वंदे मातरम !

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वंदे मातरम !!
जय हिंद !!

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9 thoughts on “वंदे मातरम !

    ismat zaidi said:
    अगस्त 14, 2010 को 10:01 अपराह्न

    जय हिंद
    वंदे मातरम

    प्रवीण पाण्डेय said:
    अगस्त 14, 2010 को 10:24 अपराह्न

    जय हिंद

    jai kumar jha said:
    अगस्त 14, 2010 को 10:31 अपराह्न

    जय हिंद
    सत्यमेव जयते

    राजीव नन्दन द्विवेदी said:
    अगस्त 14, 2010 को 11:57 अपराह्न

    तेरा वैभव अमर रहे माँ,
    हम दिन चार रहें न रहें.
    वन्दे मातरम्
    भारतमाता की जय.
    आपको इस पावन और हम सबकी अस्मिता से जुड़े अत्यन्त ही पावन पर्व पर कोटि-कोटि बधाइयाँ.

    राजीव नन्दन द्विवेदी said:
    अगस्त 15, 2010 को 12:05 पूर्वाह्न

    पदम भाई ! मैं तो जड़मति हूँ. मुझे कुछ पता ही नहीं कि कैसे जन्मदिन मनाया जाता है, कैसे स्वतंत्रता-दिवस मनाते हैं, कैसे गणतंत्र-दिवस मनाते हैं.
    आप कुछ मनाइयेगा अवश्य और बताइयेगा कि कैसे आपने मनाया या कैसे मनाया जाता है.
    अरे, मुझ छोटे को कुछ संस्कार वगैरा दीजिये कि सब गठरी बान्ह के ले जायेंगे 😀
    मालिक ! रावण तक ने मरते-मरते सब उगल दिया था. फिर आप तो पदम भाई हैं, कुछ तो बताइयेगा. मात्र दो पंक्तियाँ पर्याप्त नहीं हैं !!
    ये स्वतंत्रता दिवस की हत्या के समान ही है.
    कुछ उगालिये. 😛

    राजीव नन्दन द्विवेदी said:
    अगस्त 15, 2010 को 12:06 पूर्वाह्न

    तेरे सीने में न सही मेरे सीने में ही सही
    इक भगत सिंह पलना ही चाहिये.

    ललित शर्मा said:
    अगस्त 15, 2010 को 5:59 पूर्वाह्न

    सांस का हर सुमन है वतन के लिए
    जिन्दगी एक हवन है वतन के लिए
    कह गई फ़ांसियों में फ़ंसी गरदने
    ये हमारा नमन है वतन के लिए

    स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

    शाहिद मिर्ज़ा शाहिद said:
    अगस्त 15, 2010 को 12:07 अपराह्न

    स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

    indu puri said:
    अगस्त 24, 2010 को 1:37 पूर्वाह्न

    लिखूँ? पब्लिक पीटेगी मिल कर. एक टीचर और ऐसी बातें???
    मेरा बस चले तो……..?????????
    समय की बर्बादी के ये जश्न खूब मना लिए हमने.बहुत हो गया.
    स्कूल्स,हर डिपार्टमेंट कितना समय और शक्ति बर्बाद करते हैं इन सब नाटक बाजियों में.
    काश आज़ादी का जश्न हमने आजादी का मूल्य समझ कर के उसके विकास और भ्रष्टाचार के विरुद्ध्,देश को पीछे धकेलने वाली विध्वंशकारी कार्यों को रोकने में अपने समय और शक्ति को करी होती. क्या लिखूँ? छोड़ो .
    बात पर राष्ट्रिय सम्पत्ति को नुक्सान पहुंचाते देखती हूं तो तन-बदन में आग लग जाती है.
    वोटों की इस गन्दी राजनीति में कुछ घंटे देश और आज़ादी को याद कर लेना ही कब तक पर्याप्त रहेगा.
    इसलिए कोई बधाई नही …….

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