जनमानस स्तब्ध है लोकतन्त्र लाचार

Posted on

 

Anna-Hazare-funny-Cartoon-pics-500x375

******

जनता सड़कों पर खड़ी मांग रही कानून
मनमानी सरकार की बना नहीं मजमून
भय है भ्रष्टाचार पर लग ना जाय नकेल
भ्रष्टाचारी       खेलते     उल्टे    सीधे   खेल
उल्टे   सीधे    खेल   काम जैसे भी बनता
नहीं बने कानून    भाड़ मे जाये जनता

********************

संसद की सर्वोच्चता सत्ता का यह खेल
कैसी   अंधाधुंध     है    कैसी    रेलमपेल
राजनीति की नसों  मे पसरा भ्रष्टाचार
जनमानस   स्तब्ध है लोकतन्त्र लाचार
लोकतन्त्र  लाचार ठनी नौटंकी हद की
फिर नंगी तस्वीर उभर आई संसद की

*********************

जनता जब से जगी है ऐसी पड़ी नकेल
हुए उजागर बहुत से राजनीति के खेल
कहने को सब चाहते लोकपाल मजबूत
पर सपनों मे डराए  लोकपाल का भूत
लोकपाल का भूत  नहीं कुछ कहते बनता
अन्ना,बाबा, स्वामी पीछे सारी जनता

*******************

मंहगाई सर पे चढ़ी फिर उछला पेट्रोल 
सरकारी वादे सभी  बने ढ़ोल के पोल
भूखा मारे गरीब और सड़ता रहे अनाज
देश नोच कर खा रहे  सत्ताधारी बाज़
सत्ताधारी बाज़    कयामत    जैसे  आई
जीना दूभर हुआ चढ़ी सर पे मंहगाई

******************



 

 

 

 


Advertisements

10 thoughts on “जनमानस स्तब्ध है लोकतन्त्र लाचार

    संतोष त्रिवेदी said:
    जनवरी 1, 2012 को 9:54 पूर्वाह्न

    नए साल में बजा दिया ,इक ठाकुर ने ढोल
    लोकपाल बन जायेगा ,पर खुल जायेगी पोल !!

    Padm Singh पद्म सिंह responded:
    जनवरी 1, 2012 को 9:58 पूर्वाह्न

    ब्लॉग जगत के धुरंधर फेसबुक्क के वीर
    नए साल पर धार दें तीखे तीखे तीर
    भ्रष्टाचारी व्यवस्था अनाचार की नीति
    सत्ता पर काबिज हुई तानाशाही रीति
    तानाशाही नीति लड़ाई ठानो डट के
    फेसबुक्क के वीर धुरंधर ब्लग जगत के

    ajaykumarjha said:
    जनवरी 1, 2012 को 10:01 पूर्वाह्न

    धर धर के पटक पटक के धो डाला , पहिले दिन ही हो महाराज ।
    सब के सब कमाल धमाल । बढिया है जी

    कनिष्क कश्यप said:
    जनवरी 1, 2012 को 12:05 अपराह्न

    अकाट्य रही यह लेखनी सच्चाई सब बयान
    अजब -निराले राग से सब कह गए ससम्मान
    घूमते फिरते आये थे ..पर न जाए पाए चुप -चाप
    ऐसी बेबाकी देख कर मिट गए सब संताप

    प्रवीण पाण्डेय said:
    जनवरी 1, 2012 को 12:27 अपराह्न

    धुंध पड़ी है, हर पक्षों पर….

    mv said:
    जनवरी 1, 2012 को 9:42 अपराह्न

    छंदों में बढि़या लपेटा है सबको।
    नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं ।

    sktyagi said:
    जनवरी 1, 2012 को 10:05 अपराह्न

    बहुत बढ़िया कार्टून है!.. कविता भी अच्छी हर और सरोकार भी!!

    Sumit Tomar said:
    जनवरी 2, 2012 को 12:02 अपराह्न

    लौट के बुद्धू घर पर आये…:)

    स्वागत है पद्म भाई…

    सुमित प्रताप सिंह said:
    जनवरी 2, 2012 को 7:11 अपराह्न

    पद्म भाई छंद के फंद में फँसाकर भ्रष्टाचार को पटकनी देकर ही रहेंगे…

    Manju Mishra said:
    अगस्त 7, 2012 को 12:09 अपराह्न

    संसद की सर्वोच्चता सत्ता का यह खेल
    कैसी अंधाधुंध है कैसी रेलमपेल
    राजनीति की नसों मे पसरा भ्रष्टाचार
    जनमानस स्तब्ध है लोकतन्त्र लाचार

    एकदम सही कहा आपने… लोकतंत्र लाचार ही तो हो गया है… चारो तरफ बस मनमानी ही मनमानी तो हो रही है… जन-हित तो सिर्फ भाषण और कागजों तक सीमित हो कर रह गया है…

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s