आओ खेलें वादी वादी

छोड़ो भी ईमान की बातें

लूटें खाएं आधी आधी

सोचे कौन देश की बातें

आओ खेलें वादी वादी

 

जाति पांति मे बंटे रहेंगे

अपने हित पर डटे रहेंगे

तने रहे हैं तने रहेंगे

कैसे छोड़ेंगे परिपाटी

बने रहे हैं बने रहेंगे

हिन्दूवादी मुसलिमवादी

अन्ना-वादी बाबा-वादी

 

फूल नहीं हम खार रहेंगे

प्यार नहीं व्यापार रहेंगे

ना सुधरे थे ना सुधरेंगे

हम धरती पर भार रहेंगे

हँस कर सह लेंगे बरबादी

बेशक छिन जाये आज़ादी

लेकिन हम तो बने रहेंगे

अगड़ा-वादी पिछड़ा-वादी

 

नहीं स्वावलंबन लाएँगे

सस्ते का राशन खाएँगे

आरक्षण की भांग पिएंगे

जितना कुनबा उतना राशन

खूब बढ़ाएँगे आबादी

अपने ठेंगे से मर जाएँ

भगवा-वादी, खादी-वादी

अन्नावादी, बाबा वादी

———————————————————————–

होने दो मंथन कोई तो हल निकलेगा

अमृत निकलेगा या कोई गरल निकलेगा

तप जाने दो स्वर्ण कलश सा दिखने वाला मौसम

ये तो समय बताएगा पीतल या कि कुन्दन निकलेगा

3 टिप्पणियाँ (+add yours?)

  1. प्रवीण पाण्डेय
    दिसम्बर 25, 2011 @ 20:34:38

    बाँट बाँट कर छिन्नित सा है वसन हमारे हृदयों का…

    प्रतिक्रिया

  2. Mukesh Sinha
    दिसम्बर 26, 2011 @ 14:56:25

    NICE:))))

    प्रतिक्रिया

  3. Mukesh Sinha
    दिसम्बर 26, 2011 @ 14:57:25

    mere ko apke NICE bolne ka style bha gaya tha Padm singh jee, isliye likh diya..:)

    छोड़ो भी ईमान की बातें
    लूटें खाएं आधी आधी

    mann to aisa mera bhi karta hai, par ye sala imaan bich me aa jata hai!!

    प्रतिक्रिया

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