निज अतीत को भूल न कर

भावी पर ध्यान लगाता है

वर्तमान में जीने वाला

जीवन का सुख पाता है

 

यूँ तो सच है ठोकर खा कर

ही इंसान सम्हालता है

औरों के सीने पर चढ कर

आगे और निकलता है

पर जो ठोकर खा कर के भी

स्वयं सम्हालता जाता है

साथ लिए निबलों विकलों को

स्वतः लक्ष्य को पाता है

सपनों में मत जियो

आँख को खोलो

सच को पहचानो

क्यों जीवन है अपना

क्या है लक्ष्य हमारा

ये जानो

जो जीवन भर आँख मूँद कर

भाग्य भाग्य चिल्लाता है

अंत समय में सब कुछ खो कर

हाथ मसल पछताता है

6 टिप्पणियाँ (+add yours?)

  1. समीर लाल
    जनवरी 15, 2010 @ 10:10:01

    बहुत खूब!! बढ़िया!!

    प्रतिक्रिया

  2. shyamalsuman
    जनवरी 15, 2010 @ 10:39:50

    बहुत सुन्दर भाव की रचना। वाह। आपकी पहली कुछ पंक्तियों से प्रेरित ये भाव देखें –

    जो बीता कल क्या होगा कल
    है इस कारण तू व्यर्थ विकल
    आज अगर तू सफल बना ले
    आज सफल तो जनम सफल

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    http://www.manoramsuman.blogspot.com

    प्रतिक्रिया

  3. Dr.Manoj Mishra
    जनवरी 15, 2010 @ 11:59:58

    निज अतीत को भूल न कर

    भावी पर ध्यान लगाता है

    वर्तमान में जीने वाला

    जीवन का सुख पाता है ….
    बहुत खूब,सुंदर .

    प्रतिक्रिया

  4. nirmla.kapila
    जनवरी 15, 2010 @ 13:45:04

    वर्तमान में जीने वाला

    जीवन का सुख पाता है
    और
    जो जीवन भर आँख मूँद कर

    भाग्य भाग्य चिल्लाता है

    अंत समय में सब कुछ खो कर

    हाथ मसल पछताता है
    बहुत ही सुन्दर और सार्थक रचना है बधाई

    प्रतिक्रिया

  5. rakesh kaushik
    जनवरी 15, 2010 @ 14:14:53

    सार्थक प्रयास – शुभकामनाएं

    प्रतिक्रिया

  6. indu puri
    जनवरी 15, 2010 @ 21:40:14

    पद्मजी ,हद करते हो कभी कमेंटर्स बाबा के रूप में व्यंग के बाण चलते हो
    और कभी लोक गीत रच डालते हो.
    क्या हो भैया तुम?
    सजनी को समर्पित प्रिय के ह्रदय से उठे मधुर बोल आंचलिक बोली में यूँ लग रहे हैं
    जैसे पहली बारिश जमीन पर गिरती है और सारा वातावरण सौंधी सौंधी मिट्टी की खुशबु से महक उठता है,
    वही अहसास तुम्हारे लोक गीत को पढ़ कर हुआ
    भाई! सवा छः फीट के नौजवान से जो कवि कम बोडी बिल्डर ज्यादा लगता है ,
    डोले शोले वाला जब गँवाई भाषा में लोक गीत लिखता और गाता है तो यकीन कैसे होगा ?
    शायद तभी भारत को प्रतिभाओं का देश कहते हैं
    जियो ,मधुर गीत रचो और हमे अचम्भित करते रहो .

    प्रतिक्रिया

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: