाड़ी सा निकल गया है…बिना जाने कि हम आए ही क्यों थे यहाँ…जीवन का अंतिम स्टेशन भी आ जाता है और हम अनजाने  ही उतार दिये जाते हैं।

अचानक एक दिन उठते ही किसी ने बताया मीनू की तबीयत बहुत खराब है। आई सी यू मे है शायद पेट मे कोई गंभीर रोग है। मुझे सहसा विश्वास नहीं हुआ… कल रात ही तो पड़ोस की बर्थ-डे पार्टी मे मेरी बिटिया के साथ एक ही थाली मे खाना खाया था उसने …. हँस रही थी… खिलखिला रही थी.. अपने हाथों से सिला हुआ सूट भी पहना हुआ था उस दिन। फिर सुबह ही अचानक ऐसा क्या हो गया?….. अस्पताल पहुँचने पर देखा तो उसके हाथ पैर पलंग से बाँध दिये गए थे। देह स्याह पड़ रही थी … आँखें उलट रही थीं… बार बार चीत्कार के साथ पूरी देह दोहरी हो रही थी। मुँह से चीखने के अलावा कोई आवाज़ नहीं निकल रही थी… मुझे देखते ही … भैया!!!!!!! “भैया मुझे बचा लो” की कातर चीत्कार.. जिसे आज भी याद करते हुए मेरा पूरा वजूद सिहर जाता है… इसी चीख के साथ वो अचेत हो चुकी उस लड़की की वो शायद इस दुनिया मे किसी के लिए दी गयी अंतिम पुकार थी। एक दो घंटे बाद उसे वेंटिलेटर पर डाल दिया गया… मुँह मे पाइप लगी होने के कारण कुछ भी बोल पाने मे असमर्थ उसकी  की कातर आखें बहुत कुछ कहना चाह रही थीं… शरीर का बार बार ऐंठना….. ऊपर उठना और धड़ाम से गिर जाना…कल्पना भी नहीं की जा सकती उस पीड़ा की… आखिर उसकी असीम पीड़ा का अंत भी आया … वेंटिलेटर पर 12-13 घण्टे का अस्पतालीय नाटक भोगते हुए… वो कब विदा हो गयी किसी को पता नहीं चला। एक बार फिर कोई प्रेम समाज के बेदर्द पूर्वाग्रह का शिकार हो गया (दो घंटे बाद ही सल्फास की डिबिया भी मिल गयी थी… उधर दूसरे अस्पताल मे एक नौजवान भी इसी तरह वेंटिलेटर पर दम तोड़ रहा था)

अगले दिन दुनिया का दूसरा नाटक भी निभाया गया… पैसे और सिफ़ारिश से पोस्टमारटम रिपोर्ट ठीक कारवाई गयी, पुलिस से सेटिंग की गयी…रात भर मे पानी की थैली मे बदल चुकी लड़की चिता की ज्वाला मे धुआँ बन ऊर्ध्वगामी हो गयी… सब कुछ ठीक ठाक हो गया.. तमाम मेहमान जुटे, सांत्वनाएं दी गईं,,,बाकी बची दवाइयाँ वापस कर पैसे लिए गए… और चार पाँच दिन मे सब खत्म… दुनिया अपने पुराने ढर्रे पर चल पड़ी…. पिता और भाई के चेहरे पर कोई खास  शिकन नहीं थी …कहीं न कहीं उनके चेहरे पर काम ठीक से निपट जाने का संतोष झलक रहा था, पुलिस केस का डर  पहले से ही सता रहा था… और फिर शायद उनकी नज़र मे ‘ऐसी लड़की’ का जाना …. जो हुआ ठीक हुआ… और फिर शादी ब्याह के पाँच-सात  लाख रूपये का खर्च भी बच गया था…!

हर-सिंगार सब कुछ वहीं खड़ा देखता रहा… उस समय हर सिंगार की उम्र भी फूलने फलने की नहीं थी… अब उसमे फूल आने लगे हैं… परंतु इन्सानों की दुनिया मे फलने फूलने के लिए इसकी कीमत अपनी आत्मा, अपने हृदय की धड़कनें झूठी प्रतिष्ठा और दक़ियानूसी परम्पराओं के हाथ गिरवी रख कर देनी होती है… और कई बार अपना जीवन दे कर भी।

मै कभी लड्डू नहीं ला पाया उसके लिए… अब लाने का कोई लाभ भी नहीं… कोई एक बड़ा कर्ज़ मेरे सिर छोड़ कर चला गया है। हर-सिंगार महक रहा है… जब तक यहाँ रहूँगा हर-सिंगार को सींचता और पोसता रहूँगा… संभव है कर्ज़ कुछ तो कम जाय।

….. पद्म सिंह 18-10-2011

 

सत्य साईं के चमत्कार और भभूत की महिमा….पद्म सिंह

Posted on

पुट्टीपर्थी के सत्य साईं बाबा की हालत गंभीर है… सत्य साईं बाबा अपने चमत्कारों और सामाजिक हित में किये गए कार्यों के लिए बड़े बड़े राजघरानों से लेकर उद्योगपतियों द्वारा पूज्य रहे हैं…

amma.PPMIX-1मेरी पूजनीया दिवंगत नानी भदरी रियासत की रानी स्वर्गीया गिरिजा देवी जो वर्तमान के बहुचर्चित विधायक राजा भईया की दादी और अजयगढ़ रियासत की बेटी थीं, की रिश्ते में ननद लगती थीं और दोनों में इतना अधिक प्रेम था कि दोनों ने उम्र एक बड़ा हिस्सा साथ साथ बिताया…. भदरी उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जनपद की तीन रियासतों में से बिसेन(विश्वसेन) राजपूतों की छोटी सी रियासत है. अंग्रेजों के समय में  राजा भईया के बाबा स्व० बजरंग बहादुर सिंह जो हिमांचल प्रदेश के गवर्नर भी रहे, को रायसाहब की पदवी प्राप्त थी. इसके बारे में विस्तृत चर्चा फिर कभी करेंगे.

imagesमेरी नानी जिनको हम प्यार में अम्मा कहते थे.. रानी हुज़ूर के साथ प्रतिवर्ष एक दो महीने के लिए तीर्थाटन के लिए जाया करती थीं. घटना 1971 के आसपास की होगी जब मै एक साल का ही रहा होऊंगा. उस समय पुट्टीपार्थी के सत्य साईं बाबा की प्रसिद्धि अपने चरम पर थी. राय साहब उन दिनों लंबी बीमारी के दौर से गुजर रहे थे… तब चिकित्सा विज्ञान उतना उन्नत भी  नहीं होता था… दवाओं के साथ दुवाओं का भरोसा लेना आम बात थी… इसी सन्दर्भ में नानी और रानी हुजूर साईं बाबा के दर्शन को गए थे… यह कहानी नानी ने हमें कई बार सुनाई थी… साईं बाबा के दरबार में उस समय भी पैसे वालों के लिए दर्शन आदि का विशेष प्रबंध होता था… जैसी सामर्थ्य वैसी कृपा… वहाँ की कहानी बताते हुए नानी कहतीं… लोग उनके पैरों को धो कर उसका पान करने तक को तरसते थे… साईं बाबा जब लोगों को दर्शन देने निकलते तो हवा में हाथ लहराते और कुछ न कुछ उनके हाथ में प्रकट होता और उसे अपने भक्तों को देते… विशेष भक्तों के लिए विशेष कृपा बरसती थी जिसमे स्विस घड़ियों, मंहगी अंगूठियां से ले कर आदि बहुत कुछ होता.…साधारण भक्तों के लिए खुशबूदार भभूत की पुड़िया होती…  बस हवा में हाथ लहराते और हाथ में  कुछ न कुछ प्रकट हो जाता…

राय साहब के स्वास्थ्य लाभ के लिए आशीर्वाद और प्रसाद लेकर कुछ दिन में नानी लोग लौट आईं और साथ लाईं साईं बाबा के प्रति ढेर सारी श्रद्धा और  ढेर सारे उनके चित्र और प्रतीक आदि.  साईं बाबा की बड़ी सी फ्रेम की हुई फोटो महल के मुख्य पूजाघर में पहले से ही प्रतिष्ठापित कर दी गयी थी… एक दिन जब राय साहब के प्रमुख नौकर सत्यनारायण (जिन्हें हम प्यार से सत् नारायन मामा बोलते थे) पूजाघर की सफाई और व्यवस्था आदि देखने गए तो वहाँ चमत्कार  हो चुका था…साईं बाबा की फोटो से स्वतः भभूत निकल फ्रेम के शीशे पर धार बनाते हुए नीचे गिर रहा था… फिर क्या था… साईं बाबा ने कृपा बरसाई थी… पूरे महल में चर्चा फ़ैल गयी और लोग दर्शन करने को आने लगे लेकिन मुख्य पूजाघर होने और महल के अन्तःपुर में स्थित होने के कारण आम लोगों को दर्शन नहीं मिल सकते थे.., लेकिन चर्चा चारों तरफ फ़ैल गयी थी….

अब तो यह रोज़ की बात हो गयी… रोज़ सुबह साईं बाबा की फोटो से भभूत निकलने लगा था… लेकिन यह भभूत किसी को मिलना दुर्लभ था… किसी भी खास या आम को इसे छूने की इजाज़त नहीं थी… चूँकि राय साहब उस समय बीमार रहते थे…तो इस भभूत को रोज़ विशेष देख रेख में एकत्र किया जाता और शहद में मिला कर राय साहब को खिलाया जाता…या सिलसिला कुछ दिनों तक चला भी…

मेरी माँ भी उन दिनों नानी के साथ महल में ही थीं, एक दिन सुबह की बात है… माँ भी मंदिर में यह चमत्कार देखने पहुँच गयीं… नानी की इकलौती संतान और नाना के उस समय में उच्च शिक्षित होने के कारण मम्मी हमेशा से बहुत व्यावहारिक और प्रैक्टिकल  सोच वाली रही हैं … माँ को यह घटना पहले दिन से ही गले नहीं उतर रही थी…उस दिन सुबह सुबह जब नौकरों ने सफाई शुरू की तो उन्होंने मंदिर की खूब अच्छे से सफाई करने के लिए निर्देशित किया और खड़े हो कर सफाई करवाने लगीं…  वैसे तो साईं बाबा की फोटो को छूना भी लोगों के लिए मना था… लेकिन मम्मी ने ही कहा कि आज सारी फोटो और मूर्तियाँ हटा और खिसका कर अच्छे से सफाई करो…

और फिर वही हुआ जो उन्हें पहले से ही खटक रहा था… साईं बाबा की फोटो जैसे ही हटा कर सफाई की जाने लगी… भभूत का राज़ सामने आ गया….

दरअसल हुआ यह था…. कि साईं बाबा की फोटो एक बेहतरीन और मंहगे लकड़ी के फ्रेम में जड़ा हुआ था…. फोटो फ्रेम काफी समय से एक ही स्थान पर रखा हुआ था… इस कारण से चुपचाप ढेर सारी दीमकों ने लकड़ी के फ्रेम को अपना घर बना लिया था और भीतर से फ्रेम को खोखला कर दिया था… और यही दीमकों द्वारा चाटी गयी लकड़ी का महीन चूरा फ्रेम के छेदों से होकर फोटो के शीशे पर सरकता हुआ नीचे की ओर गिर रहा था….

भेद खुल चुका था… आगे क्या होना था… बात को दबाने का प्रयास किया गया…. और कुछ विशेष लोगों के अतिरिक्त और किसी तक यह बात नहीं फैलने दी गयी… इस तरह महल और सत्यसाईं बाबा दोनों की इज्जत बची रह गयी…

ये उन्हीं साईं बाबा की बातें हैं जो आजकल गंभीर अवस्था में वेंटिलेटर पर  हैं और चमत्कारों और भभूतों की क्षमता से निकल आधुनिक चिकित्सा की शरण में हैं…

….. पद्म सिंह

(यह पोस्ट सत्य घटना पर आधारित है और किसी की व्यक्तिगत आस्था को चोट पहुंचाने के लिए नहीं है)

फोटो गूगल से साभार

हे प्रभु इस शहर को ये क्या हो गया है ?

Posted on

प्रभू ….

अब से पहले शहर की ये हालत न थी,,,, आज क्या हो गया…. आज क्या हो गया…

ये गाजियाबाद शहर को हो क्या गया है…  मैंने तो खुद को चिकोटी काट कर देखता हूँ कि कहीं ये सपना तो नहीं है? जो अधिकारी अपने ए सी रूम्स मे आराम कुर्सी पर बैठे विभागीय फोन पर बतियाया करते थे एक हफ्ते से  काम के आगे दिन रात नहीं देख रहे हैं। सरकारी मैडमें सब्जी खरीदने के लिए रिक्शे का इस्तेमाल कर रही हैं। सरकारी बाबू छुट्टियों और इतवार के दिन भी नहा धो कर सुबह से अपनी कुर्सी पर विराजमान हैं। पिछले तीन दिन  से रोगाणुओं कीटाणुओं की शामत आ गयी है। लगातार रात दिन एक कर के उनके आशियाने उजाड़े जा रहे हैं। सुवरों को उनके  क्रीड़ास्थल से बेदखल किया जा रहा है।

पिछले पाँच सालों से अंतर्ध्यान अवस्था मे कार्य करने वाले सफाई कर्मचारी और मोटी ताज़ी जमादारिनें मुंह पर कपड़ा बांधे झुंड के झुंड  इधर से उधर घूमते नज़र आने लगे हैं। वो कहते हैं न … घूरे के भी दिन लौटते हैं… पुराने और उपेक्षित पड़े सड़े गले कूड़ेदानों को रंग पोत कर ताज़ा दम कर दिया गया है । जिस गली मे पिछले चार साल से कीचड़ के ग्लेशियर पसरे रहते  थे आज उनपर टाइल्स अपनी चमक बिखेर रही है। रातों रात सड़कों पर टनों चूना ऐसे बिखेरा गया है कि मच्छरों का जीना दूभर हो गया है। सारे डिवाइडर रंगे पुते नज़र आ रहे हैं। चौराहों पर स्वागत पोस्टर पर मुस्कुराते हुए तमाम छुट्भइए नेताओं की चेहरे नज़र आने लगे हैं।

कल ही आटो वाला पुलिस वाले को बोल रहा था … अगली चक्कर मे दूंगा …और मुस्कुराता हुआ निकल लिया … इस पर पुलिस वाला बोला … बेटा तीन चक्कर यही बोल चुके हो… परसों हम भी देखेंगे बेटा…

अधिकारियों के फोन उनके कानों से परमानेंट चिपक गए लगते हैं। कुछ एक तो दस्त की दवा लेते भी नज़र आए… रात मे जनरेटर की रोशनी मे लेबर और उनके बच्चे रंगाई पुताई करने से (मुंह मांगी कीमत पर) हलाकान हुए जा रहे हैं।

जनता मुस्कुरा कर पूरे मज़े ले रही है…. कोई कह रहा था… बहन जी से फटती है इनकी 🙂

 

P180211_11.29_[01]P180211_11.27P190211_11.22P190211_11.14_[01]

P190211_11.19P190211_11.16P190211_11.18P180211_11.31

अरे भाई नेता होना कोई बच्चों का खेल है…??

Posted on Updated on

netaji02

आखिर कोर्ट की (खमखा) दखलंदाज़ी से पूर्व संचार मंत्री घोटाले के “राजा”  को(सानुरोध, सविनय) गिरफ्तार कर लिया गया है। खबर है कि इस के लिए करुणानिधि की खुशामद कुछ यूँ करनी पड़ी है यूपीए सरकार को…

तुम्हारा साथ  हमें यूँ बड़ा सुहाना लगे….

मै एक मंत्री पकड़ लूँ अगर बुरा न लगे

जहाँ सीबीआई राजा और उनके सचिव के खिलाफ पर्याप्त सुबूत इकट्ठा करने का दम भर रही है वहीं डीएमके राजा को बचाने मे लगी हुई है।  जब तक दोष साबित(जो होगा नहीं) नहीं हो जाता,… मामला कोर्ट मे रहता है…हमारी बेशर्मी खतम होने वाली नहीं हैं।

मंहगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चारों ओर से दबाव झेल रही यूपीए सरकार की स्थिति कितनी दयनीय है…क्या ज़माना आ गया है… जनता है कि  अपनी चुनी हुई सरकार को खाने कमाने भी नहीं देती… भूखे रह कर कैसे और कब तक जनता की सेवा करेगी सरकार… लोग पीछे ही पड़ गए हैं, कभी  मंहगाई को ले कर… कभी भ्रष्टाचार को लेकर…. जैसे किसी को और कोई काम ही नहीं है…

प्याज मंहगी हुई तो उसका कारण शरद पवार(पावर?) जी ने विचारोपरांत जनता को अवगत कारवाया कि मौसम के कारण  फसल खराब हो गयी थी इस लिए प्याज अस्सी रुपये पहुँच गयी… अब कृषि मंत्री का काम फसल पर नज़र रखना थोड़े ही है। लोगों ने कयास लगाए कि छह महीने तक प्याज के दाम नीचे नहीं आने वाले( अगली फसल तक)।  लेकिन ज़्यादा हो हल्ला करने पर आनन फानन मे कृषि मंत्रालय द्वारा मौसम ठीक करवाया गया, फसल पैदा कारवाई गयी  तब कहीं जा कर कीमतें 25 रुपये तक आ गयी हैं…क्या क्या पापड़ बेलने पड़ते हैं नेता हो कर… अरे भाई नेता होना कोई  बच्चों का खेल है ??

