चंद तुरंतियाँ -पद्म सिंह Padm Singh

प्यार करना टूट कर … फिर टूट जाना

प्यार का अञ्जाम ही ये है पुराना

तैरने की कोशिशें बेकार हैं सब …

पार पाना है तो गहरे डूब जाना

 

***************************************

पतंगों ने ज्योत्सना पर होम होने के लिए

पत्थरों ने दिल लगाया मोम होने के लिए

प्रेम का फलसफा थोड़ा इस तरह भी समझिये

बीज मिट्टी में मिला तो व्योम होने के लिए

****************************************

टूट कर चाहने वाले भी अक्सर टूट जाते हैं

बहुत लंबे सफर मे कुछ मुसाफ़िर छूट जाते हैं

ये रिश्ते पकते पकते पकते हैं चट्टान बनते हैं

मगर कच्चे घड़े धक्का लगे तो टूट जाते हैं

****************************************

सनम तरसा हुआ आए तो कोई बात होती है

के बारिश रेत पर आए तो कोई बात होती है

कोई प्यासा ही समझेगा के पानी की तड़प क्या है

बिछोहे पर मिलन आए तो कोई बात होती है

******************************************

जिसमे आँसू का नमक न हो वो हँसी कैसी

वक्त पर काम न आए तो दोस्ती कैसी

एक ठोकर मे चटख जाए वो रिश्ता कैसा

होश जिसमे बने रहें वो मयकशी कैसी

****************************************

कब तलक भेड़ें बचेंगी भेड़ियों के देश मे

बाज़ मंडराने लगे हैं मुर्गियों के वेश मे

कौन बाँधे घण्टियाँ अब बिल्लियों को बोलिए

हर तरफ गद्दार फैले पड़े हैं परिवेश मे

***************************************

अँधेरों ने चाल खेली छंट गयी हैं आंधियाँ

क्या हुआ फिर से दलों मे बंट गयी हैं आंधियाँ

कुटिल अट्टाहास करता आज मरघट का धुआँ

दिग्भ्रमित हो टुकड़ियों मे कट गयी हैं आंधियाँ

*******************************************

चुक गया है आँख का पानी कि पत्थर हो गया

हृदय का चंचल समन्दर क्यों मरुस्थल हो गया

आन भूली, धर्म भूला, साध्य केवल धन रहा

विश्व गुरु भारत कुमारों तुम्हें ये क्या हो गया

******************************************

आईना ज़िंदगी को दिखाने की देर है

अपनी खुदी पहचान मे आने की देर है

सोए पड़े समंदरों मे आग बहुत है

चिंगारियों को राह दिखाने की देर है

***************************************

5 टिप्पणियाँ (+add yours?)

  1. arvind mishra
    नवम्बर 07, 2013 @ 05:14:51

    वाह ! तुरंतियां मगर सुदूर तक असरवाली

    प्रतिक्रिया

  2. बी एस पाबला
    नवम्बर 07, 2013 @ 06:55:08

    सुंदर पंक्तियाँ

    प्रतिक्रिया

  3. dnaswa
    नवम्बर 07, 2013 @ 12:13:41

    हर मुक्तक, हर छंद लाजवाब … जुदा जुदा अंदाज़ लिए …

    प्रतिक्रिया

  4. amrita tanmay
    जून 05, 2014 @ 08:43:36

    क्या बात है .. तारीफ़ कम पड़ जाए..

    प्रतिक्रिया

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: