मेरे बारे में

पद्म सिंह  Padm Singh

Phone- 9716973262

orkut- THAKUR PADMSINGH

email-                  ppsingh8@gmail.com

मेरे ब्लॉग –

पद्मावलि –             https://padmsingh.wordpress.com

ढिबरी –                http://padmsingh.blogspot.com

फेसबुक प्रोफाइल-   http://www.facebook.com/#!/ppsingh8


11 thoughts on “मेरे बारे में

    Anita said:
    जनवरी 2, 2010 को 3:14 अपराह्न
    padmsingh responded:
    जनवरी 5, 2010 को 3:51 पूर्वाह्न

    समय के अमिट शिलालेख पर अपने प्रारब्ध को पढता हूँ… जीवन नित्य नए अनुभवों की बिसात पर खेला गया खेल ही तो है . अनुभूति और अभिव्यक्ति का खेल जारी है………………………………………………

    Dr maharaj singh parihar said:
    जून 24, 2010 को 4:29 अपराह्न

    bhai padm jee
    aapka blog padmavali dekha. bahut achchha laga. aapka lekhan pragatisheel lagta hai. photography men bhi aapki pakad jabardast hai.

    Dr. Maharaj Singh parihar
    9411404440
    http://www.vichar-bigul.blogspot.com

    पी के शर्मा said:
    जून 28, 2010 को 9:53 अपराह्न

    आपका लेख पढ़ा, अच्‍छा लगा। धार्मिक कुरीतियों पर कलम उठाते रहिए, शायद जनता को कुछ समझ आ जाए।

    Mohammed said:
    सितम्बर 8, 2010 को 6:04 अपराह्न

    hi………i’m a 15 year old blogger…..currently taking part in the “My Demand” contest……
    please read my post n support me by voting if u find it interesting….

    My post link: http://www.indiblogger.in/indipost.php?post=30629

    Greetings,
    Mohammed!

    Sourav Roy said:
    दिसम्बर 4, 2010 को 11:32 अपराह्न

    जान कर सच में ख़ुशी हुई कि आप हिंदी भाषा के उद्धार के लिए तत्पर हैं | आप को मेरी ढेरों शुभकामनाएं | मैं ख़ुद भी थोड़ी बहुत कविताएँ लिख लेता हूँ | हाल ही में अपनी किताब भी प्रकाशित की | आप मेरी कविताएँ यहाँ पर पढ़ सकते हैं- http://souravroy.com/poems/

    आपने बहुत अच्छा लिखा है said:
    मार्च 12, 2011 को 11:08 पूर्वाह्न

    wwwrajupanchblogspot.com

    आपने बहुत अच्छा लिखा है said:
    मार्च 12, 2011 को 11:22 पूर्वाह्न

    आपने बहुत अच्छा लिखा है

    krishna tiwari said:
    मार्च 24, 2012 को 6:19 अपराह्न

    […] है वाली संजू तनेजा, पद्मावलि वाले पद्म सिंह, जनोक्ति वाले जयराम विप्लव, सार्थक […]

    Subhash Sharma said:
    फ़रवरी 28, 2017 को 10:32 अपराह्न

    स्वयंसेवक होकर भी इतनी शायरी!
    भौत गल्त बात है ये 😉

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