कामन वेल्थ मे चालीस करोड़ का गुब्बारा पूरी दुनिया ने खूब मज़े ले ले कर देखा…  काम निकल गया तो सभी लगे आँख दिखाने सब के सब… ये कोई नहीं देखता कि कितने प्रयासों के बाद जा कर  भारत का नाम (अंदरूनी) खेलों के लिए पूरी दुनिया मे पहुँचा और (बद) नाम भी हुआ। वरना तो इतना नाम चाइना ओलंपिक का भी नहीं हुआ।

3757033538_fff4461cd4किसी को क्या मालूम कि मनचाही कंपनियों को ठेके देने मे कितने जुगाड़ लगाने पड़ते हैं। फर्जी कंपनियाँ बनवाना,  टेंडरों को पूल करवाना,  अंतिम समय पर टेंडर की तिथि बढ़ा देना, नेगोशिएशन के नाम पर पत्ती फिट करना, सात आठ गुने दामों पर टेण्डर पास करवाना, अपने खास लोगों का ध्यान रखना, और  कुर्सी पर भी  बने रहना  कोई  मज़ाक है? क्या इतना भी पता नहीं कि दरबार कोई भी हो “होत न आज्ञा बिन पैसा रे” का मंत्र हर जगह चलता है… । कोई यह क्यों नहीं समझता कि  मंत्री जी तो सबके हैं… उनके भी तो बच्चे हैं जिन्होने इत्ती बड़ी बड़ी कंपनियाँ खड़ी की हैं… चुनाव मे चंदे दिये हैं… होटलों मे नेता जी की “उत्तम व्यवस्थाओं” पर खर्चे किए हैं…  आम जनता का क्या है…आम जनता एक वोट के बदले पूरे देश को अपनी बपौती समझती है… ये तो वैसे ही हुआ जैसे मंदिर मे सवा रूपये का प्रसाद चढ़ा कर लखपति होने का वरदान मांगना। मुंह खोला और बोल दिया कि नेता और सरकार सब चोर है। अरे भाई नेता होना कोई बच्चों का खेल है??

आदर्श सोसाइटी को आज लोग घोटाले का नाम दे कर हो हल्ला कर रहे हैं। कोई पूछे उनसे विकास और समाजवाद का ऐसा उदाहरण मिलगा कहीं?  जरा सोचिए मुख्य मन्त्री से ले कर सेना के ब्रिगेडियर सहित तमाम तबकों और पदों के लोग एक साथ रहेंगे… भाईचारे की और क्या मिसाल होगी। पर्यावरण मंत्रालय की तंद्रा भी टूट गयी है आज। इतनी ऊंची इमारत बन गयी और किसी को पता भी नहीं चला… पता चल जाता तो ? तो क्या मुंबई का विकास रुक जाता… एक खूबसूरत इमारत बनने से रह जाती… अगर किसी की ज़रा सी लापरवाही से भारत का विकास हो रहा है तो “दाग अच्छे हैं न”?

आज किसी न्यूज़ चैनल पर भाजपा और कांग्रेस के दो भद्रजनों मे गरमागरम वार्ता चल रही थी… कांग्रेस का कहना था कि आपके यहाँ तो टीवी पर लाइव पैसा लेते हुए  पूरी जनता ने देखा था… लेकिन FIR नहीं दर्ज़ की गयी… हमने तो अपने कैबिनेट  मन्त्री को बंद कर के दिखाया है। इस पर बीजेपी का बयान आया कि हाँ वो तो हुआ था लेकिन एक लाख छिहत्तर हज़ार करोड़ रुपये जितना बड़ा घोटाला नहीं था वो…और जनता की नाराजगी भी तो हमने सही है? (यानी अब किलियर)  इस पर कांग्रेस वाले महानुभाव कहें लगे कि आप झूठ बोल रहे हैं… कपिल सिब्बल  ने कह दिया है कि मामला इतने रूपये का नहीं है। मतलब दोनों मामले को मानते हैं लेकिन घोटाले कितने के हुए इस  आँकड़े  को ले कर दोनों मे मतभेद है….

हमारे देश की जनता  रात गयी बात गयी की विचारधारा मानती  है। पहले किसी भी घोटाले के सामने आते ही हो हल्ला शुरू कर देती है… मीडिया भी चीखने चिल्लाने लगेगी… गिरफ्तारी होने तक सब कुछ सुर्खियों मे रहता है लेकिन उसके बाद ?… जमानत होते, केस चलते और अगले चुनाव आते आते सब कुछ भूल जाती है… आज तक इतने घोटाले हुए लेकिन किसी मन्त्री को सज़ा के तौर पर दो चार साल जेल मे सड़ते देखा है कभी? नही न? इसी लिए कि वो नेता हैं… और नेता होना कोई बच्चों का खेल नहीं  है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ जनयुद्ध

Posted on Updated on

P300111_12.56_[01]2

लेकिन होता भूडोल, बवंडर उठते हैं,
जनता जब कोपाकुल हो भृकुटि चढाती है;
दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो,
सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।

P300111_13.25_[04]पूरे भारत मे लगभग साठ शहर… कोई राजनीतिक पार्टी के नेतृत्व के बिना…. आम आदमी के आह्वान पर…. आम आदमी का भ्रष्टाचार के खिलाफ जनयुद्ध….

