तुम मुझे टीप देना सनम….टीपने तुमको आयेंगे हम

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तुम मुझे टीप देना सनम
टीपने तुमको आयेंगे हम 
ऐसे याराना चलता रहे
ब्लॉग की राह के हम कदम

एग्रीगेटर सजा  कर थके 0002
मेल सबको लगा कर पके
कोई झाँका नहीं इस तरफ
राह कोई कहाँ तक तके
हम भी चर्चा बना लें कोई
सारी मुश्किल समझ लो  खतम
तुम मुझे टीप देना सनम
टीपने तुमको आयेंगे हम

0008 कोई एसो सियेशन गढो 
कभी टंकी पे जाओ चढ़ो
अपनी गलती को मानो नहीं
दोष औरों के माथे मढ़ो
माडरेशन लगा कर रखो
हम भी देखेंगे किसमे है दम
तुम मुझे टीप देना सनम
टीपने तुमको आयेंगे हम 

कभी गूगल से फोटो चुरा 0007
कोई कंटेंट मारो खरा
हेरा फेरी  करो, चेप दो
कोई माने तो माने  बुरा
ब्लॉग अपना है जो मन करो
कोई दिल में न रखना भरम
तुम मुझे टीप देना सनम
टीपने तुमको आयेंगे हम 

रात दिन पोस्ट लिख लिख मरे 0019
टिप्पणी फिर भी मिलती नहीं
जब तलक टांग खींचो नहीं
भीड़ मजमे को मिलती नहीं
फूल से कुछ नहीं हो अगर
भीड़ में फोड़  दो आज बम  0055
तुम मुझे टीप देना सनम
टीपने तुमको आयेंगे हम

 

 

(जस्ट खुराफात …:) )बुक

………आपका पद्म

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15 thoughts on “तुम मुझे टीप देना सनम….टीपने तुमको आयेंगे हम

    महेश सिन्हा said:
    सितम्बर 15, 2010 को 11:51 अपराह्न
    प्रवीण पाण्डेय said:
    सितम्बर 15, 2010 को 11:55 अपराह्न

    दमदार कटाक्ष

    समीर लाल said:
    सितम्बर 16, 2010 को 5:20 पूर्वाह्न

    फूल से कुछ नहीं हो अगर
    भीड़ में फोड़ दो आज बम

    -सन्नाट..बहुत जबरदस्त!!

    sanjay said:
    सितम्बर 16, 2010 को 7:50 पूर्वाह्न

    खुराफ़ात मज़ेदार रही।

    चांदनी फ़िल्म का गाना याद आ रहा है
    ’तू मुझे सुना, मैं तुझे सुनाऊं’

    मस्त लिखा है आपने, बधाई।

    ali syed said:
    सितम्बर 16, 2010 को 8:27 पूर्वाह्न

    इस सौदागरी में आप भी तो शामिल नहीं 🙂

    [ इस टिप्पणी को भी जस्ट खुराफात मानिये ]

    इंदु पूरी गोस्वामी said:
    सितम्बर 16, 2010 को 9:35 पूर्वाह्न

    टिप्पणियों की निराली है दुनिया ये भाई
    तुमने टिपो मुझको तो तुमको ‘टिपाने’चली आई
    मैं पीठ खुजलाऊँ तो ही मेरी वो खुजाए अपनी तो ये बात समझ ही न आई
    ‘क्या खूब”वाह वाह’ और दिल को छू गया मेरे’ हर जगह एक ही इबारत लिखी मैंने पाई
    नही चाहिए मुझको तुम्हारी ये कार्यवाही,मैं भली मेरी रचना मेरी बेटी मेरी माई
    कमी है तो बतलाओ नही तो……..बाइ बाइ

    singhanita said:
    सितम्बर 16, 2010 को 10:52 पूर्वाह्न

    तुम मुझे टीप देना सनम
    टीपने तुमको आयेंगे हम

    हमने तो टीप दिया अब आप की बारी …………..:)

    बहुत अच्छी रचना ……दिल खुश हो गया

    aradhana said:
    सितम्बर 16, 2010 को 2:13 अपराह्न

    हम भी आ गए जी टीपने … बढ़िया व्यंग्य किया है टिप्पणी के लिए टीपने वालों पर…

    Shiv said:
    सितम्बर 16, 2010 को 2:15 अपराह्न

    बहुत गज़ब!!

    पढ़ी हमने औ दे दी टीप
    रहे जलता कमेन्ट का दीप
    पोस्ट हो मोती वाली सीप
    खरीदें कार औ चाहे जीप

    akhtar khan akela said:
    सितम्बर 16, 2010 को 8:49 अपराह्न

    jnaab blog or intrnet ke krtbon pr khub kvita bnayi he aapke is khubsurt hunrmndi ke liyen bdhaayi. akhtar khan akela kota rajsthan

    bhairawi said:
    सितम्बर 17, 2010 को 2:46 अपराह्न

    bilkul sahii kahaa ………..aapbhi khush mai bhi khush …….amal jaroor kariyegaa

    गिरीश बिल्लोरे said:
    सितम्बर 18, 2010 को 11:16 पूर्वाह्न

    पद्म भैया
    मज़ेदार है वाह वाह

    अविनाश वाचस्‍पति said:
    सितम्बर 21, 2010 को 6:47 पूर्वाह्न

    लीजिए हमारी टीप।
    टीपने तो पहले भी आए थे
    पर टीप नहीं पाए थे
    या हो सकता है
    बज में जाकर
    टीप आए हों।

    और यह इंदु जी पूरी कब से हो गईं। इन्‍हें तो पुरी होना चाहिए था। पूरी तो कचौड़ी के साथ लगता है। अरे भूल गया ये तो ऐसिच ही हैं न

    satish saxena said:
    अक्टूबर 10, 2010 को 9:22 अपराह्न

    एक एक शब्द ठीक कह रहे हो पद्मसिंह ! शुभकामनायें आपको !

    रघु said:
    नवम्बर 11, 2010 को 10:58 पूर्वाह्न

    पद्म जी मजा आ गया आज तो ,
    आपको पढकर …

    अहा
    रात दिन पोस्ट लिख लिख मरे
    टिप्पणी फिर भी मिलती नहीं

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