गज़ल

 
कभी तो सामने अंजाम भी आए कोई
मेरी दुवाओं का असर भी तो पाए कोई
 
किसी का नाम जुबां पर न सही दिल मे है
कभी तस्वीर को आईना बनाए कोई
 
कोरे कागज़ के पैरहन कभी रंगीन भी हों
रंग बरसाए कभी झूम के गाए कोई
 
जिसके घर लगता है हर शाम गमों का मेला
जाए भी घर तो सिर्फ नाम को जाए कोई
 
लहू सा उम्र भर जो बहते रहे सीने मे
अब भुलाए तो उन्हें कैसे भुलाए कोई
 
दर्द ऐसा न सहा जाए न छोड़ा जाआए
इश्क कैसे तेरा भी साथ निभाए कोई
 
दर्द से जिसने मरासिम बना लिया हो पद्म
काहे पछताए कोई रंज मनाए कोई
 
….. पद्म सिंह

10 टिप्पणियाँ (+add yours?)

  1. सलिल वर्मा
    सितम्बर 02, 2012 @ 15:54:54

    आपके गीत, गज़ल देखकर ये लगता है,
    आज ठाकुर के “वो तेवर” कहीं से लाए कोई!

    प्रतिक्रिया

  2. प्रवीण पाण्डेय
    सितम्बर 02, 2012 @ 18:08:56

    बहुत खूब, बहुत प्रभावी..

    प्रतिक्रिया

  3. Shivam Misra
    सितम्बर 03, 2012 @ 22:30:06

    मोहब्बत यह मोहब्बत – ब्लॉग बुलेटिन ब्लॉग जगत मे क्या चल रहा है उस को ब्लॉग जगत की पोस्टों के माध्यम से ही आप तक हम पहुँचते है … आज आपकी यह पोस्ट भी इस प्रयास मे हमारा साथ दे रही है … आपको सादर आभार !

    प्रतिक्रिया

  4. anu
    सितम्बर 03, 2012 @ 22:38:43

    बहुत खूबसूरत….रूमानियत के एहसास से भरी गज़ल..
    अनु

    प्रतिक्रिया

  5. virendra sharma
    सितम्बर 03, 2012 @ 23:03:13

    बेहतरीन शैर है ,बाकी भी बढ़िया व्यंजना लिए हैं ,असर भी .
    सोमवार, 3 सितम्बर २०१२”
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    What both women and men need to know about hypertension

    प्रतिक्रिया

  6. आनंद द्विवेदी
    सितम्बर 04, 2012 @ 11:41:49

    बहुत अच्छी गज़ल है, मेरा शेर :-
    कोरे कागज़ के पैरहन कभी रंगीन भी हों
    रंग बरसाए कभी झूम के गाए कोई.

    प्रतिक्रिया

  7. arvind mishra
    सितम्बर 04, 2012 @ 14:06:10

    अहसास की ग़ज़ल

    प्रतिक्रिया

  8. rasprabha
    सितम्बर 14, 2012 @ 21:13:48

    कोरे कागज़ के पैरहन कभी रंगीन भी हों
    रंग बरसाए कभी झूम के गाए कोई…वाह

    प्रतिक्रिया

  9. Padm Singh पद्म सिंह
    नवम्बर 13, 2012 @ 08:03:04

    आभार ! आप सब का बहुत बहुत आभार !

    प्रतिक्रिया

  10. आराध्या सिंह
    मई 25, 2013 @ 12:08:23

    दर्द से जिसने मरासिम बना लिया हो पद्म
    काहे पछताए कोई रंज मनाए कोई

    इतनी खुबसुरत गज़ल लिखी है आपने
    तरीफ के लिए उम्दा शब्द बताए कोई …….

    प्रतिक्रिया

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