मंजन घिसते हैं पिया, मुन्नी है बदनाम …

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मनमोहन मजबूर हैं गठबंधन सरकार

मंहगाई की मांग पर फैला भ्रष्टाचार

फैला भ्रष्टाचार, करें जनता का दोहन

गठबंधन के मारे बेचारे मनमोहन

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जमा विदेशी बैंक मे नेताओं की लाज

इसी फेर मे सब पड़े कौन खुजाये खाज

कौन खुजाये खाज राज खोलें भी कैसे

भारी तिजोरी लूट पाट कर जैसे तैसे

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हींग लगे ना फिटकरी जमे अनोखा रंग

राजनीति के मज़े हम देख रह गए दंग

राज नीति के मज़े, मज़े की  बाबा गीरी

भोली जनता के धन से भर रहे तिजोरी

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जिसकी जितनी चाकरी उसकी उतनी धार

मैडम के दरबार मे चमचों की भरमार

किसे पता किस्मत वाले ताले खुल जावें   

मजबूरी मे कब प्रधान मंत्री बन जावें

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कलमाड़ी मायूस हैं, राजा से गए हार

अवसर था बेहद बड़ा छोटी पड़ गयी मार

छोटी पड़ गयी मार, प्रभू फिर दे दो मौका

फिर से देखो कलमाड़ी का छक्का चौका

—————————————

राजनीति का राज है लूट सके तो लूट

हाथ मसल पछताएगा, कुर्सी जाये छूट

जल्दी जल्दी लूट इसी कुर्सी के बूते

वरना जनता आती है ले ले कर जूते

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होली का आगाज है, मन मे भरी उमंग

पर मंहगाई देख कर, जनता रह गयी दंग

जैसे आनन फानन मे, प्याज उगाई यार

फिर से कुछ जादू करो, प्यारे शरद पवार

————————————–

दुष्ट मनचले पा गए  हैं  जैसे बरदान

फैली जब से खबर है शीला हुई जवान

शीला हुई जवान,  नयी    पीढ़ी बौराई  

मंजन घिसते हैं पिया, मुन्नी है  बदनाम

 

 

 

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12 thoughts on “मंजन घिसते हैं पिया, मुन्नी है बदनाम …

    समीर लाल said:
    फ़रवरी 28, 2011 को 8:58 पूर्वाह्न

    दुष्ट मनचले पा गए हैं जैसे बरदान
    फैली जब से खबर है शीला हुई जवान
    शीला हुई जवान, नयी पीढ़ी बौराई
    मंजन घिसते हैं पिया, मुन्नी है बदनाम

    ) 🙂 ०)

    ललित शर्मा said:
    फ़रवरी 28, 2011 को 9:16 पूर्वाह्न

    जिसकी जितनी चाकरी उसकी उतनी धार
    मैडम के दरबार मे चमचों की भरमार
    किसे पता किस्मत वाले ताले खुल जावें
    मजबूरी मे कब प्रधान मंत्री बन जावें

    मैडम को सलाम

    अन्तर सोहिल said:
    फ़रवरी 28, 2011 को 9:20 पूर्वाह्न

    जिसकी जितनी चाकरी, उतनी उसकी धार

    बेहतरीन पंक्तियां

    प्रणाम स्वीकार करें

    प्रवीण पाण्डेय said:
    फ़रवरी 28, 2011 को 2:31 अपराह्न

    न जाने क्या होगा देश को।

    digamber said:
    मार्च 1, 2011 को 2:30 अपराह्न

    आज तो नेताओं की क्लास ले ली आपने पद्म जी … मज़ा आ गया सभी कुंडलियाँ लाजवाब हैं ….

    naresh singh rathore said:
    मार्च 2, 2011 को 7:47 अपराह्न

    आपके कवित्व वाले हुनर से भी रूबरू हो गए है | बहुत बढ़िया लिखा है |

    Pratibha Saksena said:
    मार्च 3, 2011 को 10:49 पूर्वाह्न

    बहुत नुकीले चौपदे करते तीखी मार
    (पर) बेशर्मो. की खाल है मोटी , कहाँ मिलेगा पार !

    Sumit Pratap Singh said:
    मार्च 5, 2011 को 10:36 पूर्वाह्न

    Padm ji I read ur poems/ Dohe
    these were nice…

    krjoshi said:
    मार्च 5, 2011 को 9:50 अपराह्न

    सभी कुंडलियाँ लाजवाब हैं| धन्यवाद|

    jai kumar jha said:
    मार्च 6, 2011 को 8:31 पूर्वाह्न

    वाह पद्म सिंह जी शानदार अभिव्यक्ति……धन्यवाद आपका corruption fighter टीम में शामिल होने के लिए……5 अप्रेल 2011 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर अन्ना हजारे जी के समर्थन में जरूर आयें साथ में अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को भी प्रेरित करें …ज्यादा जानकारी इस लिंक पर है….http://corruption-fighters.blogspot.com/2011/02/78-5-2011.html

    sanjay said:
    मार्च 6, 2011 को 12:57 अपराह्न

    सारी कुंडलियाँ एकदम टनाटन,
    कलमाड़ी वाली तो, दे दनादन:)

    राजीव नन्दन द्विवेदी said:
    मार्च 14, 2011 को 4:03 पूर्वाह्न

    जिसकी जितनी चाकरी, उतनी उसकी धार……….
    यही सोच कर आये हैं कि हो जाए उद्धार.
    हो जाए उद्धार, ब्लॉगिरी छूटे कैसे.
    फिर से लग गया नेट, आ गए हैं कुछ पैसे.

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