भ्रष्टाचार के खिलाफ जनयुद्ध

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लेकिन होता भूडोल, बवंडर उठते हैं,
जनता जब कोपाकुल हो भृकुटि चढाती है;
दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो,
सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।

P300111_13.25_[04]पूरे भारत मे लगभग साठ शहर… कोई राजनीतिक पार्टी के नेतृत्व के बिना…. आम आदमी के आह्वान पर…. आम आदमी का भ्रष्टाचार के खिलाफ जनयुद्ध….

30-01-2011, नयी दिल्ली के रामलीला मैदान मे शायद पहली बार बिना किसी राजनैतिक पार्टी के सहयोग अथवा आह्वान के बिना भ्रष्टाचार के विरुद्ध किरण बेदी,जस्टिस संतोष हेगड़े,प्रशांत भूषन,जे.एम .लिंगदोह,स्वामी अग्निवेश,अन्ना हजारे,आर्चविशप विन्सेंट एम. कोंसेसाओ तथा अरविन्द केजरीवाल सहित  तमाम  संगठनो, प्रबुद्धजनों, और आम इन्सानों को एक मंच पर अपार जनसमुदाय के रूप मे देख कर लगा कि आम नागरिकों का धैर्य टूट गया है…

जेएनयू और अन्य कालेजों की छात्राएं आज करोड़ो और अरबों के घोटाले सनसनीखेज खबर मात्र बन कर रह गए हैं… रोज़ नया घोटाला, रोज़ नई जांच… चारों तरफ भ्रष्टाचार व्याप्त है। आज जहां हर सरकारी दफ्तर मे हर रोज़ हर क्षण जनता के सम्मान का बलात्कार किया जाता है, रिश्वत मांगी जाती है, रिश्वत न देने पर गाली गलौच की जाती है, वहीं इन्हीं विभागों मे बैठे अधिकारियों, मंत्रियों और दलालों की साँठ गाँठ माफियाओं की जमातें फल फूल P300111_12.57_[01]रही हैं।  आज हम भ्रष्टाचार की शिकायत उसी विभाग के उच्च अधिकारियों से करते हैं जो उसी भ्रष्टाचार मे लिप्त हैं।  क्या हम यह मान लें कि आज सिस्टम इतना खोखला हो गया है कि उसे सुधारा जाना संभव नहीं है और चुपचाप जो हो रहा है उसे सहते रहें, या फिर यह सोच लें कि आज समय आ गया है जब आम इंसान आम नागरिक को अपनी लड़ाई खुद ही लड़नी पड़ेगी।

इससे अधिक माफिया राज का ज्वलंत उदाहरण क्या मिलेगा कि भ्रष्टाचार का विरोध करने पर अधिकारी  सोनवणे को ज़िंदा जला दिया जाता है…  बाद मे छापे भी पड़ते हैं और सैकड़ों तेल माफिया से जुड़े लोग पकड़े भी जाते हैं लेकिन उससे पहले सिस्टम के रखवाले कहाँ रहते हैं और क्या करते रहते हैं…कर्नाटक मे वेल्लारी मे खनन माफिया रेड्डी बंधुओ से  से वहाँ का शासन और प्रशासन घबराता है… यह एक प्रश्नचिन्ह है व्यवस्था पर। कार्यालयों मे काम करने वाले सामान्य कर्मचारी और पुलिस के सिपाही भ्रष्टाचार के नाम पर सबसे अधिक बदनाम किए जाते हैं, जब कि उच्च स्तरों पर भ्रष्टाचार का नंगा नाच होता है उसे जाँचों की आड़ मे छुपा दिया जाता है… कितने ऐसे घोटाले हैं पिछले दस सालों मे जिनमें जांच रिपोर्ट के आधार पर भ्रष्टाचारी को सजा दी गयी हो… राष्ट्र को हुए नुकसान की भरपाई की गयी हो… शायद एक भी उदाहरण खोजने से न मिले… चोरी की बात गले उतरती है लेकिन खुलेआम डकैती जैसी स्थिति आज की व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। यह स्थिति कमोबेश पूरे देश की है… किसी सरकार अथवा क्षेत्र मात्र की ही नहीं।

उच्च पदों पर बैठे हुए अफसर और राजनेताओं से माफियाओं की साँठ गाँठ दिन ब दिन उजागर होती रही है… अरबों खरबों की की काली कमाई विदेशी बैंकों मे भरी पड़ी है… जहां तहाँ विकास के नाम पर बहुमूल्य ज़मीनों को किसानों से छीन कर औने-पौने दामों पर कारपोरेट घरानों को दिये जा रहे हैं…निजीकरण के नाम पर महत्वपूर्ण विभागों को धनपशुओं का गुलाम बनाया जा रहा है…. घोटालों की तो कोई सीमा नहीं रह गयी है…एक से बड़े एक घोटाले करने की प्रतियोगिता हो रही हो जैसे… आखिर कब तक चलेगा ये सब….

नेतृत्व जब अपनी क्षमता खो दे तब जनता को इसकी बागडोर अपने हाथों मे लेनी ही होती है… हाँगकाँग मे 1970 के  दशक तक आज के भ्रष्टाचार के भारत से भी बदतर अवस्था में था जिससे आजिज़  आकर वहां के लोग सड़कों पर उतर आये और वहां (ICAC ) Independent Commission Against Corruption नामक स्वतंत्र संस्था का गठन हुआ और  एक साथ 180 में से 119 पुलिस अधिकारियों को नौकरी से निकाल दिया गया जिससे पूरी नौकरशाही में सन्देश गया की अब भ्रष्टाचार नहीं चलने वाला | नतीजा ये है की हांगकांग आज लगभग भ्रष्टाचार मुक्त देश है और ICAC पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बन चुका है….| आज मिस्र आदि देशों मे भी जनता शासन के खिलाफ एक जुट हो कर सड़कों पर है…

हद है ….हद है !!!

भ्रष्टाचार से निपटने के लिए सरकार द्वारा लाये जा रहे लोकपाल बिल भी पहले की जांच एजेंसियों जैसी लचर और सरकारी दखल से प्रभावित व्यवस्था  हैं जिसके आने से वर्तमान स्थिति मे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। आज ज़रूरी है एक व्यावहारिक, पारदर्शी और प्रभावशाली कानून की जो इन धनपशुओं और भ्रष्टाचारियों मे नकेल डाल  सके।

व्यवस्था से इतर एक व्यावहारिक और असरदार लोकपाल बिल की प्रस्तावना तैयार की गयी है  जिसके अंतर्गत केंद्र मे लोकपाल और राज्य मे लोकायुक्त सरकार के अधीन नहीं होंगे….. वर्तमान सरकार द्वारा लाई जा रही व्यवस्था और व्यावहारिक जन लोकपाल की व्यवस्थाओं के बीच का अंतर ऐसे समझा जा सकता है –

 

वर्तमान व्यवस्था    प्रस्तावित व्यवस्था
तमाम सबूतों के बाद भी कोई नेता या अफसर जेल नहीं जाता क्योकि एंटी-करप्शन ब्रांच (एसीबी) और सीबीआई सीधे सरकारों के अधीन आती हैं। किसी मामले मे जांच या मुकदमा शुरू करने से पहले इन्हें सरकार मे बैठे उन्हीं लोगों से इजाज़त लेनी पड़ती है जिनके खिलाफ जांच होती है

प्रस्तावित कानून के बाद केंद्र मे लोकपाल और राज्य मे लोकायुक्त सरकार के अधीन नहीं होंगे। ACB और सीबीआई का इनमे विलय कर दिया जाएगा। नेताओं या अफसरों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच और मुकदमों के लिए सरकार की इजाज़्त की आवश्यकता नहीं होगी। जांच अधिकतम एक साल मे पूरी कर ली जाएगी। यानी भ्रष्ट आदमी को जेल जाने मे ज़्यादा से ज़्यादा दो साल लगेंगे

तमाम सबूतों के बावजूद भ्रष्ट अधिकारी सरकारी नौकरी पर बने रहते हैं। उन्हें नौकरी से हटाने का काम केंद्रीय सतर्कता आयोग का है जो केवल केंद्र सरकार को सलाह दे सकती है। किसी भ्रष्ट आला अफसर को नौकरी से निकालने की उसकी सलाह कभी नहीं मनी जाती

प्रस्तावित लोकपाल और लोकायुक्तों मे ताकत होगी की वे भ्रष्ट लोगों को उनके पदों से हटा सकें केंद्रीय सतर्कता आयोग और राज्यों के विजिलेन्स विभागों का इनमे विलय कर दिया जाएगा।

आज भ्रष्ट जजों के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया जाता। क्योकि एक भ्रष्ट जज के खिलाफ केस दर्ज़ करने के लिए सीबीआई को प्रधान न्यायाधीश की इजाजत लेनी पड़ती है।

लोकपाल और लोकायुक्तों को किसी जज के खिलाफ जांच करने व मुकदमा चलाने के लिए किसी की इजाजत लेने की आवश्यकता नहीं होगी

आम आदमी कहाँ जाये? अगर आम आदमी भ्रष्टाचार उजागर करता है तो उसकी शिकायत कोई नहीं सुनता। उसे प्रताड़ित किया जाता है।

लोकपाल और लोकायुक्त किसी की शिकायत को खुली सुनवाई किए बिना खारिज नहीं कर सकेंगे आयोग भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेंगे
सीबीआई और विजिलेन्स विभागों के कामकाज गोपनीय रखे जाते हैं इसी कारण इनके अंदर भ्रष्टाचार व्याप्त है लोकपाल और लोलायुक्तों का कामकाज पूरी तरह पारदर्शी होगा किसी भी मामले की जांच के बाद सारे रिकार्ड जनता को उपलब्ध कराने होंगे। किसी भी कर्मचारी के खिलाफ शिकायत आने पर जांच और जुर्माना लगाने का काम अधिकतम दो माह मे पूरा करना होगा
कमजोर भ्रष्ट और राजनीति से प्रेरित लोग एंटीकरप्शन विभागों के मुखिया बनते हैं लोकपाल और लोकायुक्तों की नियुक्ति मे नेताओं की कोई भूमिका नहीं होगी। इनकी नियुक्ति पारदर्शी तरीके और जनता की भागीदारी से होगी।
सरकारी दफ्तरों मे लोगों को बेइज्जती झेलनी पड़ती है। उनसे रिश्वत मांगी जाती है। लोग ज़्यादा से ज़्यादा उच्च अधिकारियों से शिकायत कर सकते हैं लेकिन वे भी कुछ नहीं करते क्योकि उन्हें भी इसका हिस्सा मिलता है लोकपाल और लोकायुक्त किसी व्यक्ति का तय समय सीमा मे किसी भी विभाग मे कार्य न होने पर दोषी अधिकारियों पर 250/- प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगा सकेंगे जो शिकायतकरता को मुवाबजे के रूप मे मिलेंगे।
कानूनन भ्रष्ट व्यक्ति के पकड़े जाने पर भी उससे रिश्वतख़ोरी से कमाया पैसा वापस लेने का कोई प्राविधान नहीं है। भ्रष्टाचार से सरकार को हुई हानि का आंकलन कर दोषियों से वसूला जाएगा
भ्रष्टाचार के मामले मे 6 माह से लेकर 7 साल की जेल का प्राविधान है कम से कम पाँच साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा होनी चाहिए।

 

क्या आप तैयार हैं भ्रष्टाचार के विरुद्ध इस जनयुद्ध मे शामिल होने के लिए … या सिर्फ सरकारों और व्यवस्थाओं को कोसने भर से काम चल जाने वाला है…. ???  अगर तैयार हैं तो इस विषय पर लिखें… बोलें… और ठान लें कि बस…. बहुत हो गया ….

enough is enough !!!

संपर्क करें… भ्रष्टाचार के खिलाफ जनयुद्ध…

ए-119 कौशांबी, गाजियाबाद- 201010, उ0 प्र0

फोन- 9717460029

email- indiaagainstcorruption.2010@gmail.com    

www.indiaagainstcorruption.org 

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18 thoughts on “भ्रष्टाचार के खिलाफ जनयुद्ध

    jai kumar jha said:
    जनवरी 31, 2011 को 9:40 पूर्वाह्न

    शानदार जनयुद्ध पर शानदार प्रस्तुती……..अब वक्त आ गया है की धनपशुओं और शर्मनाक स्तर के भ्रष्ट मंत्रियों,सांसदों,विधायकों,अधिकारीयों तथा कुकर्मी उद्योगपतियों को इस देश व समाज के साथ गद्दारी करना और आम नागरिकों लूटना बंद करना होगा…..नहीं तो ये जनयुद्ध अहिंसा का रास्ता त्याग कर इनके साथ तुरंत न्याय करेगा और इनको इनके घर दफ्तर में घुसकर जूते से मारकर इनको इनके कर्तव्य सिखाकर इंसान बनाएगा……….अब इन धनपशुओं को तय करना है की ये सुधरेंगे या जूते खायेंगे………

      sanjay jha said:
      जनवरी 31, 2011 को 1:11 अपराह्न

      pahle wali baat ye pahle se hi nahi mante………aur doosri wali baat me inse poochne ki kouno jaroorat nahi hai………bass … pakro aur ragro………………

      pranam.

    zakir khan said:
    जनवरी 31, 2011 को 1:31 अपराह्न

    भ्रष्टाचार एक बीमारी कि तरह फेल रहा है ..इसे ख़त्म करना होगा वरना ये देश को ही ख़त्म कर देगा ………….

    अनाम said:
    जनवरी 31, 2011 को 3:56 अपराह्न

    यह विवरण और इस योजना के विविध पहलु मैं पहले ही पढ़ चूका था ..लेकिन आपने उन सबको यहाँ प्रस्तुत कर बहुत सराहनीय कार्य किया है …आपका आभार

    Kewal Ram said:
    जनवरी 31, 2011 को 3:57 अपराह्न

    यह विवरण और इस योजना के विविध पहलु मैं पहले ही पढ़ चूका था ..लेकिन आपने उन सबको यहाँ प्रस्तुत कर बहुत सराहनीय कार्य किया है …आपका आभार

    satish saxena said:
    जनवरी 31, 2011 को 5:19 अपराह्न

    बहुत बढ़िया सुझाव ! शुभकामनायें !!

