ताऊ की "तपस्या" और भतीजे की चुटकी …

भक्त जनों !!images (1)

आज बसंत पंचमी का पर्व है … शुभकामनायें क्या दूँ… देने को होता तो खुद ही ले लेते… चलिये नमस्ते ले लीजये… आज छुट्टी है… मौसम गरम हो रहा है…  आवारगी का सबसे अच्छा मौसम यही है ….  दिन मे नींद खूब आती है इन दिनों… कोई खास  काम भी नहीं है … सन्नाटा है… फिर भी नहा धो कर तैयार हैं….लेकिन मन सूना सा हो रहा है…और ताऊ को पढ़ रहे हैं।,, मन बैरागी है और मुस्क्यान भी बिखेर  रहे है,,,  देखये कुछ ऐसे-

मुख प्रसन्न मन खुंदक ऐसे

बिना टिप्पणी ब्लागर जैसे ….

…..हाँ तो ब्लॉग ब्लॉग  टहलते टहलते  जब हम ताऊयांग आश्रम मे पहुँचते हैं… तो देखते क्या हैं… कि ताऊ आजकल "तपस्या" मे गहन रूप से लीन हैं… इसी लीनियारिटी मे ताऊ ने हम ब्लागरन के कष्टों को दूर करने हितार्थ कृपा वर्षण करते हुए चंद छंद उवाचे….  छंदों की वैचारिक शृंखला ऐसी जुड़ी कि मन मे उमड़ घुमड़ वैचारिक बदरिया घिर आई और लगा आज जवाबी क़ौवाली की तर्ज़ पर जवाबी छन्द छेड़ा जाये… ताऊ से अनुरोध हुआ और अनुमति भी मिली… तुरत फुरत कार्य प्रगति पर…. और दिल्ली मेट्रो की स्पीड से कार्य पूरा … अब ताऊ की तपस्या देख कर अपन का  वैराग्य भी ज़ोर मारे तो हम क्या करें… लीजिये एक तरफ ताऊ की तपस्या से उपजे वाचनामृत और एक तरफ भतीजे की चुटकी —

ताऊ के वाचनामृत भतीजे की चुटकी

या टिप्पणी दो रोज की, मत कर या सो हेत 
ब्लाग लिखिये नियम से, जो पूरन सुख हेत

बिना टिप्पणी ब्लॉग है जैसे बंजर खेत

लिखे बहुत टीपे नहीं, तो कोई भाव न देत

ब्लाग की सेवा करो, सदा बढावो ज्ञान
सब फ़ंदों को छोरिके, ताऊ का धरो ध्यान

ब्लागर मीटिंग मे रहो, सदा बघारो ज्ञान

मठाधीश कोई भजो,     तभी बढ़ेगा नाम

मारीच गरजै, सुर्पणखां दमकै, बेनामी बरसैं आय
चहूं दिश फ़ैले गंदगी, ब्लागों पर मोडरेशन लगि जाय

सूर्पनखा चहके कहीं,       या नाचे मारीच

सज्जन सज्जन ही रहे, रहे नीच तो नीच

टिप्पणी तो निज पास है मूरख ढूंढे कहीं और
आपन की बोर्ड चलाइये, चाहे जितनी मोर

मेहनतकाश मोती चुगे, चमचा मांगे भीख

ब्लागर बाबा कह गए, ले लो बेटा सीख

टिप्पणी ना बाड़ी उपजे, ना कहीं हाट बिकाय
ये तो निज के की बोर्ड से, चाहे जितनी लै जाय

आपहिं करिए टिप्पणी, आपहिं लिखिए ब्लॉग

लगा मोडरेशन रखो,      ब्लॉग रहे बेदाग

ब्लागर तो लिख लिख मरा, मिटा ना ब्लाग का फेर
चूस चूस कर टिप्पणी, इच्छा मिटी ना केर

