सत्य साईं के चमत्कार और भभूत की महिमा….पद्म सिंह

पुट्टीपर्थी के सत्य साईं बाबा की हालत गंभीर है… सत्य साईं बाबा अपने चमत्कारों और सामाजिक हित में किये गए कार्यों के लिए बड़े बड़े राजघरानों से लेकर उद्योगपतियों द्वारा पूज्य रहे हैं…

amma.PPMIX-1मेरी पूजनीया दिवंगत नानी भदरी रियासत की रानी स्वर्गीया गिरिजा देवी जो वर्तमान के बहुचर्चित विधायक राजा भईया की दादी और अजयगढ़ रियासत की बेटी थीं, की रिश्ते में ननद लगती थीं और दोनों में इतना अधिक प्रेम था कि दोनों ने उम्र एक बड़ा हिस्सा साथ साथ बिताया…. भदरी उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जनपद की तीन रियासतों में से बिसेन(विश्वसेन) राजपूतों की छोटी सी रियासत है. अंग्रेजों के समय में  राजा भईया के बाबा स्व० बजरंग बहादुर सिंह जो हिमांचल प्रदेश के गवर्नर भी रहे, को रायसाहब की पदवी प्राप्त थी. इसके बारे में विस्तृत चर्चा फिर कभी करेंगे.

imagesमेरी नानी जिनको हम प्यार में अम्मा कहते थे.. रानी हुज़ूर के साथ प्रतिवर्ष एक दो महीने के लिए तीर्थाटन के लिए जाया करती थीं. घटना 1971 के आसपास की होगी जब मै एक साल का ही रहा होऊंगा. उस समय पुट्टीपार्थी के सत्य साईं बाबा की प्रसिद्धि अपने चरम पर थी. राय साहब उन दिनों लंबी बीमारी के दौर से गुजर रहे थे… तब चिकित्सा विज्ञान उतना उन्नत भी  नहीं होता था… दवाओं के साथ दुवाओं का भरोसा लेना आम बात थी… इसी सन्दर्भ में नानी और रानी हुजूर साईं बाबा के दर्शन को गए थे… यह कहानी नानी ने हमें कई बार सुनाई थी… साईं बाबा के दरबार में उस समय भी पैसे वालों के लिए दर्शन आदि का विशेष प्रबंध होता था… जैसी सामर्थ्य वैसी कृपा… वहाँ की कहानी बताते हुए नानी कहतीं… लोग उनके पैरों को धो कर उसका पान करने तक को तरसते थे… साईं बाबा जब लोगों को दर्शन देने निकलते तो हवा में हाथ लहराते और कुछ न कुछ उनके हाथ में प्रकट होता और उसे अपने भक्तों को देते… विशेष भक्तों के लिए विशेष कृपा बरसती थी जिसमे स्विस घड़ियों, मंहगी अंगूठियां से ले कर आदि बहुत कुछ होता.…साधारण भक्तों के लिए खुशबूदार भभूत की पुड़िया होती…  बस हवा में हाथ लहराते और हाथ में  कुछ न कुछ प्रकट हो जाता…

राय साहब के स्वास्थ्य लाभ के लिए आशीर्वाद और प्रसाद लेकर कुछ दिन में नानी लोग लौट आईं और साथ लाईं साईं बाबा के प्रति ढेर सारी श्रद्धा और  ढेर सारे उनके चित्र और प्रतीक आदि.  साईं बाबा की बड़ी सी फ्रेम की हुई फोटो महल के मुख्य पूजाघर में पहले से ही प्रतिष्ठापित कर दी गयी थी… एक दिन जब राय साहब के प्रमुख नौकर सत्यनारायण (जिन्हें हम प्यार से सत् नारायन मामा बोलते थे) पूजाघर की सफाई और व्यवस्था आदि देखने गए तो वहाँ चमत्कार  हो चुका था…साईं बाबा की फोटो से स्वतः भभूत निकल फ्रेम के शीशे पर धार बनाते हुए नीचे गिर रहा था… फिर क्या था… साईं बाबा ने कृपा बरसाई थी… पूरे महल में चर्चा फ़ैल गयी और लोग दर्शन करने को आने लगे लेकिन मुख्य पूजाघर होने और महल के अन्तःपुर में स्थित होने के कारण आम लोगों को दर्शन नहीं मिल सकते थे.., लेकिन चर्चा चारों तरफ फ़ैल गयी थी….

अब तो यह रोज़ की बात हो गयी… रोज़ सुबह साईं बाबा की फोटो से भभूत निकलने लगा था… लेकिन यह भभूत किसी को मिलना दुर्लभ था… किसी भी खास या आम को इसे छूने की इजाज़त नहीं थी… चूँकि राय साहब उस समय बीमार रहते थे…तो इस भभूत को रोज़ विशेष देख रेख में एकत्र किया जाता और शहद में मिला कर राय साहब को खिलाया जाता…या सिलसिला कुछ दिनों तक चला भी…

मेरी माँ भी उन दिनों नानी के साथ महल में ही थीं, एक दिन सुबह की बात है… माँ भी मंदिर में यह चमत्कार देखने पहुँच गयीं… नानी की इकलौती संतान और नाना के उस समय में उच्च शिक्षित होने के कारण मम्मी हमेशा से बहुत व्यावहारिक और प्रैक्टिकल  सोच वाली रही हैं … माँ को यह घटना पहले दिन से ही गले नहीं उतर रही थी…उस दिन सुबह सुबह जब नौकरों ने सफाई शुरू की तो उन्होंने मंदिर की खूब अच्छे से सफाई करने के लिए निर्देशित किया और खड़े हो कर सफाई करवाने लगीं…  वैसे तो साईं बाबा की फोटो को छूना भी लोगों के लिए मना था… लेकिन मम्मी ने ही कहा कि आज सारी फोटो और मूर्तियाँ हटा और खिसका कर अच्छे से सफाई करो…

और फिर वही हुआ जो उन्हें पहले से ही खटक रहा था… साईं बाबा की फोटो जैसे ही हटा कर सफाई की जाने लगी… भभूत का राज़ सामने आ गया….

दरअसल हुआ यह था…. कि साईं बाबा की फोटो एक बेहतरीन और मंहगे लकड़ी के फ्रेम में जड़ा हुआ था…. फोटो फ्रेम काफी समय से एक ही स्थान पर रखा हुआ था… इस कारण से चुपचाप ढेर सारी दीमकों ने लकड़ी के फ्रेम को अपना घर बना लिया था और भीतर से फ्रेम को खोखला कर दिया था… और यही दीमकों द्वारा चाटी गयी लकड़ी का महीन चूरा फ्रेम के छेदों से होकर फोटो के शीशे पर सरकता हुआ नीचे की ओर गिर रहा था….

भेद खुल चुका था… आगे क्या होना था… बात को दबाने का प्रयास किया गया…. और कुछ विशेष लोगों के अतिरिक्त और किसी तक यह बात नहीं फैलने दी गयी… इस तरह महल और सत्यसाईं बाबा दोनों की इज्जत बची रह गयी…

ये उन्हीं साईं बाबा की बातें हैं जो आजकल गंभीर अवस्था में वेंटिलेटर पर  हैं और चमत्कारों और भभूतों की क्षमता से निकल आधुनिक चिकित्सा की शरण में हैं…

….. पद्म सिंह

(यह पोस्ट सत्य घटना पर आधारित है और किसी की व्यक्तिगत आस्था को चोट पहुंचाने के लिए नहीं है)

फोटो गूगल से साभार

22 टिप्पणियाँ (+add yours?)

  1. yogendra pal
    अप्रैल 21, 2011 @ 08:34:21

    क्या कहें —

    प्रतिक्रिया

  2. प्रवीण शाह
    अप्रैल 21, 2011 @ 08:44:22

    .
    .
    .
    सत्य सांई हो या स्वयं भगवान ही…हवा में हाथ लहराकर स्विस घड़ियाँ व अंगूठियाँ नहीं पैदा की जा सकतीं… न ही कोई इन्सान उल्टी में सोने के शिवलिंग उगल सकता है…

    जिसकी भी आस्था इन बातों पर है उस आस्था को चोट जरूर पहुंचनी चाहिये… यही सही होगा !

    प्रतिक्रिया

  3. आशीष श्रीवास्तव
    अप्रैल 21, 2011 @ 09:22:35

    🙂

    प्रतिक्रिया

  4. ललित शर्मा
    अप्रैल 21, 2011 @ 09:50:54

    इंडिया टुडे के 15 साल पुराने एक अंक में इनके चमत्कारों का भेद खोला गया था। भारत में संतो द्वारा चमत्कार करने की मान्यता रही है। जो चमत्कार दिखाए वही संत महात्मा है।
    अगर चमत्कारों को पृथक करके देखें तो इन्होने स्वास्थ्य के क्षेत्र में अत्याधुनिक अस्पताल शुरु कर काफ़ी लोगों को लाभ पहुंचाया है।

    प्रतिक्रिया

  5. अजित वडनेरकर
    अप्रैल 21, 2011 @ 09:54:20

    बेहतरीन ढंग से सब कुछ कह दिया है पद्मभाई आपने। बढ़िया पोस्ट।

    प्रतिक्रिया

  6. jai kumar jha
    अप्रैल 21, 2011 @ 09:59:08

    इसलिए कहते हैं की आँख हमेशा खुली और दिमाग में सोचने समझने की शक्ति को जगाये रखना चाहिए…इस पृथ्वी पर जन्म लेने वाला महान इंसान तो हो सकता है सर्वशक्तिमान भगवान नहीं…..इसलिए महान इंसान बनने का प्रयास करना चाहिए भगवान नहीं..लेकिन दुखद है की कुछ लोग जो उच्च संवेधानिक पदों पे बैठकर देश को लूटकर तथा अपने धनपशु उद्योगपतियों के साथ लूटेरों की गठजोड़ बनाकर भगवान बनने का प्रयास कर रहें हैं…

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  7. अन्तर सोहिल
    अप्रैल 21, 2011 @ 10:31:11

    अभी भी मूढ लोग नहीं जागते,
    जब दूसरों को कथित बचाने वाला खुद अस्पताल के बिस्तर पर पडा है🙂

    प्रणाम

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  8. राजीव तनेजा
    अप्रैल 21, 2011 @ 11:44:36

    राज़ खोलती बढ़िया पोस्ट

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  9. शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
    अप्रैल 21, 2011 @ 12:06:33

    पदम सिंह जी, वैसे धर्म हमें व्यवस्थित रखता है, और आस्थाएं शक्ति प्रदान करती हैं.

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  10. राज भाटिया
    अप्रैल 21, 2011 @ 13:23:19

    अब यही साई ठग जिसे लोग ओर वो खुद भी अपने आप को भगवान कहता हे, एक एक सांस के लिये तरस रहा हे… ओर लोगो को आज भी समझ नही आ रही जो इस बाजी गर को आज भी पुज रहे हे…मेरे घर मे तो आज भी इसे एक ठग की, एक धोखे बाज की नजर से देखा जाता हे

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  11. राहुल सिंह
    अप्रैल 21, 2011 @ 14:46:30

    शुभकामनाएं आपको और साईं बाबा के लिए भी.

    प्रतिक्रिया

  12. mahendra mishra
    अप्रैल 21, 2011 @ 15:45:08

    बहुत बढ़िया जानकारीपूर्ण अभिव्यक्ति…ॐ साईं राम

    प्रतिक्रिया

  13. mahendra mishra
    अप्रैल 21, 2011 @ 15:46:56

    ..ॐ साईं राम मगर ऐसे साईं लोगों के लिए नहीं …

    प्रतिक्रिया

  14. प्रवीण पाण्डेय
    अप्रैल 21, 2011 @ 23:46:07

    आस्था, अनास्था के अपने बन्द कक्ष।

    प्रतिक्रिया

  15. ismat zaidi
    अप्रैल 22, 2011 @ 12:58:06

    इस सम्बन्ध में मुझे ऐसा लगता है कि जिस तरह हम लोग अपने ही डॉक्टर पर अधिक विश्वास करते हैं और दूसरा डॉक्टर जो किसी और के लिए बहुत अच्छा हो , उस पर विश्वास करना कठिन होता है वही बात यहाँ भी है ,
    अधिकतर लोगों ki किसी न किसी पर आस्था होती है aur ये आस्था बल प्रदान करती है
    आस्था का धर्म से भी कोई khas ताल्लुक़ नहीं होता ,प्रत्येक धर्म तर्कों पर आधारित होता है और हमारे जीवन को व्यवस्थित करता है
    आप अपनी बात कहने में सफल हैं ,बधाई हो .

    प्रतिक्रिया

  16. उदय सिंह टुन्डेले, इंदौर
    अप्रैल 22, 2011 @ 19:42:10

    बंधु !
    सत्य साईं अवतार हैं या नहीं इसके बारे में तो मुझे पता नहीं पर इतना जरुर है कि आज तक इस दुनिया में चमत्कार को ही नमस्कार होता आया है फिर वो हमारे पौराणिक देवी देवता हों या फिर दफ़्तर में हमारे बॉस. जब तक वे हम पर कृपा की भभूत नहीं बरसाते हमारे नमस्कार की पात्रता प्राप्त नहीं करते. आज के युग में मेहनत और ईमानदारी से दो रोटी का जुगाड़ करने वाले साधारण आदमी को इतनी फुर्सत ही कहाँ कि वो किसी ईश्वर या अवतार को याद करे. ये तो दो नंबर की इन्कम वाले लोगों द्वारा ही महिमामंडित किये जाते हैं क्योंकि उनका भ्रष्ट आचरण उन्हें रात को चैन की नींद सोने नहीं देता और वे तथाकथित सिद्ध स्थानों पर अपनी काली कमाई का कुछ हिस्सा चढ़ा कर उसकी आड़ में छिपने/ कृपा खरीदने का प्रयास करते हैं.

    प्रतिक्रिया

  17. Manoj
    अप्रैल 23, 2011 @ 14:03:27

    mai aaj kal ke matmao par vishwash nahi rakhta, aaj ke mahatma Ac aur Mahgi gadiyo me chalte hai, fast food khana to saukh hai, apne ashram ki aad me jane kya gul khilate hai, aap ka post mujhe bahoot achha laga mai aise mauko ki talash karta hoo, ki kab mujhe inke bare me kuchh kahne ka mauka mile.

    प्रतिक्रिया

  18. सतीश सक्सेना
    अप्रैल 23, 2011 @ 19:46:10

    शुभकामनायें भाई जी !

    प्रतिक्रिया

  19. jayantijain
    अप्रैल 24, 2011 @ 16:00:58

    wonder and magic is based on our ignorance

    प्रतिक्रिया

  20. hindu
    अप्रैल 25, 2011 @ 15:00:14

    ——– यदि आप भारत माँ के सच्चे सपूत है. धर्म का पालन करने वाले हिन्दू हैं तो
    आईये ” हल्ला बोल” के समर्थक बनकर धर्म और देश की आवाज़ बुलंद कीजिये…
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    क्या यही सिखाता है इस्लाम…? क्या यही है इस्लाम धर्म

    प्रतिक्रिया

  21. Sameer Khan
    अप्रैल 27, 2011 @ 22:34:39

    satya ghatna khoob rahi.

    प्रतिक्रिया

  22. nazir
    मई 22, 2011 @ 12:36:22

    mujhey garv hai ki mai us desh ka nagrik hoon jaha har qadam par ek mazar,mandir,gruduara milta hai,.jitna 10 vi sadi me insan nahi usse se 100 guna zyada devi devta they shukra hai abhi devi devta pichar gaye par aisa zyada der tak nahi hoga abhi devi, devta pir, fakir ka list tayar hoga aur wo phir insan ko pachchar dengey.ek bat aaj tak samajh me nahi aya jis desh me itney satyapurush ho rakcha karney ke liye itne chamatkarik log ho to phir ye desh ka durbhagya hai ki pehley ye turk,phir mughal,phir angrez ke adhin rahey ayr man se yatna sahi.hai re bhagwan tujhey daya nahi aaye,
    agsr aaj log satya sai baba se pani se diya jalaney ki vidhi jan letey to petrol ke liye hamey dusrey par ashrit nahi rahna parta,
    agar breslet ,ya murty ke utpadan ka formula satya saibaba se le lete to aaj ham aaj hamarey deshwasio ka kitna fayda hota,antigravitetional force ka formula agar pune sthith mazar se mil jata to bap re bap aaj hamarey desh ka to udhdhr ho jata.

    mere pyaro bhai insan ko insan rahney do unkey sachchey anuyaii raho par aankh mat band rakho

    प्रतिक्रिया

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