कुल मिला कर ज़ीरो…


SAnjay 006कई महीने हो गए ब्लॉग पर कुछ लिखे हुए…. लिखते रहने के अतिरिक्त कुछ करने की सोच कर भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना और बाबा के साथ हो लिया…. हर अनशन, हर मोर्चे, और हर जुलूस मे कभी झंडे लिए तो कभी मोमबत्ती जलाए गले फाड़ता रहा…भारत माता की जय, वंदे मातरम, इंकलाब ज़िन्दाबाद…. लोगों ने अपने एयरकंडीशंड घरों से स्वतः निकल कर मोमबत्ती जलाई और हमारे साथ हो लिए… ऐसा लगने लगा जैसे अब क्रान्ति हो चुकी है… अब हो न हो देश से भ्रष्टाचार के काले बादल छंट जाएँगे… नया सवेरा आने ही वाला है… परन्तु सरकारी पैंतरों और गुलाटी खाते सत्तासीन चुने हुए(वास्तव मे छंटे हुए) प्रतिनिधियों को देख कर लोकतन्त्र और संसद की सर्वोच्चता का असल मतलब… और मकसद दोनों काफी कुछ(जितनी आम जनता की समझ की औकात है) समझ मे आई…. समझ तो आप को भी आ गयी होगी… पर पुनः ब्लॉग पर अपनी उपस्थिति दर्ज़ करते हुए एक लोकोक्ति कहना चाहूँगा…

दो टके की हाँडी गयी तो गयी…. कुत्ते की जात तो पहचान मे आई

बस मन मे बहुत खुन्नस है… धीरे धीरे निकलेगी… फिलहाल इसे बाँच लीजिये…. लिख दिया… ताकि सनद रहे और वक्त पर काम आए…

भ्रष्टाचार, काला धन
बाबा का आंदोलन
अन्ना का अनशन
ज्वाइंट  मीटिंग
सरकारी चीटिंग
लोगों का सपोर्ट
बाबा एयरपोर्ट
मान मनौवल
सरकारी सिर फुटौव्वल
बाबा का अनशन
सत्ता  से अनबन
अनशन पर वार
बाबा तड़ीपार
अनशन पर शर्तें
साजिश की परतें
अन्ना को जेल
दमन का नंगा खेल
वार्ता, करार,
सोनिया फरार
राहुल को कमान
राम लीला मैदान
ओमपुरी का बयान,
संसद का अपमान,
अग्निवेश का फोन
मनमोहन का मौन
राहुल का बयान
मीडिया की उड़ान
स्थायी कमेटी,
सिंघवी की हेटी
पासवान की टांग
आरक्षण की मांग
सर्वदलीय मीटिंग
बैकडोर चीटिंग
फेसबुक निगरानी
दमन की कहानी
बार बार मीटिंग
भितरघात चीटिंग
नहीं बनी बात
धाक के पात
हाँ हाँ, ना ना
चीं चीं, काँ काँ
धीरे धीरे आम लोग
पक गए तमाम लोग
अन्ना बन गए हीरो
बंसी बजाए नीरो 
हासिल रहा ज़ीरो…
कुल मिला कर ज़ीरो…

(ज़ीरो मतलब सुन्ना…  “0” मौज करो मुन्ना)

….. पद्म सिंह

3 टिप्पणियाँ (+add yours?)

  1. प्रवीण पाण्डेय
    दिसम्बर 22, 2011 @ 08:29:02

    कोफ्त होती है जब दिशायें ही भ्रमित होने लगें।

    प्रतिक्रिया

  2. Himanshu
    दिसम्बर 22, 2011 @ 09:48:48

    Kya Kiya Jaye, Kaise Kiya Jaye, Kiske Sath Raha Jaye.

    प्रतिक्रिया

  3. diwyanshdi
    दिसम्बर 22, 2011 @ 14:24:35

    आत्माभिव्यक्ति की अर्थी पर
    जन माल्यार्पण करता है
    तंत्र सभी निर्जीव बने
    दायित्व दया की पात्र बनी
    संसद प्रांगण में लोकतंत्र
    अपना ही तर्पण करता है

    प्रतिक्रिया

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