नेता स्त्रोक्तम…

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8 thoughts on “नेता स्त्रोक्तम…

    दिवाकर मणि said:
    जनवरी 29, 2012 को 1:20 पूर्वाह्न

    पठित्वा त्वदीयम्‌ नेतारः स्तोत्रम्‌
    मनः गद्‌गदं करयोः खुजलीमारब्धम्‌
    कि करूं पूजा नेतानां, पादत्राणेषु वार-वारं…

    प्रवीण पाण्डेय said:
    जनवरी 29, 2012 को 9:34 पूर्वाह्न

    जमकर धुलाई, खरी है पिलाई, नहीं किन्तु ये सब सुधरें कभी,
    महाभ्रष्ट रचना, बचना रे बचना, मिला आज अवसर रगड़ दो अभी

    सुमित प्रताप सिंह said:
    जनवरी 29, 2012 को 1:40 अपराह्न

    क्षय क्षय हो
    सब भ्रष्टन की क्षय हो…

    Kajal Kumar said:
    जनवरी 29, 2012 को 3:18 अपराह्न

    वाह जी इस नेते की भी बल्ले बल्ले

    सलिल वर्मा said:
    जनवरी 29, 2012 को 7:56 अपराह्न

    ठाकुर साहब!! ऐसी पैनी कवितावली पर तो वो गब्बर सिंह की तरह आपको खोजते फिरेंगे!!

    मनोज कुमार said:
    जनवरी 29, 2012 को 11:09 अपराह्न

    आपका सृजनात्मक कौशल हर पंक्ति में झांकता दिखाई देता है।

    Pratik said:
    जनवरी 31, 2012 को 5:02 अपराह्न

    हाहा अब तो यह स्त्रोकतम का जाप करना पड़ेगा नेताजी के अनुयायियों को 🙂

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