ब्लागिंग मे बौराय के, कितने फंसे सुजान

बीवी से कहते फिरें, इक टिप्पा दे दो जान

ब्लागर बड़े परमारथी, टिप्पणी जो बरसै आय
इच्छा पूरी करे और की, अपनो की बोर्ड चलाय

ब्लागर ऐसा चाहिए,     जैसा सूप सुभाय

अच्छे टिप्पे गहि रहै,    रद्दी देय उड़ाय

चेला सज्जन मठाधीष चतुर, टुटी जुड़ै सौ बार
इक दूजे को गारी बके, थमै ना जूतमपैजार

मठाधीश है चतुर तो, चेला भी कम नाय

गारी बकि, लरि झगरि के, दूना नाम कामाय

जिहिं ब्लागर टिप्पणी न करे, ये ब्लाग की सेवा नाहिं
ते ब्लाग मरघट सारखे, बेनामी बसै तिन माहिं

बेनामी ना आय तो,     नाम कहाँ से होय

चर्चा मे तबहीं रहे, जब जुत्तम जुत्ता होय

मठाधीष संग ना कीजिए, सुर्पणखां ब्लाग ना तिराइ
बेनामी, अनामी, मारीच की, एक टिप्पणी विष भाई

सूर्पनखा, मारीच सब,   चर्चा मे ले आँय बेनामी की कृपा से, जग प्रसिद्ध होई जाँय  

बेनामी सबहुँ निन्दिए, जो बगल में छुपा होय
कबहुँ आय गारी लिखै, ब्लाग बंद करनो पडि जाय

बेनामी पर दया कर,        वो भी है इंसान

पिछवाड़े मे दम होता, तो क्यों रहता बेनाम

टिप्पणी एक अमोल है, जो कोइ करतो जाय
सोच समझि सब ठोक के, तब की बोर्ड चलाय

आह, वाह, दिल छू गया, अरे गज़ब, क्या खूब

इत्ते से यदि काम हो,तो क्यों गहरे मे डूब

ऐसी टिप्पणी किजिये, ब्लागर को हिम्मत बंधाय
औरन को प्रेरित करे, खुद की भी वाह वाह हुई जाय

टीपो यूँ ब्लॉगर बेचारा, चिंता मे परि जाय

वो बेचारा कुढ़ि मरे, अपन धाक जमि जाय

बेनामी नियरे राखिये, ब्लाग पर टिप्पणी करवाय
बिन मेहनत लिखे बिना, नाम प्रसिद्ध हो जाय

निंदक की निंदा सुनो, सूर्पनखा की राय

ना जाने किस रूप, कहाँ नाम होई जाय

मधु चूसे मीठा लगे, भंवरा उडि उडि जाय
चूसकर जो छांडि दे, भव सागर तरि जाय

मधु चूसो मधु चुसाओ, अद्धा पौवा लाय

भँवरा बनि उड़ते फिरो, यही हमारी राय…

(नोट-ज़्यादा शराफत वाली पोस्टें न  लिखें बेनामी भूखों मर जाते हैं🙂

और अंततः….

ब्लॉग देख कर ना लगे,      लफ़्फ़ाज़ी का ढेर

कम लेकिन सार्थक लिखो, तान ज्ञान की टेर

……. पद्म सिंह

(चित्र गूगल से साभार)

19 टिप्पणियाँ (+add yours?)

  1. sanjay jha
    फरवरी 08, 2011 @ 16:09:54

    Tauji ke tapasya pe bhatije ke akhet……mast…bamchak hai…..

    sadar

    प्रतिक्रिया

  2. Shivam Misra
    फरवरी 08, 2011 @ 16:38:32

    सत्य वचन महाराज … अब तक कहाँ लीन रहे प्रभु !?

