ज्योति पर्व की हार्दिक मंगल कामनाएँ


Deepavali Orkut Scraps, Comments and Greetings

 

अहो भाव का स्वप्निल नवल विहान आपके आंगन में
मन वीणा पर गुम्फित मधुरिम  तान आपके अंगन में

अनुरंजित कर मानस अपना नव संचार संवारने दें
नृत्य चले आनंद भाव का नूपुर टूट बिखरने दें
परम शान्ति सद्भाव प्रेम का गान आपके आँगन में
मन वीणा पर गुम्फित मधुरिम  तान आपके अंगन में

मदिर फुहार झरे चंदनियां मरु अंतस को धो जाए
नर्तन हो इश्वर मय हो कर अपना पन ही खो जाए
शाश्वत अविरल विपुल कान्ति मुस्कान आपके आंगन में
मन वीणा पर गुम्फित मधुरिम  तान आपके अंगन में

जले दीप से दीप जगत में प्रीति भरी अरुणाई हो
मिले गीत से गीत स्वरों में मादकता तरुणाई हो
सत्यम शिवम् सुन्दरम का प्रतिमान आपके आँगन में
मन वीणा पर  गुम्फित मधुरिम तान आपके आँगन में 

….. पद्म सिंह

3 टिप्पणियाँ (+add yours?)

  1. अजय कुमार झा
    नवम्बर 13, 2012 @ 14:20:33

    प्रतिक्रिया

  2. सलिल वर्मा
    नवम्बर 13, 2012 @ 22:50:38

    आलोक-पर्व की बहुत बहुत शुभकामनाएं!! यह रचना वास्तव में आदर्श शुभकामना है!!

    प्रतिक्रिया

  3. प्रवीण पाण्डेय
    नवम्बर 14, 2012 @ 13:39:37

    प्रीति भरी अरुणाई से सारा विश्व भर जाये..

    प्रतिक्रिया

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