हे प्रभु इस शहर को ये क्या हो गया है ?

प्रभू ….

अब से पहले शहर की ये हालत न थी,,,, आज क्या हो गया…. आज क्या हो गया…

ये गाजियाबाद शहर को हो क्या गया है…  मैंने तो खुद को चिकोटी काट कर देखता हूँ कि कहीं ये सपना तो नहीं है? जो अधिकारी अपने ए सी रूम्स मे आराम कुर्सी पर बैठे विभागीय फोन पर बतियाया करते थे एक हफ्ते से  काम के आगे दिन रात नहीं देख रहे हैं। सरकारी मैडमें सब्जी खरीदने के लिए रिक्शे का इस्तेमाल कर रही हैं। सरकारी बाबू छुट्टियों और इतवार के दिन भी नहा धो कर सुबह से अपनी कुर्सी पर विराजमान हैं। पिछले तीन दिन  से रोगाणुओं कीटाणुओं की शामत आ गयी है। लगातार रात दिन एक कर के उनके आशियाने उजाड़े जा रहे हैं। सुवरों को उनके  क्रीड़ास्थल से बेदखल किया जा रहा है।

पिछले पाँच सालों से अंतर्ध्यान अवस्था मे कार्य करने वाले सफाई कर्मचारी और मोटी ताज़ी जमादारिनें मुंह पर कपड़ा बांधे झुंड के झुंड  इधर से उधर घूमते नज़र आने लगे हैं। वो कहते हैं न … घूरे के भी दिन लौटते हैं… पुराने और उपेक्षित पड़े सड़े गले कूड़ेदानों को रंग पोत कर ताज़ा दम कर दिया गया है । जिस गली मे पिछले चार साल से कीचड़ के ग्लेशियर पसरे रहते  थे आज उनपर टाइल्स अपनी चमक बिखेर रही है। रातों रात सड़कों पर टनों चूना ऐसे बिखेरा गया है कि मच्छरों का जीना दूभर हो गया है। सारे डिवाइडर रंगे पुते नज़र आ रहे हैं। चौराहों पर स्वागत पोस्टर पर मुस्कुराते हुए तमाम छुट्भइए नेताओं की चेहरे नज़र आने लगे हैं।

कल ही आटो वाला पुलिस वाले को बोल रहा था … अगली चक्कर मे दूंगा …और मुस्कुराता हुआ निकल लिया … इस पर पुलिस वाला बोला … बेटा तीन चक्कर यही बोल चुके हो… परसों हम भी देखेंगे बेटा…

अधिकारियों के फोन उनके कानों से परमानेंट चिपक गए लगते हैं। कुछ एक तो दस्त की दवा लेते भी नज़र आए… रात मे जनरेटर की रोशनी मे लेबर और उनके बच्चे रंगाई पुताई करने से (मुंह मांगी कीमत पर) हलाकान हुए जा रहे हैं।

जनता मुस्कुरा कर पूरे मज़े ले रही है…. कोई कह रहा था… बहन जी से फटती है इनकी🙂

 

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8 टिप्पणियाँ (+add yours?)

  1. राहुल सिंह
    फरवरी 20, 2011 @ 13:09:08

    नाम न रहे तो शायद हर शहर पर फिट बैठे.

    प्रतिक्रिया

  2. रवि कुमार
    फरवरी 20, 2011 @ 13:32:32

    बेहतर…

    प्रतिक्रिया

  3. ललित शर्मा
    फरवरी 20, 2011 @ 13:38:06

    ha ha ha ha ha

    Aise hi fat te rahe to kya kahne🙂

    प्रतिक्रिया

  4. aradhana
    फरवरी 20, 2011 @ 22:52:03

    सब माया है🙂

    प्रतिक्रिया

  5. krjoshi
    फरवरी 21, 2011 @ 07:25:40

    सब माया का खेल है|

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  6. सतीश सक्सेना
    फरवरी 23, 2011 @ 22:45:40

    शुभकामनायें आपके शहर को !🙂

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  7. प्रवीण पाण्डेय
    फरवरी 24, 2011 @ 06:38:21

    हर जगह ही यही चुस्ती है।

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  8. हमारीवाणी ई-पत्रिका
    फरवरी 25, 2011 @ 15:19:53

    आपकी पोस्ट “आज़ाद पुलिस की संघर्ष गाथा” की चर्चा “हमारीवाणी ई-पत्रिका” में की गई है.

    http://news.hamarivani.com/archives/965

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