30-01-2011, नयी दिल्ली के रामलीला मैदान मे शायद पहली बार बिना किसी राजनैतिक पार्टी के सहयोग अथवा आह्वान के बिना भ्रष्टाचार के विरुद्ध किरण बेदी,जस्टिस संतोष हेगड़े,प्रशांत भूषन,जे.एम .लिंगदोह,स्वामी अग्निवेश,अन्ना हजारे,आर्चविशप विन्सेंट एम. कोंसेसाओ तथा अरविन्द केजरीवाल सहित  तमाम  संगठनो, प्रबुद्धजनों, और आम इन्सानों को एक मंच पर अपार जनसमुदाय के रूप मे देख कर लगा कि आम नागरिकों का धैर्य टूट गया है…

जेएनयू और अन्य कालेजों की छात्राएं आज करोड़ो और अरबों के घोटाले सनसनीखेज खबर मात्र बन कर रह गए हैं… रोज़ नया घोटाला, रोज़ नई जांच… चारों तरफ भ्रष्टाचार व्याप्त है। आज जहां हर सरकारी दफ्तर मे हर रोज़ हर क्षण जनता के सम्मान का बलात्कार किया जाता है, रिश्वत मांगी जाती है, रिश्वत न देने पर गाली गलौच की जाती है, वहीं इन्हीं विभागों मे बैठे अधिकारियों, मंत्रियों और दलालों की साँठ गाँठ माफियाओं की जमातें फल फूल P300111_12.57_[01]रही हैं।  आज हम भ्रष्टाचार की शिकायत उसी विभाग के उच्च अधिकारियों से करते हैं जो उसी भ्रष्टाचार मे लिप्त हैं।  क्या हम यह मान लें कि आज सिस्टम इतना खोखला हो गया है कि उसे सुधारा जाना संभव नहीं है और चुपचाप जो हो रहा है उसे सहते रहें, या फिर यह सोच लें कि आज समय आ गया है जब आम इंसान आम नागरिक को अपनी लड़ाई खुद ही लड़नी पड़ेगी।

इससे अधिक माफिया राज का ज्वलंत उदाहरण क्या मिलेगा कि भ्रष्टाचार का विरोध करने पर अधिकारी  सोनवणे को ज़िंदा जला दिया जाता है…  बाद मे छापे भी पड़ते हैं और सैकड़ों तेल माफिया से जुड़े लोग पकड़े भी जाते हैं लेकिन उससे पहले सिस्टम के रखवाले कहाँ रहते हैं और क्या करते रहते हैं…कर्नाटक मे वेल्लारी मे खनन माफिया रेड्डी बंधुओ से  से वहाँ का शासन और प्रशासन घबराता है… यह एक प्रश्नचिन्ह है व्यवस्था पर। कार्यालयों मे काम करने वाले सामान्य कर्मचारी और पुलिस के सिपाही भ्रष्टाचार के नाम पर सबसे अधिक बदनाम किए जाते हैं, जब कि उच्च स्तरों पर भ्रष्टाचार का नंगा नाच होता है उसे जाँचों की आड़ मे छुपा दिया जाता है… कितने ऐसे घोटाले हैं पिछले दस सालों मे जिनमें जांच रिपोर्ट के आधार पर भ्रष्टाचारी को सजा दी गयी हो… राष्ट्र को हुए नुकसान की भरपाई की गयी हो… शायद एक भी उदाहरण खोजने से न मिले… चोरी की बात गले उतरती है लेकिन खुलेआम डकैती जैसी स्थिति आज की व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। यह स्थिति कमोबेश पूरे देश की है… किसी सरकार अथवा क्षेत्र मात्र की ही नहीं।

उच्च पदों पर बैठे हुए अफसर और राजनेताओं से माफियाओं की साँठ गाँठ दिन ब दिन उजागर होती रही है… अरबों खरबों की की काली कमाई विदेशी बैंकों मे भरी पड़ी है… जहां तहाँ विकास के नाम पर बहुमूल्य ज़मीनों को किसानों से छीन कर औने-पौने दामों पर कारपोरेट घरानों को दिये जा रहे हैं…निजीकरण के नाम पर महत्वपूर्ण विभागों को धनपशुओं का गुलाम बनाया जा रहा है…. घोटालों की तो कोई सीमा नहीं रह गयी है…एक से बड़े एक घोटाले करने की प्रतियोगिता हो रही हो जैसे… आखिर कब तक चलेगा ये सब….

नेतृत्व जब अपनी क्षमता खो दे तब जनता को इसकी बागडोर अपने हाथों मे लेनी ही होती है… हाँगकाँग मे 1970 के  दशक तक आज के भ्रष्टाचार के भारत से भी बदतर अवस्था में था जिससे आजिज़  आकर वहां के लोग सड़कों पर उतर आये और वहां (ICAC ) Independent Commission Against Corruption नामक स्वतंत्र संस्था का गठन हुआ और  एक साथ 180 में से 119 पुलिस अधिकारियों को नौकरी से निकाल दिया गया जिससे पूरी नौकरशाही में सन्देश गया की अब भ्रष्टाचार नहीं चलने वाला | नतीजा ये है की हांगकांग आज लगभग भ्रष्टाचार मुक्त देश है और ICAC पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बन चुका है….| आज मिस्र आदि देशों मे भी जनता शासन के खिलाफ एक जुट हो कर सड़कों पर है…

हद है ….हद है !!!

भ्रष्टाचार से निपटने के लिए सरकार द्वारा लाये जा रहे लोकपाल बिल भी पहले की जांच एजेंसियों जैसी लचर और सरकारी दखल से प्रभावित व्यवस्था  हैं जिसके आने से वर्तमान स्थिति मे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। आज ज़रूरी है एक व्यावहारिक, पारदर्शी और प्रभावशाली कानून की जो इन धनपशुओं और भ्रष्टाचारियों मे नकेल डाल  सके।

व्यवस्था से इतर एक व्यावहारिक और असरदार लोकपाल बिल की प्रस्तावना तैयार की गयी है  जिसके अंतर्गत केंद्र मे लोकपाल और राज्य मे लोकायुक्त सरकार के अधीन नहीं होंगे….. वर्तमान सरकार द्वारा लाई जा रही व्यवस्था और व्यावहारिक जन लोकपाल की व्यवस्थाओं के बीच का अंतर ऐसे समझा जा सकता है –

 

वर्तमान व्यवस्था    प्रस्तावित व्यवस्था
तमाम सबूतों के बाद भी कोई नेता या अफसर जेल नहीं जाता क्योकि एंटी-करप्शन ब्रांच (एसीबी) और सीबीआई सीधे सरकारों के अधीन आती हैं। किसी मामले मे जांच या मुकदमा शुरू करने से पहले इन्हें सरकार मे बैठे उन्हीं लोगों से इजाज़त लेनी पड़ती है जिनके खिलाफ जांच होती है

प्रस्तावित कानून के बाद केंद्र मे लोकपाल और राज्य मे लोकायुक्त सरकार के अधीन नहीं होंगे। ACB और सीबीआई का इनमे विलय कर दिया जाएगा। नेताओं या अफसरों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच और मुकदमों के लिए सरकार की इजाज़्त की आवश्यकता नहीं होगी। जांच अधिकतम एक साल मे पूरी कर ली जाएगी। यानी भ्रष्ट आदमी को जेल जाने मे ज़्यादा से ज़्यादा दो साल लगेंगे

तमाम सबूतों के बावजूद भ्रष्ट अधिकारी सरकारी नौकरी पर बने रहते हैं। उन्हें नौकरी से हटाने का काम केंद्रीय सतर्कता आयोग का है जो केवल केंद्र सरकार को सलाह दे सकती है। किसी भ्रष्ट आला अफसर को नौकरी से निकालने की उसकी सलाह कभी नहीं मनी जाती

प्रस्तावित लोकपाल और लोकायुक्तों मे ताकत होगी की वे भ्रष्ट लोगों को उनके पदों से हटा सकें केंद्रीय सतर्कता आयोग और राज्यों के विजिलेन्स विभागों का इनमे विलय कर दिया जाएगा।

आज भ्रष्ट जजों के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया जाता। क्योकि एक भ्रष्ट जज के खिलाफ केस दर्ज़ करने के लिए सीबीआई को प्रधान न्यायाधीश की इजाजत लेनी पड़ती है।

लोकपाल और लोकायुक्तों को किसी जज के खिलाफ जांच करने व मुकदमा चलाने के लिए किसी की इजाजत लेने की आवश्यकता नहीं होगी

आम आदमी कहाँ जाये? अगर आम आदमी भ्रष्टाचार उजागर करता है तो उसकी शिकायत कोई नहीं सुनता। उसे प्रताड़ित किया जाता है।

लोकपाल और लोकायुक्त किसी की शिकायत को खुली सुनवाई किए बिना खारिज नहीं कर सकेंगे आयोग भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेंगे
सीबीआई और विजिलेन्स विभागों के कामकाज गोपनीय रखे जाते हैं इसी कारण इनके अंदर भ्रष्टाचार व्याप्त है लोकपाल और लोलायुक्तों का कामकाज पूरी तरह पारदर्शी होगा किसी भी मामले की जांच के बाद सारे रिकार्ड जनता को उपलब्ध कराने होंगे। किसी भी कर्मचारी के खिलाफ शिकायत आने पर जांच और जुर्माना लगाने का काम अधिकतम दो माह मे पूरा करना होगा
कमजोर भ्रष्ट और राजनीति से प्रेरित लोग एंटीकरप्शन विभागों के मुखिया बनते हैं लोकपाल और लोकायुक्तों की नियुक्ति मे नेताओं की कोई भूमिका नहीं होगी। इनकी नियुक्ति पारदर्शी तरीके और जनता की भागीदारी से होगी।
सरकारी दफ्तरों मे लोगों को बेइज्जती झेलनी पड़ती है। उनसे रिश्वत मांगी जाती है। लोग ज़्यादा से ज़्यादा उच्च अधिकारियों से शिकायत कर सकते हैं लेकिन वे भी कुछ नहीं करते क्योकि उन्हें भी इसका हिस्सा मिलता है लोकपाल और लोकायुक्त किसी व्यक्ति का तय समय सीमा मे किसी भी विभाग मे कार्य न होने पर दोषी अधिकारियों पर 250/- प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगा सकेंगे जो शिकायतकरता को मुवाबजे के रूप मे मिलेंगे।
कानूनन भ्रष्ट व्यक्ति के पकड़े जाने पर भी उससे रिश्वतख़ोरी से कमाया पैसा वापस लेने का कोई प्राविधान नहीं है। भ्रष्टाचार से सरकार को हुई हानि का आंकलन कर दोषियों से वसूला जाएगा
भ्रष्टाचार के मामले मे 6 माह से लेकर 7 साल की जेल का प्राविधान है कम से कम पाँच साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा होनी चाहिए।

 

क्या आप तैयार हैं भ्रष्टाचार के विरुद्ध इस जनयुद्ध मे शामिल होने के लिए … या सिर्फ सरकारों और व्यवस्थाओं को कोसने भर से काम चल जाने वाला है…. ???  अगर तैयार हैं तो इस विषय पर लिखें… बोलें… और ठान लें कि बस…. बहुत हो गया ….

enough is enough !!!

