मगर यूं नहीं

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रिश्ते बहुत गहरे  होने होते हैं

उकता जाने के लिए

पढ़ता  हूँ  हर बार बस  उड़ती निगाह से …

कि कहीं बासी न पड़  जाए

प्यास की तासीर

सारी उम्र साथ रहने की उम्मीद से बड़ा तो  नहीं हो सकता

बिछोह  का दर्द…

बारहा नज़रें चुरा लूँगा…

मगर यूं नहीं कि …

 तुम्हें खो देने की हद पार करूँ

…. पद्म सिंह

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9 thoughts on “मगर यूं नहीं

    विनीत कुमार सिंह said:
    फ़रवरी 11, 2013 को 11:06 अपराह्न

    खोना यहाँ चाहता है कौन……..पाने की भागमभाग है
    नजरें यूं चुराना नहीं…………….गर हो कोई गलती तो बता देना

    प्रवीण पाण्डेय said:
    फ़रवरी 12, 2013 को 5:26 पूर्वाह्न

    गहरी बात..संबंधों की गहराई और आदर, दोनों ही मापे नहीं जा सकते..

    anu said:
    फ़रवरी 13, 2013 को 6:35 अपराह्न

    वाह…..
    बार बार पढी जाने लायक नज़्म…..
    बेहद नाज़ुक एहसास..
    अनु

    anita said:
    फ़रवरी 13, 2013 को 8:31 अपराह्न

    बहुत खूबसूरत एहसास…
    ~सादर!!!

    अनाम said:
    फ़रवरी 13, 2013 को 8:40 अपराह्न

    वाह क्या खूब लिखा है …बहुत खूब!

    आराध्या सिंह said:
    मई 24, 2013 को 6:48 अपराह्न

    रिश्तो की इतनी गहरी समझ …..भाई वाह

    ब्लॉग - चिठ्ठा said:
    अगस्त 16, 2013 को 12:54 अपराह्न

    आपके ब्लॉग को ब्लॉग एग्रीगेटर “ब्लॉग – चिठ्ठा” में शामिल किया गया है। सादर …. आभार।।

    कृपया “ब्लॉग – चिठ्ठा” के फेसबुक पेज को भी लाइक करें :- ब्लॉग – चिठ्ठा

    kuldeep thakur said:
    सितम्बर 26, 2013 को 6:32 अपराह्न

    सुंदर रचना…
    आप की ये रचना आने वाले शनीवार यानी 28 सितंबर 2013 को ब्लौग प्रसारण पर लिंक की जा रही है…आप भी इस प्रसारण में सादर आमंत्रित है… आप इस प्रसारण में शामिल अन्य रचनाओं पर भी अपनी दृष्टि डालें…इस संदर्भ में आप के सुझावों का स्वागत है…

    उजाले उनकी यादों के पर आना… इस ब्लौग पर आप हर रोज कालजयी रचनाएं पढेंगे… आप भी इस ब्लौग का अनुसरण करना।

    आप सब की कविताएं कविता मंच पर आमंत्रित है।
    हम आज भूल रहे हैं अपनी संस्कृति सभ्यता व अपना गौरवमयी इतिहास आप ही लिखिये हमारा अतीत के माध्यम से। ध्यान रहे रचना में किसी धर्म पर कटाक्ष नही होना चाहिये।
    इस के लिये आप को मात्रkuldeepsingpinku@gmail.com पर मिल भेजकर निमंत्रण लिंक प्राप्त करना है।

    मन का मंथन [मेरे विचारों का दर्पण]

    amrita tanmay said:
    जून 5, 2014 को 8:47 पूर्वाह्न

    बहुत बढ़िया..

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