आप सबका बहुत बहुत आभार

ताउजी डाट काम पर वैशाख नंदन प्रतियोगिता में  श्रेष्ठ व्यंग्य लेखन के लिए वर्ष 2010 के कांस्य पदक हेतु चुनने के लिए आप  सब का  कोटिशः धन्यवाद और आभार ….

 

 

आपका पद्म – 9716973262

12 टिप्पणियाँ (+add yours?)

  1. indu puri
    सितम्बर 03, 2010 @ 00:45:38

    अरे वाह! बधाई.किस आर्टिकल के लिए मिला? यहाँ वो नही दिख रहा.
    मैं पढ़ना चाहती हूं.

    प्रतिक्रिया

  2. राजीव तनेजा
    सितम्बर 03, 2010 @ 01:23:04

    बहुत-बहुत बधाई

    प्रतिक्रिया

  3. girlsguidetosurvival
    सितम्बर 03, 2010 @ 05:51:03

    Badhai,

    Anand aa gaya aap ki rachna pad kar.

    Peace,
    Desi Girl

    प्रतिक्रिया

  4. ali syed
    सितम्बर 03, 2010 @ 08:40:41

    बधाईयां !

    प्रतिक्रिया

  5. रघु
    सितम्बर 03, 2010 @ 12:26:53

    श्रेष्ठ व्यंग्य लेखन के लिए कांस्य पदक…
    वाह ठाकुर साहब वाह .
    आपको तहे दिल से बधाई मेरी तरफ से …
    जस्ट अभी अभी आपको कॉल करके बधाई देना चाह पर आपने अपना मोबाइल उठाया ही नहीं शायद आप कहीं व्यस्त है या कार ड्राइविंग पे है …
    चलिए फिर से काल करूँगा …
    शुभकानाएं …

    प्रतिक्रिया

  6. रघु
    सितम्बर 03, 2010 @ 12:28:29

    श्रेष्ठ व्यंग्य लेखन के लिए कांस्य पदक…
    वाह ठाकुर साहब वाह .
    आपको तहे दिल से बधाई मेरी तरफ से …
    जस्ट अभी अभी आपको कॉल करके बधाई देना चाह पर आपने अपना मोबाइल उठाया ही नहीं शायद आप कहीं व्यस्त है या कार ड्राइविंग पे है …
    चलिए फिर से काल करूँगा …
    शुभकामनाएँ …

    प्रतिक्रिया

  7. sanjeev Pal
    सितम्बर 03, 2010 @ 17:57:50

    Bahut Bahut Badhaiyan……..

    प्रतिक्रिया

  8. Bhavana Kapoor
    सितम्बर 03, 2010 @ 18:00:36

    CONGRATULATION

    प्रतिक्रिया

  9. sanjay
    सितम्बर 03, 2010 @ 19:25:25

    अमां पार्टी शार्टी का वायदा करते, और मजा आता, कोरे आभार में टरका दिया:)

    बधाई हो बहुत बहुत।

    प्रतिक्रिया

  10. प्रवीण पाण्डेय
    सितम्बर 03, 2010 @ 23:07:31

    बहुत बहुत बधाई

    प्रतिक्रिया

  11. अविनाश वाचस्‍पति
    सितम्बर 03, 2010 @ 23:21:59

    इंदु पुरी जी, उस रचना के लिए मिला है कांस्‍य पदम जी को। जिस पर आपने यह टिप्‍पणी की थी :-

    ये पैसा मैल है हाथों का और हम हैं सफाईमंद
    तभी रब हाथ मैला हमारा होने नहीं देते…

    अरे बेटा … इतना हाथ साफ़ रखोगे तो बीवी घर से साफ़ कर देगी…. हा हा हा
    बहुत सुन्दर

    याद नहीं आया हो तो गुर बतलायेंगे। आप उसी रचना पर एक क्लिक में पहुंच जायेंगी।

    पदम जी को पदम श्री मिलने का मुझे इंतजार है।

    प्रतिक्रिया

  12. समीर लाल
    सितम्बर 04, 2010 @ 00:49:29

    बहुत बधाई.

    प्रतिक्रिया

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