भाई हद्द है !

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एक थैली मे रहें दिन  रात…. भाई हद्द है …
और उधर संसद मे जूता-लात… भाई हद्द है
 
आपके पैसे की रिश्वत आप को
सड़क बिजली घर की लालच आपको
चुनावी मौसम मे सेवक आपके
जीत कर पूंछें न अपने बाप को 
आप ही के धन से धन्नासेठ हैं
आप ही पर लगाते हैं घात … भाई हद्द है
 
शिकारी या भिखारी हर वेश मे
जहाँ मौका मिले धन्धा कूट लें
क्या गजब का हुनर पाया है कि ये
जिस तरफ नज़रें उठा दें लूट लें
दो धड़ों मे बाँट कर इन्सान को 
एक चिंगारी उछालें   ………फूट लें
अब लगी अपनी बुझाओ आप … भाई हद्द है
 
जाति भाषा क्षेत्र वर्गों मे फंसी
सोच अपनी जेल बन कर रह गई
वोट के आखेट पर हैं रहनुमा
राजनीति गुलेल बन कर रह गई 
लोकशाही आज के इस दौर मे
खानदानी खेल बन कर रह गई
जिन्हें उंगली पकड़ चलना सिखाया
वही बन बैठे हैं माई बाप… भाई हद्द है 
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9 thoughts on “भाई हद्द है !

    guddodadi said:
    फ़रवरी 11, 2013 को 9:45 पूर्वाह्न

    लोकशाही आज के इस दौर मे
    खानदानी खेल बन कर रह गई
    जिन्हें उंगली पकड़ चलना सिखाया
    (अब तो भ्रष्टाचार ही खानदान हैं )

    गिरीश बिल्लोरे मुकुल said:
    फ़रवरी 11, 2013 को 9:48 पूर्वाह्न

    पद्म भैया
    वाक़ई बेहतरीन

    Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said:
    फ़रवरी 11, 2013 को 10:02 पूर्वाह्न


    भाई वाकई हद्द है !

    शिकारी या भिखारी हर वेश मे
    जहाँ मौका मिले धन्धा कूट लें
    क्या गजब का हुनर पाया है कि ये
    जिस तरफ नज़रें उठा दें लूट लें
    दो धड़ों मे बाँट कर इन्सान को
    एक चिंगारी उछालें ………फूट लें
    अब लगी अपनी बुझाओ आप … भाई हद्द है

    वाऽह ! क्या बात है !
    ज़बरदस्त !

    साधुवाद एवं आभार …
    आपकी रचनाओं का क्या कहना …
    🙂
    हार्दिक मंगलकामनाएं !

    संजय @ मो सम कौन said:
    फ़रवरी 11, 2013 को 10:57 अपराह्न

    दो धड़ों मे बाँट कर इन्सान को
    एक चिंगारी उछालें ………फूट लें
    अब लगी अपनी बुझाओ आप … भाई हद्द है

    एकदम सच्चाई बयान की है पद्म सिंह जी।

    Pratik said:
    फ़रवरी 15, 2013 को 2:36 अपराह्न

    क्या खूब है!

    Manju Mishra said:
    जुलाई 2, 2013 को 2:24 अपराह्न

    bahut sundar evam sarthak …. sach bayan karti shashakt rachna …

    संतोष कुमार पवार said:
    अगस्त 25, 2013 को 9:53 पूर्वाह्न

    आदरणीय पद्म भैया
    आपके द्वारा रचित कविता “भाई हद्द है” लिए बहुत बहुत धन्यवाद। भ्रष्टाचार पर आपकी बेबाक व्यंग कविता समाज मे जागरूकता के लिए रामबाण है। आपका मार्गदर्शन मिलता रहे इसी कामना के साथ
    संतोष कुमार पवार
    एनटीपीसी विंध्यनगर, सिंगरौली

    amrita tanmay said:
    जून 5, 2014 को 8:48 पूर्वाह्न

    बहुत सुंदर..

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