    डॉ महेश सिन्हा said:
    जनवरी 31, 2011 को 7:18 अपराह्न

    यह ध्यान रखना जरूरी है की कहीं गलत लोग न घुस आयें इस आंदोलन में

    प्रवीण पाण्डेय said:
    जनवरी 31, 2011 को 9:07 अपराह्न

    लोकतन्त्र उफान पर है।

    aradhana said:
    जनवरी 31, 2011 को 11:40 अपराह्न

    बहुत ज़रूरी पोस्ट है. आपको धन्यवाद इस मुद्दे को यहाँ रखने के लिए.
    हमारे देश में सिविल सोसायटी उतनी सशक्त नहीं थी, जितनी कि पश्चिम के कुछ देशों में और स्केंडिनेवियाई देशों में है. लेकिन पिछले एक दशक में स्थिति में बहुत बदलाव आया है. लोग भ्रष्टाचार से तो ऊबे ही हैं, साथ ही वर्तमान राजनीतिक दलों के बेकार के मुद्दों से भी आजिज आ गए हैं. आज कोई भी पार्टी ऐसी नहीं बची है, जिस पर नागरिक विश्वास कर सकें. इसीलिये सिविल समाज के लोग आगे आ रहे हैं. सिविल समाज की यह विशेषता होती है कि यह किसी एक राजनीतिक दल या विचारधारा के आधार पर नहीं, बल्कि मुद्दों के आधार पर एक होता है. पिछले दिनों हम जेसिका कांड में नागरिकों और मीडिया की भूमिका को देख चुके हैं.
    यह संकेत अराजकता का नहीं, बल्कि जागरूकता का है. यह हमारे देश के लोकतंत्र की परिपक्वता का संकेत है.

    shivkumar said:
    फ़रवरी 1, 2011 को 8:57 पूर्वाह्न

    बहुत सुन्दर
    पहली बार आपके ब्लॉग पर आया हूँ आकर बहुत अच्छा लगा कभी समय मिले तो हमारे ब्लॉग//shiva12877.blogspot.com पर भी अपनी एक नज़र डालें

    Shivam Misra said:
    फ़रवरी 2, 2011 को 12:47 अपराह्न


    बेहतरीन पोस्ट लेखन के लिए बधाई !

    आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

    आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है – पधारें – ठन-ठन गोपाल – क्या हमारे सांसद इतने गरीब हैं – ब्लॉग 4 वार्ता – शिवम् मिश्रा

    gunendra kumar kanchan said:
    फ़रवरी 26, 2011 को 8:55 अपराह्न

    mujhe type theek se nahi aata kshama kare. bhrashtachar ke viruddh koi sanstha khari karne se ya kanoon ke banane se bhrashtachar per ankush nahi lag sakta .tv per prasarit bhrashtachar ke samachar me aise bhi samachar ho sakte hai jinme reporter se saathgaath nahi ho pati hai, lekin yadi koi grahanii vichar le sankalp kerle ki vo rishvat ka paisa ghar nahi aane degi, nischit aur sahi kamai pe guzar basar karke ,jeevan star santulit kerke bhrashtachar ki spradha me shamil nahi hogi.. to bhrashachar apne aap hi khatam ho jaayega. kintu kya matra shakti itni sashakt ho sakti hai.. maaya mamta aur mhatwkannksha pe vijay pana thoda kathin hota hai

    shyam bihari rai said:
    अप्रैल 21, 2011 को 11:08 अपराह्न

    gande logo ka khatma bahut jaruri hain.

    mahesh chndra varma said:
    अप्रैल 25, 2011 को 3:28 अपराह्न

    sarkari vyapar bhrashtachar
    *********************omsaiom **********************
    भारत वर्ष में नेता मतलब चोर,बेईमान और भ्रष्ट
    आम आदमी को लड़नी होगी भ्रष्टाचार से सीधी लड़ाई
    भ्रष्टाचार की सीधी लड़ाई आम आदमी को लड़नी होगी और इस सीधी लड़ाई में लाखो भारतीयों का कलेजा सरदार पटेल,भगतसिंह,सुखदेव,चंद्रशेखर आजाद,सुभाष चन्द्र बोस आदि…….जैसा चाहिए ,किन्तु आज जब भ्रष्ट भारत सरकार और राज्य सरकारों की महा भ्रष्ट पुलिस के डंडे और गोलिया चलती है तो ९९% लड़ाई लड़ने वाले चूहों की तरह भाग खड़े होते है और 1% ही श्री अन्ना हजारे की तरह मैदान में डटे रह पाते है | सुप्रीम कोर्ट ने भी हाथ खड़े कर दिए है की भ्रष्टाचार की लड़ाई लड़ने वालो की सुरक्षा के लिए देश में कोई क़ानून ही नहीं है| देश के भ्रष्ट नेताओं और मंत्रियो ने ऐसा कोई कानून बनाया ही नहीं, जिस प्रकार अंग्रेजो ने आजादी के लिए जान देने वालो के लिए कोई क़ानून नहीं बनाया था | मैंने सूना था की देश का क़ानून सर्वोपरि है किन्तु यहाँ तो देश के न्यायालय भी भ्रष्ट नेताओं की जमात पर निर्भर है , यही कारण है की हमारे देश में न्याय और क़ानून भ्रष्ट नेताओं,मंत्रियो और अमीरों की जेब में रखा रुपिया है वे जैसा चाहते है खर्च करते है | जँहा तक लोकपाल विधेयक का सवाल है वहा भी संसद और विधान सभा की तरह बहुमत भ्रष्ट नेताओं,मंत्रियो,संतरियो,अधिकारिओ और अमीरों का ही होना तय है अर्थात फैसला भ्रष्टाचार के पक्ष में ही होना है | आज निरा राडिया २ग़ स्पेक्ट्रुम घोटाले में शरद पवार की अहम् भूमिका बता रही है तो भी देश का कानून चुप है यही कानून जब किसी गरीब आम भारतीय को किसी शंका के आधार पर भी पकड़ता है भारतीय भ्रष्ट पुलिस गरीब भारतीय नीरा या शरद को पागल कुत्ते की तरह इतना दौड़ा कर मारती है की वह निर्दोष होकर भी पुलिस जैसा चाहती है वैसा अपराध कुबूल कर लेते है कई बार तो भरष्ट नेताओं,मंत्रियो,संतरियो, अधिकारिओ और अमीरों के अपराध भी गरीब भारतीयों के गले बांध दिए जाते है | इसलिए आदरणीय अन्ना का लोकपाल विधेयक फ़ैल होना तय है,क्योकि देश को लाखो सरदार पटेल,भगतसिंह,सुखदेव,चंद्रशेखर आजाद,सुभाष चन्द्र बोस चाहिए जो अंग्रेजो की तरह भ्रष्टाचारियो को काटकर भारत माता को बलि चड़ा दे | तभी भारत माता भ्रष्टाचारियो की गुलामी से आजाद हो सकती है| या…………
    भारत सरकार यदि इमानदारी से भरष्टाचार मुक्त भारत का निर्माण करना चाहती है तो देश से भ्रष्टाचार मिटाने का काम मुझे ठेके पर दे दे जैसे सारे सरकारी काम केंद्र और राज्य सरकारों ने ठेके पर दे रखे (जिनसे देश के भ्रष्ट नेताओं,मंत्रियो,संतरियो,अधिकारिओ,कर्मचारियो और काला बाजारी अमीरों को भरपूर कमीशन मिलता है | सरे हरराम्खोर ऐश कर रहे है और गरीब जनता भूखो मर रही है |) मै ६३ वर्षो के भ्रष्टाचार की कमाई को मात्र ७ वर्षो में वसूल करके सरकारी खजाने में जमा कर दूंगा और भ्रष्टाचार को जड़ मूल से उखाड़ फेकुंगा , मेरी भ्रष्टाचार निवारण की प्रक्रिया के बाद कोई भी नेता,मंत्री,संत्री,अधिकारी,कर्मचारी और कालाबजारी भ्रष्ट होने से पहले हजार बार सोचेगा |
    मुझे कुल वसूली का मात्र 0.०७% मेहनताना ही चाहिए |
    मई पिछले २५ वर्षो से देश के भ्रष्ट कर्णधारों को लिखता आ रहा हु की मुझे भ्रष्टाचार मुक्त भारत का काम ठेके पर दे दो ,मै ६३ वर्षो के भ्रष्टाचार की कमाई को मात्र ७ वर्षो में वसूल करके सरकारी खजाने में जमा कर दूंगा और भ्रष्टाचार को जड़ मूल से उखाड़ फेकुंगा| मेरे पत्रों को पड़कर देश के भ्रष्ट कर्णधारों को सांप सूंघ जाता है |
    “भ्रष्टाचार सामाजिक अन्याय का जन्म दाता है और सामाजिक अन्याय उग्रवाद और आतंकवाद का जन्म दाता है”
    मात्र-ज़न-लोकपाल विधेयक से ’भ्रष्टाचारमुक्त भारत’ क्या सम्भव है?
    नहीं क्योकि……………
    रामदेव Vs अण्णा = “भगवा” Vs “गाँधीटोपी सेकुलरिज़्म”?? इसतरह का हिसाब है लोक तंत्र के चौथे खम्बे का जबकि इस खम्बे पर भी देश की जनता को विश्वास नहीं रहा इस पर भी भ्रष्टाचार की लगी जंग जनता को स्पष्ट दिखाई दे रही है |जँहा तक सेकुलरिज़्म का सवाल है उसका गणित आम जनता की समझ से बाहर hai ……………..