संपर्क करें… भ्रष्टाचार के खिलाफ जनयुद्ध…

ए-119 कौशांबी, गाजियाबाद- 201010, उ0 प्र0

फोन- 9717460029

email- indiaagainstcorruption.2010@gmail.com    

www.indiaagainstcorruption.org 

P300111_13.16P300111_13.02

आज़ाद पुलिस संघर्ष गाथा-४ (मुंबई में पुलिस का चालान काटेगी आज़ाद पुलिस)

Posted on

आशा है मेरी पिछली पोस्टों आज़ाद पुलिस संघर्ष गाथा-१, आज़ाद पुलिस संघर्ष गाथा- २ और आज़ाद पुलिस (संघर्ष गाथा –३) के माध्यम से आज़ाद पुलिस से आप पर्याप्त परिचित होंगे …नहीं हैं तो कृपया उक्त पोस्टें पढ़ें…. इन पोस्टों को पढ़ कर मीडिया और ब्लॉगजगत से जुड़े हुए बहुत से लोगों द्वारा प्रतिक्रियाएं मिली थीं… कुछ संस्थाओं और लोगों ने स्वयं ब्रह्मपाल से मिल कर उनके संघर्ष और जज्बे को समझा-जाना … कुछ ने आर्थिक सहायता भी दी… लेकिन इस सहायता राशि को भी अपने व्यक्तिगत खर्च के लिए न रख कर समाज सेवा में अर्पित कर दिए गए….  तीन दिन पहले कहीं रास्ते में फिर से ब्रह्मपाल से मेरा मिलना हो गया… बातें होती रहीं… आज़ाद पुलिस के अगले मिशन के बारे में पूछने पर पता चला कि निकट भविष्य में आजाद पुलिस द्वारा एक गुटखे पर तिरंगे झंडे की तस्वीर और नाम का बेजा इस्तेमाल करने से तिरंगे का अपमान होता है. इस कंपनी के विरोध में जैसा कि ब्रह्मपाल ने अनेक बार प्रशासन को आगाह दिया था प्रशासन तक बात बखूबी पहुँच भी  चुकी थी लेकिन ब्रह्मपाल की आवाज़ नक्कारखाने में तूती की आवाज़ ही साबित हुई और उस कंपनी के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गयी… इस कंपनी के विरोध में शीघ्र धरने पर बैठने हेतु उच्च प्रशासनिक अधिकारियों को सूचना भेजी जा रही है… 

Top.bmpइसके अतिरिक्ति जिस पुलिस और प्रशासन ने कभी ब्रह्मपाल की सुध नहीं ली… उसकी आवाज़ बंद करने के लिए  सिरफिरा करार देते हुए बेवजह बार बार जेल में ठूंसती रही उसी पुलिस की कार्यप्रणाली के सुधार के सपने देखने वाला ब्रह्मप्रकाश(आज़ाद पुलिस) कुछ ही महीने में मुंबई पुलिस की खबर लेने मुंबई जाने वाला है… बताया कि २१ मई २०११   को अपने रिक्शे सहित मुंबई जाकर मुंबई पुलिस में व्याप्त भ्रष्टाचार और मौलिक कमियों को उजागर करने का प्रयास करेगा … इसके लिए आज़ाद पुलिस का अनोखा तरीका है पुलिस का चालान करना… ये जुनूनी वन मैन आर्मी अपनी स्वयं की चालान बुक रखता है… जहाँ कहीं पुलिस की कमियाँ देखता है… तुरंत चालान काटता है … चालान पर उस पुलिस वाले के हस्ताक्षर भी करवाता है और चालान एस एस पी अथवा उनसे उच्चतर अधिकारी को बकायदा कार्यवाही करने के अनुरोध के साथ प्रस्तुत किया जाता है… इस प्रयास में कई बार पुलिस का कोप-भाजन बनने, मार खाने, हवालात जाने के बावजूद उसके जज्बे में कोई कमी नहीं आती और अपना संघर्ष जारी रखता है,  मुंबई जाने के सम्बन्ध में   दिल्ली पंजाब केसरी समाचार पत्र ने दिनांक ०१-१२-१० के अंक में खबर को प्रमुखता दी है…

यहाँ अवगत कराना चाहूँगा कि ब्रह्मपाल के अनुसार किसी सहायता अथवा अनुदान राशि का एक पैसा अपनी जीविका के लिए प्रयोग नहीं करता…  आज़ाद पुलिस को भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को उजागर करने के लिए उसे  एक कैमरे की आवश्यकता थी … जय कुमार झा जी की सलाह पर इस तरह के ईमानदार और आम जनता के लिए होने वाले संघर्ष पर छोटी-छोटी सहयोग राशि के लिए hprd   के लिए अपने वेतन से प्रतिमाह ५० रूपए का एक छोटा सा फंड बनाना शुरू कर दिया था… आशा है इस प्रयास के लिए मेरे फंड से शीघ्र ही एक कैमरा लिया जा सकेगा…

आज़ाद पुलिस की मुहिम और संघर्ष के प्रति ब्लॉग जगत में भी कई मित्रों का सहयोग लगातार प्राप्त होता रहा है…हाल ही में ब्लॉग जगत के कुछ सक्षम मित्रों की संवेदनाएं ब्रह्मपाल के प्रति शिद्दत से दिखी … इस बात से आज़ाद पुलिस की नगण्य सी मुहिम परवान चढेगी ऐसा विश्वास है… इस पोस्ट के माध्यम से आप सब से अपील है कि आज़ाद पुलिस की मुंबई मुहिम पर यथा संभव यथा योग्य सहयोग करें…

आज़ाद पुलिस की आगे की गतिविधियों के लिए नया ब्लॉग बना दिया गया है जिससे लोग आसानी से आज़ाद पुलिस और उसकी मुहिम से सीधे जुड़ सकें… ब्लॉग पर जाने के लिए क्लिक करें <आज़ाद पुलिस> पर

आपका पद्म सिंह ९७१६९७३२६२

विश्व विकलांगता दिवस …

Posted on

P031210_11.25_[01]P031210_10.45_[01]

कल 3 नवंबर को सर्व शिक्षा अभियान के तत्वाधान में समेकित शिक्षा अभियान के अंतर्गत मरियम नगर गाज़ियाबाद के आनंद ट्रेनिंग सेंटर में  विश्व विकलांगता दिवस का भव्य आयोजन किया गया. मानसिक और शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के लिए सार्थक प्रयासों के अंतर्गत किये गए इस समारोह में  सुबह नौ बजे से ही असामान्य बच्चों के लिए कार्य कर रही संस्थाओं तथा स्कूलों के बच्चे सेंटर के ग्राउंड में पूरी तन्मयता और अनुशासन के साथ डटे थे….

