ओ माँ……. (अजन्मा संवाद )

ओ माँ …..
पिता तो फिर पिता
तुमने भी न जाना
दर्द मेरा
रोशनी से पूर्व ही
विधि में लिखा मेरे अँधेरा
क्या नहीं मै,
प्यार का परिणाम
या बस वासना का
क्या नहीं फल एक माँ की
साधना का
बिम्ब हूँ
प्रतिरूप रूप तेरी कामना का
दीप हूँ मै
भक्ति का आराधना का
बंद कर आँखे
मुझे देखो
मुझे छू लो
तुम्हारा अंश हूँ माँ
दृष्टि को बदलो
मुझे सोचो
तुम्हारा वंश हूँ माँ
है नहीं भाषा
कि मै तुमको पुकारूँ
तन सजग भी नहीं
मै खुद को बचा लूँ
शक्ति हूँ
पर अभी तो अव्यक्त हूँ मै
तुम्हरी मज्जा
तुम्हारा रक्त हूँ मै
मै हजारों साल
तुमको खोजती
बहती गगन में
आज जब पाने चली
तन का घरोंदा
रोक लो माँ
मत मुझे मारो
ज़रा सोचो
तुम्हारा स्वप्न हूँ मै
करो अब साकार
देखो तुम्हारा
प्रतिबिम्ब हूँ मै
हर कठिन पल का
अडिग आलम्ब हूँ मै
बड़ी हो कर जो
कहोगी वो करुँगी
तुम कहो पानी भरो
पानी भरूंगी
तुम कहो अम्बर
धरा पर खींच दूंगी
स्वप्न तुम बोना
मै उन को सींच दूंगी
प्रेम, करुणा हूँ सदय हूँ
बुद्धि से ज्यादा हृदय हूँ
रण अगर जीवन बने तो
हार में निश्चय विजय हूँ
और ये सब रूप हैं
प्रतिरूप तेरे
रुक सके कब तक भला
तम से सवेरे
तोड़ कर प्राचीर
नव युग का सृजन कर
मलिन पूर्वाग्रहों का
पल में शमन कर
और मुझको
प्यार् का आभास दे माँ
मुझे जीवन के लिए
एक आस दे माँ
यही अभिलाषा
तुम्हारा रूप पाऊं
रश्मि बन छिटकूं
धारा को जगमगाऊं
किन्तु यदि
किंचिद समय से डर रही हो
कहीं तुम भी
भ्रूण में ही मर रही हो

किन्तु जननी हो
करो यह धारणा माँ
अंश हूँ तेरा
मुझे मत मारना माँ
रूप हूँ तेरा
मुझे मत मारना माँ

Posted via email from हरफनमौला

8 टिप्पणियाँ (+add yours?)

  1. रवि कुमार, रावतभाटा
    फरवरी 15, 2010 @ 18:52:58

    बेहद भावुक…

    ज़िंदगी बड़ी ही बेरहम है…
    भावनाओं पर भारी हो जाती है…

    प्रतिक्रिया

  2. mithilesh
    फरवरी 15, 2010 @ 19:36:02

    क्या कहूँ , आपने जो कुछ भी लिखा शब्द सिधे दिल को छू गयें , बेहद मार्मिक रचना प्रस्तुत की है आपने ।

    प्रतिक्रिया

  3. SANJAY
    फरवरी 15, 2010 @ 19:43:10

    behtreen

    प्रतिक्रिया

  4. समीर लाल 'उड़न तश्तरी वाले'
    फरवरी 16, 2010 @ 00:41:58

    बहुत भावुक कर गये भाई..सुन्दर भावपूर्ण रचना!

    प्रतिक्रिया

  5. aradhana
    फरवरी 16, 2010 @ 07:26:20

    एक प्रवाहमय और भावपूर्ण रचना है ये. इस कविता की कुछ लाइनें मुझे बहुत अच्छी लगीं.
    है नहीं भाषा
    कि मै तुमको पुकारूँ
    तन सजग भी नहीं
    मै खुद को बचा लूँ
    शक्ति हूँ
    पर अभी तो अव्यक्त हूँ मै

    प्रतिक्रिया

  6. Raghu
    मार्च 20, 2010 @ 00:14:10

    ओ माँ …..
    इस रचना में जितनी बार आपने माँ शब्द का प्रयोग किया है ,
    उतनी ही बार मेरे आँशु निकल पड़े …
    एक माँ से बढ़कर और कोई भी बही इस जहाँ में .

    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति है आपकी

    प्रतिक्रिया

  7. Raghu
    मार्च 21, 2010 @ 03:35:12

    माँ का आँचल
    मैंने अपने नन्हे-नन्हे
    हाथ पैरों को फैलाया
    और अंगड़ाई लेकर मेरा
    किशोर वय बाहर आया-

    एक प्रश्न तब भी
    कुलबुलाता था……….
    और आज भी
    सर उठता है—-

    आखिर………
    मैंने माँ से पूंछ ही लिया —
    “माँ! ये दुनिया कितनी बड़ी है ?”

    माँ ने मेरा माथा चूमा,
    सिर को गोद में रख लिया,
    और बोली- बस! मेरे आँचल से,
    थोड़ी-सी छोटी है……..

    ये रचना मेरे लिखी नहीं है कहीं पढ़ी थी पसंद आई तो अपने पास नोट कर ली …
    माँ पर जब भी कोई भी कुछ भी लिखता है …ह्रदय तक छु जाता है

    प्रतिक्रिया

  8. biżuteria sklep
    फरवरी 27, 2011 @ 02:00:41

    I in addition to my pals ended up following the good points from the blog and unexpectedly came up with a terrible suspicion I never thanked the web blog owner for those strategies. Those young boys became for this reason thrilled to study all of them and already have undoubtedly been tapping into them. I appreciate you for turning out to be so helpful and also for figuring out varieties of tremendous issues millions of individuals are really desirous to discover. Our own honest apologies for not expressing appreciation to you earlier.

    प्रतिक्रिया

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: