गज़ल (दिल भरा बैठा हुआ है टूट कर रोता नहीं)

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एक अरसा हो गया है,  बेधड़क  सोता नहीं

दिल  भरा बैठा हुआ है टूट कर रोता नहीं 

किसे कहते हाले दिल किसको सुनाते दास्ताँ

कफ़स का पहलू कोई दीवार सा होता नहीं

दूर हो कर भी मरासिम इस तरह ज़िंदा रहे

मै इधर जागूँ अगर तो वो उधर सोता नहीं

इश्क हो तो खुद-ब-खुद  हस्सास लगती है फिजाँ

कोई   दरिया,  पेड़,  बादल   चाँदनी बोता नहीं

तुम हमें चाहो न चाहो हम तुम्हारे हैं सदा 

ये कोई सौदा नहीं है कोई समझौता नहीं

 

…… पद्म सिंह =Padm singh 9716973262

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22 thoughts on “गज़ल (दिल भरा बैठा हुआ है टूट कर रोता नहीं)

    अमिताभ मीत said:
    मार्च 6, 2011 को 4:15 अपराह्न

    किसे कहते हाले दिल किसको सुनाते दास्ताँ

    कफ़स का पहलू कोई दीवार सा होता नहीं

    दूर हो कर भी मरासिम इस तरह ज़िंदा रहे

    मै इधर जागूँ अगर तो वो उधर सोता नहीं

    क्या बात है ! कमाल !! कमाल !!!

    राहुल सिंह said:
    मार्च 6, 2011 को 5:12 अपराह्न

    सच्‍ची चाहत.

    प्रवीण पाण्डेय said:
    मार्च 6, 2011 को 6:26 अपराह्न

    अन्दर से निकली कविता।

    MARKAND DAVE said:
    मार्च 6, 2011 को 6:59 अपराह्न

    आदरणीय श्रीपद्मसिंहजी,

    तुम हमें चाहो न चाहो हम तुम्हारे हैं सदा

    ये कोई सौदा नहीं है कोई समझौता नहीं

    अभिनंदन ।

    प्रेम में समर्पणभाव का ही आधिपत्य होता है।

    मार्कण्ड दवे

    सतीश सक्सेना said:
    मार्च 6, 2011 को 7:09 अपराह्न

    बहुत खूब …बेहतरीन भाव अभिव्यक्ति में आप सफल हैं पद्म सिंह ! हार्दिक शुभकामनायें !

    singhanita said:
    मार्च 6, 2011 को 7:43 अपराह्न

    दूर हो कर भी मरासिम इस तरह ज़िंदा रहे

    मै इधर जागूँ अगर तो वो उधर सोता नहीं

    तुम हमें चाहो न चाहो हम तुम्हारे हैं सदा

    ये कोई सौदा नहीं है कोई समझौता नहीं

    यू तो पूरी गज़ल ही अच्छी है पर ये शेर दिल मे उतरते महसूस होते है …………

    समीर लाल said:
    मार्च 6, 2011 को 8:00 अपराह्न

    दूर हो कर भी मरासिम इस तरह ज़िंदा रहे
    मै इधर जागूँ अगर तो वो उधर सोता नहीं

    -वाह!! पद्म भाई..क्या बात है..छा गये आप तो!!

    Shivam Misra said:
    मार्च 6, 2011 को 8:38 अपराह्न

    बेहद उम्दा नज़्म … बधाइयाँ !

    राजीव तनेजा said:
    मार्च 6, 2011 को 11:47 अपराह्न

    “दूर हो कर भी मरासिम इस तरह ज़िंदा रहे
    मै इधर जागूँ अगर तो वो उधर सोता नहीं”…
    बहुत बढ़िया…एक दो शब्द मुश्किल लगे…जैसे.. हस्सास वगैरा…
    निवेदन है कि कठिन शब्दों के अर्थ भी साथ ही दे दिया करें तो मुझ जैसे कईयों को लाभ होगा

    Manju Mishra said:
    मार्च 7, 2011 को 1:42 पूर्वाह्न

    पद्म जी बहुत दिनों के बाद आपकी ग़ज़ल पढ़ने को मिली. बहुत सुन्दर ग़ज़ल ! भाव और तरन्नुम… दोनों ही लाजवाब !! यह पढ़ कर बहुत पहले पढ़ी हुयी एक नज़्म याद आ गयी… “तेरे प्यार का कुछ ऐसा असर हो मुझ पर, तेरी पलकों का आँसू मेरी आँखों से उठाया जाये, मै रहूँ भूखा तो तुझसे भी न खाया जाये”

      padmsingh responded:
      मार्च 7, 2011 को 7:54 पूर्वाह्न

      बहुत बहुत आभार आपका …. यह ब्लॉग मैंने अपनी रचनात्मकता को निखारने और कुछ नया सीखने के मकसद से ही बनाया था… फिर इसी नज़रिये से यहाँ सक्रिय होना चाहता हूँ

    रवि कुमार said:
    मार्च 7, 2011 को 8:18 अपराह्न
    Sumit Pratap Singh said:
    मार्च 10, 2011 को 10:21 पूर्वाह्न

    पद्म जी अच्छी रचना के संग फोटो भी मर्यादित हो तो क्या बात हो….

    राजीव नन्दन द्विवेदी said:
    मार्च 14, 2011 को 4:07 पूर्वाह्न

    तुम हमें चाहो न चाहो हम तुम्हारे हैं सदा
    हम तुम्हारे हैं सदा, हमको लुभाए ये अदा.
    राम जी को भूल आया, भूल बैठा वो गदा.
    .
    .
    ये तिकुनिया कैसी लगी, पदम भाई. ;-P

    mridula pradhan said:
    मार्च 14, 2011 को 12:39 अपराह्न

    इश्क हो तो खुद-ब-खुद हस्सास लगती है फिजाँ
    कोई दरिया, पेड़, बादल चाँदनी बोता नहीं
    wah….behad khoobsurat….

    krjoshi said:
    मार्च 26, 2011 को 11:10 अपराह्न

    अन्दर से निकली कविता।

    रघु said:
    मार्च 30, 2011 को 11:45 अपराह्न

    पद्म जी ,
    प्रणाम !
    कहाँ से और कैसे इतने सुन्दर भाव उतरते हैं आपके पास …
    बहुत खूब .

    Dr.Danda Lakhnavi said:
    अप्रैल 4, 2011 को 7:51 अपराह्न

    बीज बोना ही न काफी परवरिश भी चाहिए,
    क्या उगेगी फासलें उसमें खेत गर जोता नहीं।
    ——————————————
    बेहतरीन अंदाजे बयां के लिए -बधाई।
    शायद इसीलिए किसी शाइर ने कहा है-
    “जुस्तजू हो तो सफ़र ख़त्म कहाँ होता है।
    यूँ ही हर मोड़ पे मंजिल क गुमाँ होता है॥”
    ==========================
    सद्भावी -डॉ० डंडा लखनवी

    harcharan singh bhatia said:
    मई 20, 2012 को 10:08 पूर्वाह्न
    jagmer sharma said:
    जून 4, 2012 को 1:03 अपराह्न

    kaas hum bhi is gajal ki umar ke hote. bahut achhi gajalm hai

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