चला गजोधर कौड़ा बारा(अवधी)

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कथरी कमरी फेल होइ गई
अब अइसे न होइ गुजारा
चला गजोधर कौड़ा बारा…

गुरगुर गुरगुर हड्डी कांपय
अंगुरी सुन्न मुन्न होइ जाय
थरथर थरथर सब तन डोले
कान क लवर झन्न होइ जाय
सनामन्न सब ताल इनारा
खेत डगर बगिया चौबारा
बबुरी छांटा छान उचारा …
चला गजोधर कौड़ा बारा… 

बकुली होइ गइ आजी माई
बाबा डोलें लिहे रज़ाई
बचवा दुई दुई सुइटर साँटे
कनटोपे माँ मुनिया काँपे
कौनों जतन काम ना आवे
ई जाड़ा से कौन बचावे
हम गरीब कय एक सहारा
चला गजोधर कौड़ा बारा….

कूकुर पिलई पिलवा कांपय
बरधा पँड़िया गैया कांपय
कौवा सुग्गा बकुली पणकी
गुलकी नेउरा बिलरा कांपय
सीसम सुस्त नीम सुसुवानी
पीपर महुआ पानी पानी
राम एनहुं कय कष्ट नेवरा
चला गजोधर कौड़ा बारा …

…. पद्म सिंह (अवधी)


आइये जाने इन्टरनेट पर हिन्दी मे कैसे लिखें .

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12 thoughts on “चला गजोधर कौड़ा बारा(अवधी)

    Sanjeevv said:
    जनवरी 7, 2013 को 12:19 अपराह्न

    bahut accha, aur bhi jyada sardi ka ehsas kara diya

    प्रवीण पाण्डेय said:
    जनवरी 7, 2013 को 1:57 अपराह्न

    बहुत ही अच्छी लगी यह कविता, अवधी रस भरी।

    कमलेश भगवती प्रसाद वर्मा said:
    जनवरी 7, 2013 को 3:06 अपराह्न

    padam ji garamin parivesh ki ikdam sahi tashveer pesh ki hai….kaura tapne kamaza hi alag hota hai kaash….!!!badhiya

    DrArvind Mishra said:
    जनवरी 7, 2013 को 3:12 अपराह्न

    bahut dino baad aisee shandaar kavita padhee hai -bole to jabardast sadhuvaad!

    अनूप शुक्ल said:
    जनवरी 8, 2013 को 6:35 पूर्वाह्न

    चकाचक कविता है।

    Ashutosh gupta said:
    जनवरी 11, 2013 को 5:06 अपराह्न

    Bachpan ki yad aa gai.

    Anuraag said:
    जनवरी 30, 2013 को 9:56 अपराह्न

    बहुतइ निक लाग तोहर ई अवधी कविता, भाय।
    अइसइ लिखत रह।

    amrita tanmay said:
    जून 5, 2014 को 8:50 पूर्वाह्न

    अच्छा लगा आपको पढ़ना..

    Manish said:
    अक्टूबर 16, 2014 को 6:08 अपराह्न

    भाय अगर शुद्ध अवधी का मजा लेय क्य होए तो फेसबुक पय प्रतापगढ़ यु.पी. ७२ पेज ढूंढा और लाइक करा | सौ % कहत अहि अच्छा जरुर लागे ई पेजवा |

    अनाम said:
    दिसम्बर 6, 2014 को 6:27 पूर्वाह्न

    kavita bahut achchhi lagi

    BHUPENDRA KUMAR SINGH said:
    दिसम्बर 6, 2014 को 6:32 पूर्वाह्न

    kavita bahut achchha lagi

    राजीव नन्दन द्विवेदी said:
    जून 22, 2015 को 11:07 अपराह्न

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