    प्रतिक्रिया

  3. प्रवीण पाण्डेय
    फरवरी 08, 2011 @ 18:51:09

    भैया, भतीजा भारी पड़ गये।

    प्रतिक्रिया

  4. sawai singh rajpurohit
    फरवरी 08, 2011 @ 19:51:04

    very nice

    प्रतिक्रिया

  5. कुमार राधारमण
    फरवरी 08, 2011 @ 20:10:33

    सवाल और जवाब दोनों टक्कर के। यद्यपि इस विषय पर आए दिन पोस्टें दिखती ही रहती हैं,निश्चय ही,यह पोस्ट स्वयं में पूर्ण और सभी प्रश्नोत्तरों को समेटे हुए है। व्यंग्यात्मकता के कारण सामग्री अधिक पठनीय तो हुई ही है,मार भी एकदम भीतर जाकर करती है। मेरे पढ़े सर्वोत्तम ब्लॉग पोस्टों में से एक।

    प्रतिक्रिया

  6. अविनाश वाचस्‍पति
    फरवरी 08, 2011 @ 22:22:50

    कुछ गांठें बांध ली हैं
    कुछ ली हैं खोल
    टिप्‍पणी लिखना शुरू कर दिया
    जिसमें खोलना चाहते हैं पोल

    पंचमी की पीली पीली शभकामनायें

    प्रतिक्रिया

  7. ललित शर्मा
    फरवरी 09, 2011 @ 07:55:39

    उपनिषद लिख दिए, गुरु-चेला यानी चचा-भतीज संवाद आनंद दायक रहा। इस पोस्ट को नए ब्लॉगर के ज्ञानरंजन एवं ज्ञान वर्धन के लिए सुरक्षित किया जाना चाहिए। नवीन ब्लागर एक बार यहाँ दर्शनार्थ एवं ज्ञानार्थ अवश्य भ्रमण करे।

    प्रतिक्रिया

  8. राहुल सिंह
    फरवरी 09, 2011 @ 08:10:30

    वसंत पंचमी पर नीति आचरण के ताजे पाठ सहित पुण्‍य-लाभ, एक होली भी आज ही मन गई.

    प्रतिक्रिया

  9. संगीता पुरी
    फरवरी 09, 2011 @ 08:39:58

    बहुत सशक्‍त रही भतीजे की चुटकी !!

    प्रतिक्रिया

  10. वाणी गीत
    फरवरी 09, 2011 @ 09:28:46

    भतीजा सवाया ही रहा … !

    प्रतिक्रिया

  11. ताऊ रामपुरिया
    फरवरी 09, 2011 @ 16:23:52

    अति आनंद दायक प्रतिउत्तर दिये हैं, लगता है बसंत के आगमन के साथ ही होली शुरू हो गई है. बहुत शुभकामनाएं.

    प्रतिक्रिया

  12. Sushil Bakliwal
    फरवरी 09, 2011 @ 16:44:04

    दू पे दू. वाह…

    प्रतिक्रिया

  13. bhairawi
    फरवरी 09, 2011 @ 20:22:54

    kya mast likha hai ….maza aa gaya

    प्रतिक्रिया

  14. arvind mishra
    फरवरी 10, 2011 @ 21:52:35

    क्या बात है भतीजे ताऊ का कान काट लियो ..
    जियो शेर ,जिंदाबाद!🙂
    ताऊ करते भये टिप्पणी चालीसा की शुरुआत
    सोने में सुगंध की भतीजे ने दे दी सौगात

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  15. shikha varshney
    फरवरी 10, 2011 @ 22:30:40

    भतीजा सवा सेर निकला🙂

    प्रतिक्रिया

  16. girish billore
    फरवरी 10, 2011 @ 22:39:20

    भिया जी खूबई अच्छो

    प्रतिक्रिया

  17. Zakir Ai Rajnish
    फरवरी 11, 2011 @ 11:48:38

    प्रतिक्रिया

  18. विनोद पाराशर
    फरवरी 11, 2011 @ 23:09:31

    व्यंग्यात्मक शॆली में-दोहो के माध्यम से ब्लागिंग पर अच्छी टीका-टिप्पणी की हॆ.अति-सुंदर पदम जी.

    प्रतिक्रिया

  19. naresh singh rathore
    फरवरी 13, 2011 @ 12:17:57

    मजा आ गया |

    प्रतिक्रिया

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