कवि सम्मेलन और रज़ाई वार्ता … सांपला ब्लागर मीट 24-12-11 (भाग-2)

गतांक से आगे-

24-12-11, स्थान-सांपला, समय –  सायं 4 बजे के आस पास

ब्लागर मिलन हो चुका था… अजय झा, शाहनवाज़, कनिष्क, अंजू जी, संजय अनेजा जी, खुशदीप जी, संजू तनेजा जी, सहित DSC01264तमाम चिट्ठाकार रात अपने ही घर मे काटने की ठान चुके थे अतः अनमने ही उन्हें विदा करना पड़ा … हमारी बात कुछ और थी…अब हम ठान चुके थे कि देर से आने की कमी को रात्रि-प्रवास से निपटा कर ही वापस जाएँगे…. उधर राज भाटिया जी से फुर्सत मे अनौपचारिक बातचीत का लोभ और अंतर सोहिल के स्नेह ने हमें सांपला मे रुकने को मजबूर कर दिया। राजीव तनेजा जी, और केवल राम को हम सब ने जबरन रोका गया …जाट देवता पहले से ही हमारे बीच विराजमान थे… शाम को कुछ और ब्लागर मित्र आ गए जिनमे आशुतोष तिवारी और दीपकबाबा का नाम ही ध्यान है मुझे… रज़ाई मे घुस कर देर शाम तक बतकही करने का मज़ा अनुपम था… फेसबुक से लेकर ब्लाग और विषयगत लेखन, आभासी रिश्तों से लेकर न्यू मीडिया की संभावनाओं तक बहुत कुछ अनौपचारिक वार्ता मे शामिल रहा… बीच बीच मे चाय शाय का भी दौर चला… देर शाम सांपला सांस्कृतिक मंच के तत्वाधान मे होने वाले कवि सम्मेलन मे चलने की तैयारी हुई… अलबेला खत्री, और अन्य कवि गण अलग कमरे मे अपने आपको मेक-अप कर रहे थे… हमारे कार्यक्रम स्थल तक पहुँचने तक आधा पाण्डाल पहले  ही भर चुका था…

 DSC01287इन्दु जी, राज भाटिया जी, राजीव तनेजा और केवल राम जी के साथ हम सब अपने अपने फैशन मे कवि सम्मेलन मे विराजमान हुए…. लेकिन एक घंटे के अंदर ही ठंड ने कहा अपने अपने फैशन और अपनी अपनी शरम अपनी जेब मे रखो… अब यहाँ हमारा राज है॥ और फिर भागे ठण्ड का इंतज़ाम करने… इधर इन्दु जी ने माइक सम्हाला और कवियों और अतिथियों के सम्मानित करने का दौर चलाया… बाद मे कवि सम्मेलन का औपचारिक प्रारम्भ होते ही मंच की कमान अलबेला जी के हाथों मे सौपी गयी…

मुख्य रूप से सम्मेलन के लिए आमंत्रित कवियों मे कवि P241211_21.53_[02]अलबेला खत्री, योगेंद्र मुदगिल, व्यंजना शुक्ला, कृष्णकांत दिल्ली, सत्येन वर्मा इंदौर, जोगेंद्र मोर रोहतक से थे। सभी कवियों ने अपने अपने अंदाज़ मे काव्यपाठ कर सांपला के साहित्यप्रेमी श्रोताओं को मगन किया तो अपने चुटकुलों और हास्य रस से माहौल को जीवंत भी बनाए रखा। बीच बीच मे जनमानस को सम्मेलन से बांध कर रखने के लिए व्यंजना और अलबेला जी के बीच चुटकियाँ भी चलती रहीं… ठण्ड काफी हो रही थी…यद्यपि पाण्डाल भरा हुआ था परन्तु लोगों ने अपने आपको गरम शालों और कपड़ों मे ऐसे छुपा रखा था कि तालियों के लिए भी हाथ निकालने से बचते रहे… उधर सुबह से लाइट न होने के कारण  जनरेटर भी हलाकान हुआ जा रहा था…

406378_10150457058826799_642751798_8822138_120434910_nआमंत्रित स्थापित  कवियों के बाद ब्लागजगत की ओर से काव्यपाठ के लिए मुझे मंच से आमंत्रित किया गया। साथ ही इन्दु जी, राजीव तनेजा और राज भाटिया जी को भी सम्मानित किया गया… देर रात तक लोग कवि सम्मेलन का मज़ा लेते रहे…कवि सम्मेलन के मुख्य अतिथि लगभग ७५ वर्षीय लाला हरकिशन जी ने जब माइक सम्हाला तब पता चला कि वो काव्य और साहित्य के कितने बड़े रसिया हैं। तमाम अच्छी सीखों के साथ उन्होने बड़े सार्थक अंदाज़ मे कवितायें भी सुनाई और आश्वासन  दिया कि यह कवि सम्मेलन हर वर्ष होना चाहिए… वो हमेशा हर तरह से साथ देंगे…सांपला मिलन और सम्मेलन मे लाला जी विशेष रूप से अविस्मरणीय रहेंगे। DSC01296

देर रात सम्मेलन की समाप्ति के बाद सभी कवियों सहित हम सब भोजन कर  रज़ाई को प्राप्त हुए.. और फिर शुरू हुई रज़ाई-वार्ता सुबह चार बजे तक चलती रही… मै अपने लैपटॉप पर स्व० राजीव दीक्षित के आख्यान सुनते हुए कब निद्रा देवी की गोद मे समा गया कुछ पता ही नहीं चला…शेष लोग बहुत देर तक रज़ाई गोष्ठी मे रमे रहे… अंतर सोहिल और सांपला सांस्कृतिक मंच के अन्य स्वयंसेवक रात भर हम सब का ध्यान रखते रहे …

रज़ाई वार्ता

२५ दिसंबर की सुबह हो चुकी थी… विदाई का समय भी आ गया था… अंतर सोहिल विदाई को लेकर इतने भावुक हो चुके थे कि अलबेला जी की छेड़-छाड़ का भी कोई असर नहीं हुआ…अन्तर सोहिल ने सभी मेहमानों के दिलों पर जो छाप छोड़ी वो हमेशा के लिए अमिट रहेगी… सांपला की सुमधुर स्मृतियाँ, सोहिल का स्नेहिल समर्पण और सब का स्वप्निल साथ सदा स्मरणीय रहेगा…

सांपला ब्लागर मिलन