    भ्रष्ट नेता+ भ्रष्ट मंत्री + भ्रष्ट संत्री + भ्रष्ट अधिकारी + भ्रष्ट सरकारी कर्मचारी +असामाजिक तत्त्व +आतंकवादी + पाशचात्य संस्कृति =”सेकुलरिज़्म”
    सेकुलरिज़्म के पाँच मुख्या गुण है …..१-चोरी २-चुगली ३-कलाली ४-दलाली ५-छिनाली
    वर्तमान में स्वयं को देश के कर्णधार समझाने वाले नेता इन पांचो गुणों से संपन्न है….. महेश चन्द्र वर्मा , प्रधान सम्पादक,
    सरकारी व्यापार भ्रष्टाचार ,
    साप्ताहिक समाचार पत्र, इंदौर म.प्र.

      gunendea kandnan said:
      मई 31, 2011 को 6:35 पूर्वाह्न

      anna hazare ke aandolan 85 lac Rs. collection 32 lac expend 53 profit
      jamin sarkari khane ki hartal bhrashtachar ka kamal log hai malamal bhrashtachar se money circulation to bana rahta hai lekin buri baat hai asa dhan videsh me kyo are kuchh hamare mandir me bus 3.5 lac de ker devi ka aashirvaad pao shishtachar nibhao recpt milegi

    vijay rao said:
    जून 4, 2011 को 5:13 अपराह्न

    एक नेता को शहीद की माँ पर झूठा तरस आया /प्रेस बुलाकर माँ को १० लाख का चेक थमाया /
    शहीद की माँ ने अपने दुखों की गठरी खोली /और दर्द भरे भारी मन से बोली/
    आप मुझसे १० नहीं २० लाख का चेक ले जाइये /और अपने बेटे को सेना भारती करवाइए /
    जिस दिन आपका बेटा शहीद हो जाएगा / उस दिन मेरा सर गर्व से ऊंचा हो जाएगा /
    आप जैसे नेता घडियाली आंसू बहाए / काम ऐसा नहीं किया करते /
    यहाँ से चले जाओ गद्दार नेता / हम शहीदों के कफ़न का सौदा नहीं करते
    खटमल मच्छर और राजनेता एक जैसा जीवन जीतें है/ये पुरे जीवन हमेशा आम आदमी का ही खून पीतें hain
    पदम् सिंह जी आपको शत-शत नमस्कार-नमन
    आज हमारा देश क्रांतीक काल और अग्रसर है वो दिन दूर नहीं जब नेताओं को जनता ज़िंदा जला कर मारेंगें

    sonam said:
    सितम्बर 13, 2011 को 2:03 अपराह्न

    ham 1 din jarur es bimari se jit jayenge

    gunendra kanchan said:
    नवम्बर 20, 2011 को 8:48 अपराह्न

    ab bhrashtachaar ke baad dushtachaar durachaar ke din aa rahe hain ,jaago jaago kahni sadaachaar lupt naa ho jaaye dusro ko nasihat dete dete hume thakna nahi hai.
    aao imandaari ki ore ek kadam to badhao padam ki tal se tal milao

    gunendra kanchan

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