जहर नहीं था प्यार था उम्मा उम्मा (पद्म सिंह)

Posted on

मित्र  मिलन का पर्व था दिल्ली के  दरबार
सात फ़रवरी दिन रहा छुट्टी और रविवार
छुट्टी और रविवार, तार कुछ ऐसे जुड गए
जलने वालों के हाथों से तोते उड़ गए
**
सब ऐसे मिलते रहे जैसे हों परिवार
प्रेम प्यार ऐसा बहा रहा  न पारावार
रहा  न पारावार मित्र फिर मिला करेंगे
भग्न ह्रदय को एक दुसरे सिला करेंगे
**
चर्चा हुई बड़ी किसी को मत दो गाली
बच्चे भी देखो ब्लागर मत बन जा खाली
अब तकनीकी ज्ञान अजय झा शेयर करेंगे
बाकी फिर मिल बैठ कर फिर फेयर करेंगे
**
चाय स्नैक्स का दौर था लंच रहा स्वादिष्ट
प्यारा सा माहौल था, सभी मित्र थे शिष्ट
सभी मित्र थे शिष्ट, बहुत कुछ सीखा जाना
नहीं रहा कोई वहां अनबुझ अनजाना
**

Posted via email from हरफनमौला

Advertisements

4 thoughts on “जहर नहीं था प्यार था उम्मा उम्मा (पद्म सिंह)

    विनोद कुमार पांडेय said:
    फ़रवरी 8, 2010 को 9:57 पूर्वाह्न

    बस ऐसे ही चलता रहे यह मेल मिलाप और मिल जुल कर समाज और मानवता के लिए ज़्यादा नही तो कुछ कर ही सकते है…धन्यवाद भाई

    nirmla.kapila said:
    फ़रवरी 8, 2010 को 12:14 अपराह्न

    बस दुख यही है कि मेरा प्रोग्राम कैंसैल हो गया। चलो अगली बार सही। बधाई इस मे शामिल होने के लिये।

    PP Singh said:
    फ़रवरी 9, 2010 को 3:27 अपराह्न
    PP Singh said:
    फ़रवरी 9, 2010 को 3:28 अपराह्न

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s