P031210_11.27_[01]P031210_11.21_[02]

 

 

 

 

 

मुख्य अतिथि की अगवानी के लिए सेंटर के मुख्य द्वार पर अनुशासन से लाइन लगा कर और वाद्य यंत्र थामे बच्चों ने मुख्य अतिथि अपर जिलाधिकारी श्री रामकृष्ण जी तथा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी श्री राजेश कुमार श्रीवास  के आगमन पर तिलक लगाकर और पुष्प गुच्छ प्रदान कर के उनका स्वागत किया…

मुख्य अतिथि द्वारा दीप प्रज्वलन और शान्ति P031210_12.45के प्रतीक कबूतर उड़ाने के साथ कार्यक्रम के विधिवत प्रारम्भ के बाद विभिन्न स्कूलों से आये असामान्य बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये .. उद्घोषक एवं मंच संचालक ने बताया कि आनंद ट्रेनिंग सेंटर गाज़ियाबाद जो मानसिक रूप से अक्षम बच्चों के लिए है के साथ साथ भागीरथ सेवा संस्थान गाज़ियाबाद, , आशा विद्यालय इंग्राहम इन्स्टीट्यूट गाज़ियाबाद जो दृष्टि एवं श्रवण अक्षम बच्चों के लिए कार्य करते हैं, P031210_11.25समग्र मानव कल्याण संस्थान गाज़ियाबाद, आर्थर स्पेशल स्कूल जो मानसिक बच्चों का स्कूल है  तथा साईं स्पेशल स्कूल एवं अन्य स्कूलों से कुल 497 बच्चों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लिया. गाज़ियाबाद जनपद में 2010-11 के सर्वे के अनुसार कुल 4887 बच्चे असामान्य चिन्हित हुए जिनमे  2902 बालक तथा 1985 बालिकाएं चिन्हित किये गए. जनपद के सभी विकास खण्डों में बच्चों को स्कूलों और स्वास्थ्य विभाग द्वारा विभिन्न शिविरों के आयोजन द्वारा अक्षम बच्चों के लिए कार्यक्रम चलाए जाते हैं.. जिनमे तत्काल अक्षमता प्रमाणपत्र के साथ साथ कृत्रिम पैरों आदि से बच्चों को लाभान्वित किया जाता है. 

P031210_11.41_[01]P031210_12.25_[01]

उपरोक्त विभिन्न स्कूलों और संस्थानों द्वारा अथक प्रयासों से तैयार विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभी बच्चों और दर्शकों को धूप और गर्मी में बांधे रखा. बच्चों के उत्साह, अनुशासन और समर्पण ने उनकी मानसिक और शारीरिक अक्षमता को निष्प्रभावी कर दिया. सोलों गीत, समूह नृत्य के साथ साथ फैशन शो ने कार्यक्रम को रोचक बनाए रखा .

 

P031210_10.44_[02]P031210_10.44_[01]

मुख्य अतिथि के विदा होते समय उन्होंने बच्चों द्वारा लगाए गए स्वनिर्मित उपयोगी सामग्रियों के स्टालों का भी अवलोकन किया जहाँ मोमबत्तियों, सॉफ्टटॉयज़ और अन्य उपयोगी सामग्रियों की सुंदरता देखने लायक रही, जहाँ कुछ स्टाल्स पर बच्चों ने अपनी सामग्री बनाने के तरीकों के बारे में मुख्य अतिथि को बताया वहीँ दृष्टि अक्षम बच्चों ने  ब्रेललिपि(दृष्टिअक्षम बच्चों के लिए) को पढ़ और टाइप कर के दिखाया.

P031210_12.15P031210_12.43

विभिन्न स्कूलों से आये बच्चों के लिए विभिन्न बौद्धिक एवं शारीरिक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया जिसमे चित्रकला, विभिन्न दौड़ें और संगीत प्रतियोगिताएं आयोजित की गयीं. विजेताओं के लिए पारितोषिक आदि का वृहद प्रबंध किया गया था.

जीवन और समाज की मुख्य धारा से संघर्ष करते इस तरह के बच्चों के लिए इन संस्थानों और स्कूलों द्वारा किये जा रहे प्रयास निश्चित रूप से प्रशंसा और उत्साहवर्धन के पात्र हैं. इस समय जहाँ सामान्य जन को जीविका के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है वहाँ मानसिक और शारीरिक रूप से अल्पसक्षम बच्चों को अपनी आजीविका के लिए तैयार करना और बाकी दुनिया के साथ कदम से कदम मिला कर चलना अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है. इस कार्य को साकार  करने वाले स्वयंसेवी संस्थानों और स्कूलों का कार्य सराहनीय है.

गाज़ियाबाद के नंदग्राम में मरियम नगर में स्थित आनंद ट्रेनिंग सेंटर मानसिक रूप से पिछड़े बच्चों का प्रशिक्षण एवं पुनर्वास के लिए अग्रणी स्कूलों में गिना जाता है. यहाँ के विशेष रूप से प्रशिक्षित अध्यापिकाओं और डाक्टरों की टीम ने मानसिक रूप से पिछड़े बच्चों के जीवन को सार्थक करने के लिए अहर्निश प्रयासरत है. यहाँ ऐसे बच्चों के लिए हास्टल और बच्चों के लाने ले जाने के लिए गाड़ियों सहित सभी ज़रूरी संसाधन की उपलब्धता और संस्था की प्रतिबद्धता इसे अपने आप में विशेष बनाता है.

 

P221209_11.26P031210_12.16

हमें इस तरह के हर प्रयासों को अपना समर्थन और प्रोत्साहन देना चाहिए ताकि इन बच्चों का आने वाला कल स्वर्णिम हो और भविष्य पशस्त हो….

…….आपका पद्म

०४-नवम्बर २०१० गाज़ियाबाद