मौसम का हुस्न ऐसा …

व्यस्तता वश कुछ लिख नहीं पा रहा हूँ आजकल … कहीं न कहीं जाना पड़ रहा है … ब्लॉग को अद्यतन करते हुए एक छोटी सी पेशकश रख रहा हूँ …. बरसात का मौसम है … अगर टूटी रोड और कीचड़ की तरफ़ न देख कर आकाश की ओर देखें तो बरसात बरसात का मौसम बहुत अच्छा लगता है …. सुनसान रोड पर कार ड्राइव करते हुए अगर पेड़ों की झुरमुटों से बादल और चाँद की आंखमिचौली दिखे तो फिर कहने ही क्या …

rain3

मौसम का  हुस्न ऐसा कि दीवाना बना दे 
बिन शमा, खयालात को परवाना बना दे

कजरारे, सलेटी, सफ़ेद बादलों के ख़म
शबनम की एक बूँद को मैखाना बना दे

तितलियाँ, फूल,ओस, नम हवा, नरम धनक

गुलशन सजा धजा के   परीखाना बना दे

हुस्ने नज़र से यूँ पिला के   होश ना रहे 
साकी मुझे मुझी  से अनजाना बना दे

बदली को कर सुराही, हवाओं को मैकदा 
धरती को आज लुत्फ़  का पैमाना बना दे 

—पद्म सिंह ९७१६९७३२६२

12 टिप्पणियाँ (+add yours?)

  1. mahendra mishra
    अगस्त 28, 2010 @ 16:56:41

    बारिश को लेकर बहुत बढ़िया रचना…

    प्रतिक्रिया

  2. ललित शर्मा
    अगस्त 28, 2010 @ 16:59:33

    चलते हैं खरामा-खराम मयखाने की ओर
    जहां मौजुद साकी मीना औ चंद मुंह जोर

    सप्ताहांत की शुभकामनाएं
    जनकपुरी की ओर हो आएं

    प्रतिक्रिया

  3. ali syed
    अगस्त 28, 2010 @ 17:00:10

    साकी से बहुत ज्यादा उम्मीदें पाल रहे हैं : )
    हमें पसंद आई आपकी रचना !

    प्रतिक्रिया

  4. Sanjeev Pal
    अगस्त 28, 2010 @ 17:22:08

    Bahut Bahut acchi likhi hai..

    प्रतिक्रिया

  5. समीर लाल
    अगस्त 28, 2010 @ 23:39:50

    बहुत सुन्दर!!

    प्रतिक्रिया

  6. रवि कुमार, रावतभाटा
    अगस्त 29, 2010 @ 10:44:59

    बेहतर…
    कार ड्राईव…और मयखाना….पैमाना….

    प्रतिक्रिया

  7. shankar dutt
    अगस्त 29, 2010 @ 12:01:24

    व्यस्तता के बाद भी इतनी सुन्दर रचना के लिए साधुवाद |

    प्रतिक्रिया

  8. Osho Rajneesh
    अगस्त 29, 2010 @ 18:11:53

    बदलो के दरमियाँ कुछ ऐसे साजिश हुई,
    मेरा घर मिटटी का था, मेरे घर ही बारिश हुई .

    अच्छी कविता है आपकी

    प्रतिक्रिया

  9. sanjay
    अगस्त 30, 2010 @ 01:09:28

    बहुत अच्छी गज़ल है जनाब

    सलाह भी बहुत शानदार है लेकिन लेकिन स्थिर अवस्था में, चलते हुये “अगर टूटी रोड और कीचड़ की तरफ़ न देख कर आकाश की ओर देखें तो” गड्डे में गिरना भी तय है:)

    शानदार पोस्ट लगी।

    प्रतिक्रिया

  10. sumit pratap singh
    अगस्त 30, 2010 @ 11:57:30

    सुन्दर प्रस्तुति…

    प्रतिक्रिया

  11. शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
    अगस्त 30, 2010 @ 23:10:06

    कजरारे, सलेटी, सफ़ेद बादलों के ख़म
    शबनम की एक बूँद को मैखाना बना दे
    वाह….
    हुस्ने नज़र से यूँ पिला के होश ना रहे
    साकी मुझे मुझी से अनजाना बना दे
    बहुत खूब…
    तग़ज़्ज़ुल में डूबे इन अश’आर के लिए मुबारकबाद.

    प्रतिक्रिया

  12. रघु
    सितम्बर 03, 2010 @ 12:39:12

    बरसात पर बहुत सुन्दर लिखा है आपने ..
    बधाई हो आपको इस सुन्दर रचना के लिए !!

    बारिश मे जमा पानी
    बारिश मे जमा पानी
    याद आयी बचपन की कहानी
    कागज़ की नाव बनाकर
    नाविक बन जायेंग़े
    हम नाव चलायेंगे

    प्रतिक्रिया

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