नेता स्त्रोक्तम…

 

neta3Publication3

8 टिप्पणियाँ (+add yours?)

  1. दिवाकर मणि
    जनवरी 29, 2012 @ 01:20:12

    पठित्वा त्वदीयम्‌ नेतारः स्तोत्रम्‌
    मनः गद्‌गदं करयोः खुजलीमारब्धम्‌
    कि करूं पूजा नेतानां, पादत्राणेषु वार-वारं…

    प्रतिक्रिया

  2. प्रवीण पाण्डेय
    जनवरी 29, 2012 @ 09:34:56

    जमकर धुलाई, खरी है पिलाई, नहीं किन्तु ये सब सुधरें कभी,
    महाभ्रष्ट रचना, बचना रे बचना, मिला आज अवसर रगड़ दो अभी

    प्रतिक्रिया

  3. सुमित प्रताप सिंह
    जनवरी 29, 2012 @ 13:40:53

    क्षय क्षय हो
    सब भ्रष्टन की क्षय हो…

    प्रतिक्रिया

  4. Kajal Kumar
    जनवरी 29, 2012 @ 15:18:12

    वाह जी इस नेते की भी बल्ले बल्ले

    प्रतिक्रिया

  5. सलिल वर्मा
    जनवरी 29, 2012 @ 19:56:16

    ठाकुर साहब!! ऐसी पैनी कवितावली पर तो वो गब्बर सिंह की तरह आपको खोजते फिरेंगे!!

    प्रतिक्रिया

  6. मनोज कुमार
    जनवरी 29, 2012 @ 23:09:35

    आपका सृजनात्मक कौशल हर पंक्ति में झांकता दिखाई देता है।

    प्रतिक्रिया

  7. Pratik
    जनवरी 31, 2012 @ 17:02:06

    हाहा अब तो यह स्त्रोकतम का जाप करना पड़ेगा नेताजी के अनुयायियों को🙂

    प्रतिक्रिया

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: