अरे भाई नेता होना कोई बच्चों का खेल है…??

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आखिर कोर्ट की (खमखा) दखलंदाज़ी से पूर्व संचार मंत्री घोटाले के “राजा”  को(सानुरोध, सविनय) गिरफ्तार कर लिया गया है। खबर है कि इस के लिए करुणानिधि की खुशामद कुछ यूँ करनी पड़ी है यूपीए सरकार को…

तुम्हारा साथ  हमें यूँ बड़ा सुहाना लगे….

मै एक मंत्री पकड़ लूँ अगर बुरा न लगे

जहाँ सीबीआई राजा और उनके सचिव के खिलाफ पर्याप्त सुबूत इकट्ठा करने का दम भर रही है वहीं डीएमके राजा को बचाने मे लगी हुई है।  जब तक दोष साबित(जो होगा नहीं) नहीं हो जाता,… मामला कोर्ट मे रहता है…हमारी बेशर्मी खतम होने वाली नहीं हैं।

मंहगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चारों ओर से दबाव झेल रही यूपीए सरकार की स्थिति कितनी दयनीय है…क्या ज़माना आ गया है… जनता है कि  अपनी चुनी हुई सरकार को खाने कमाने भी नहीं देती… भूखे रह कर कैसे और कब तक जनता की सेवा करेगी सरकार… लोग पीछे ही पड़ गए हैं, कभी  मंहगाई को ले कर… कभी भ्रष्टाचार को लेकर…. जैसे किसी को और कोई काम ही नहीं है…

प्याज मंहगी हुई तो उसका कारण शरद पवार(पावर?) जी ने विचारोपरांत जनता को अवगत कारवाया कि मौसम के कारण  फसल खराब हो गयी थी इस लिए प्याज अस्सी रुपये पहुँच गयी… अब कृषि मंत्री का काम फसल पर नज़र रखना थोड़े ही है। लोगों ने कयास लगाए कि छह महीने तक प्याज के दाम नीचे नहीं आने वाले( अगली फसल तक)।  लेकिन ज़्यादा हो हल्ला करने पर आनन फानन मे कृषि मंत्रालय द्वारा मौसम ठीक करवाया गया, फसल पैदा कारवाई गयी  तब कहीं जा कर कीमतें 25 रुपये तक आ गयी हैं…क्या क्या पापड़ बेलने पड़ते हैं नेता हो कर… अरे भाई नेता होना कोई  बच्चों का खेल है ??

कामन वेल्थ मे चालीस करोड़ का गुब्बारा पूरी दुनिया ने खूब मज़े ले ले कर देखा…  काम निकल गया तो सभी लगे आँख दिखाने सब के सब… ये कोई नहीं देखता कि कितने प्रयासों के बाद जा कर  भारत का नाम (अंदरूनी) खेलों के लिए पूरी दुनिया मे पहुँचा और (बद) नाम भी हुआ। वरना तो इतना नाम चाइना ओलंपिक का भी नहीं हुआ।

3757033538_fff4461cd4किसी को क्या मालूम कि मनचाही कंपनियों को ठेके देने मे कितने जुगाड़ लगाने पड़ते हैं। फर्जी कंपनियाँ बनवाना,  टेंडरों को पूल करवाना,  अंतिम समय पर टेंडर की तिथि बढ़ा देना, नेगोशिएशन के नाम पर पत्ती फिट करना, सात आठ गुने दामों पर टेण्डर पास करवाना, अपने खास लोगों का ध्यान रखना, और  कुर्सी पर भी  बने रहना  कोई  मज़ाक है? क्या इतना भी पता नहीं कि दरबार कोई भी हो “होत न आज्ञा बिन पैसा रे” का मंत्र हर जगह चलता है… । कोई यह क्यों नहीं समझता कि  मंत्री जी तो सबके हैं… उनके भी तो बच्चे हैं जिन्होने इत्ती बड़ी बड़ी कंपनियाँ खड़ी की हैं… चुनाव मे चंदे दिये हैं… होटलों मे नेता जी की “उत्तम व्यवस्थाओं” पर खर्चे किए हैं…  आम जनता का क्या है…आम जनता एक वोट के बदले पूरे देश को अपनी बपौती समझती है… ये तो वैसे ही हुआ जैसे मंदिर मे सवा रूपये का प्रसाद चढ़ा कर लखपति होने का वरदान मांगना। मुंह खोला और बोल दिया कि नेता और सरकार सब चोर है। अरे भाई नेता होना कोई बच्चों का खेल है??

आदर्श सोसाइटी को आज लोग घोटाले का नाम दे कर हो हल्ला कर रहे हैं। कोई पूछे उनसे विकास और समाजवाद का ऐसा उदाहरण मिलगा कहीं?  जरा सोचिए मुख्य मन्त्री से ले कर सेना के ब्रिगेडियर सहित तमाम तबकों और पदों के लोग एक साथ रहेंगे… भाईचारे की और क्या मिसाल होगी। पर्यावरण मंत्रालय की तंद्रा भी टूट गयी है आज। इतनी ऊंची इमारत बन गयी और किसी को पता भी नहीं चला… पता चल जाता तो ? तो क्या मुंबई का विकास रुक जाता… एक खूबसूरत इमारत बनने से रह जाती… अगर किसी की ज़रा सी लापरवाही से भारत का विकास हो रहा है तो “दाग अच्छे हैं न”?

आज किसी न्यूज़ चैनल पर भाजपा और कांग्रेस के दो भद्रजनों मे गरमागरम वार्ता चल रही थी… कांग्रेस का कहना था कि आपके यहाँ तो टीवी पर लाइव पैसा लेते हुए  पूरी जनता ने देखा था… लेकिन FIR नहीं दर्ज़ की गयी… हमने तो अपने कैबिनेट  मन्त्री को बंद कर के दिखाया है। इस पर बीजेपी का बयान आया कि हाँ वो तो हुआ था लेकिन एक लाख छिहत्तर हज़ार करोड़ रुपये जितना बड़ा घोटाला नहीं था वो…और जनता की नाराजगी भी तो हमने सही है? (यानी अब किलियर)  इस पर कांग्रेस वाले महानुभाव कहें लगे कि आप झूठ बोल रहे हैं… कपिल सिब्बल  ने कह दिया है कि मामला इतने रूपये का नहीं है। मतलब दोनों मामले को मानते हैं लेकिन घोटाले कितने के हुए इस  आँकड़े  को ले कर दोनों मे मतभेद है….

हमारे देश की जनता  रात गयी बात गयी की विचारधारा मानती  है। पहले किसी भी घोटाले के सामने आते ही हो हल्ला शुरू कर देती है… मीडिया भी चीखने चिल्लाने लगेगी… गिरफ्तारी होने तक सब कुछ सुर्खियों मे रहता है लेकिन उसके बाद ?… जमानत होते, केस चलते और अगले चुनाव आते आते सब कुछ भूल जाती है… आज तक इतने घोटाले हुए लेकिन किसी मन्त्री को सज़ा के तौर पर दो चार साल जेल मे सड़ते देखा है कभी? नही न? इसी लिए कि वो नेता हैं… और नेता होना कोई बच्चों का खेल नहीं  है।

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7 thoughts on “अरे भाई नेता होना कोई बच्चों का खेल है…??

    yogendra said:
    फ़रवरी 3, 2011 को 5:31 अपराह्न

    होत ना आज्ञा बिन पैसा रे 😀 😀 😀

    digamber said:
    फ़रवरी 3, 2011 को 6:18 अपराह्न

    बहुत जबरदस्त व्यंग है .. क्या धो धो कर चपत लगाईं है पदम् जी आपने …. वैसे तो ये राजनेता हैं ही इसी लायक … बहुत अछा लिखा है …

    satish saxena said:
    फ़रवरी 3, 2011 को 7:25 अपराह्न

    बेहतरीन और बिना पक्षपात के लिखा गया लेख ! शुभकामनायें !

    प्रवीण पाण्डेय said:
    फ़रवरी 3, 2011 को 9:04 अपराह्न

    राजा बेटा जेल में,
    मजा आ रहा खेल में।

    mahendra mishra said:
    फ़रवरी 4, 2011 को 4:35 अपराह्न

    जबरदस्त

    jai kumar jha said:
    फ़रवरी 5, 2011 को 11:53 पूर्वाह्न

    भाई रजा जैसा जेल तो सब जाना चाहता है, भ्रष्टाचार के इस हजारों करोड़ के लूट के खेल का अंत तब होगा जब ऐसे राजा और इसके सहयोगी उद्योगपतियों को सरे आम फांसी दी जाय और इनके नाम हर गली मुहल्लों में देश और समाज के गद्दार के रूप में लिखा जाय……

    gunendea kandnan said:
    मई 31, 2011 को 6:51 पूर्वाह्न

    janta ki kmai bahar khai ya jail me khayee hai to haram ki
    raja to raja hai praja se hi khayega inko goli do ya vote do
    ye janta ko sochna hoga apka prayas achha hai jari rakho

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