कैक्टस, गुलाब, और गुलाबजामुन

नया वर्ष फिर आ गया है, रात से ही लोग इसे मनाने में लगे हुए है, खुश है लगता है कल से कुछ और होने वाला है, अपना  भला भले ही न कर पा रहे हों पर नए साल पर अपने इष्ट मित्रों के सारे दुःख दूर करने का पूरा प्रयास करेंगे, नए संकल्प करेंगे(वो बात अलग कि हर साल नए संकल्प  लेते है पर दो दिन में भूल जाते है अगले नए साल तक के लिए)   मैसेज भेजेंगे, इ मेल करेंगे, और भी बहुत से खेल होंगे नए वर्ष के नाम पर. कुछ नया करने के इरादे, कुछ नया पाने का लक्ष्य, कुछ नया पन, नया परिवर्तन लाने का संकल्प। सब के अपने अपने लक्ष्य होंगे नए वर्ष पर । पर असली नया वर्ष तो युवा वर्ग मानते है , दिल्ली के कनाट प्लेस  में डी जे की बीट पर थिरकने, कभी न पीने वाले भी दो घूट… के आलावा, और भी बहुत से तरीके अपनायेगे ये आज के होनहार नया वर्ष मानाने के लिए । पार्क भरे होंगे( खास कर पार्कों के दुर्गम कोने), सारी फिजा प्रेम मय होगी… देख कर  नहीं लगता की दुनिया से प्यार कम हो गया है .. किसी के एक्स्ट्रा क्लास होंगे, किसी को ज़रूरी नोट्स लेने दोस्त के घर जाना होगा, किसी के दोस्त की बर्थडे पार्टी होगी…. यानि सारे हथकंडे अपनाये जायेंगे घर से निकलने के(नया साल मानाने के)…. और फिर हो भी क्यों न…. नया साल कोई रोज़ थोड़े ही आता है? पूरा एक साल बाद ही आएगा ……….शायद पता न हो कि इस युग में जिसके बॉय या गर्ल फ्रैंड न हो उनका स्टेटस झुण्ड से निकाले गए बन्दर जैसा होता ॥ इस लिए नया साल बहुत सारी नयी संभावनाओं के साथ फिर हाज़िर है…. जो फायदा नहीं उठा पाया तो समझो अगला नया साल पूरे  एक साल बाद आएगा  और पता नहीं तथाकथित पुराने लोग  अगले साल ???…. । जिनके अपने आत्मीय लोग है उनको तो सलाह नहीं दूंगा, पर जिनके नहीं है उनके लिए मौका है …..इस सम्बन्ध में अपने एक गुरु टाइप मित्र से चर्चा भी की थी … उनकी फिलासफी नायाब है जिसे ब्लॉग दुनिया के समाज सेवियों तक पहुचने का लोभ संवरण नहीं कर पा रहा हूँ … बताया कि प्रबुद्ध और सु-समाज में संबंधों को तीन श्रेणियों में बाटा जा सकता है… कैक्टस, गुलाब, और गुलाब जामुन….मेरी उत्सुकता कुछ और बढ़ी…. वो कैसे भाई ये श्रेणियां तो पहली बार सुनने में आई है … किसी समाज शास्त्री ने नहीं लिखा, नेट पर भी नहीं मिली ये परिभाषा… जी हाँ यही तो है विशुद्ध फिलोसफी … समाज में संबंधों को तीन श्रेणियों में बाँट सकते है कैक्टस, गुलाब और गुलाब जामुन. ..  भाई वोकैसे? तो थोड़ी देर ध्यान मग्न रहने के बाद गुरु ने उवाचना शुरू किया ….  कैक्टस के रिश्ते वो होते है जो हम राह चलते कही भी बना लेते है… जैसे कैक्टस की ख़ास बात … देखने में बहुत सुन्दर होता है … उसे छू नहीं सकते….कांटे होते है उसमे….. छुआ नहीं कि… सूंघ नहीं सकते ….  खा भी नहीं सकते …….लेकिन देख सकते है … देखने में सुन्दर होते है और बड़े घर की शान होते है…. आम आदमी की पहुच से दूर…. छूते ही…… !!! और गुलाब? ……. गुलाब ??………..गुलाब को  छू सकते है , देख सकते है…. खाना वर्जित है (ये बात अलग है की लोग इस नियम का पूरी तरह से पालन नहीं करते) मै कुछ और उत्साहित हुआ …. मेरे प्रिय मित्र और तीसरा सम्बन्ध??? …. वो तो जी गुलाबजामुन वाला होता है …. जैसे गुलाबजामुन  देखने में तो काली होती है सुन्दर भले न लगे ………. पर उसे छू सकते है…. सूंघ सकते है…. चख सकते है……और तो और खा भी सकते है …  मेरा तो दिमाग घूम गया ये क्या फिलासफी हुई …. मेरी शंका या यूँ कहें आशंका थोड़ी बलवती हुई ….. थोडा और पास खिसक आया और पूछ ही लिया … आपने परिभाषा तो बता दी थोडा उदाहरण भी बता दें तो ….. मित्र उवाच …. पहला सम्बन्ध कैक्टस … राह चलते नज़रों -ही – नजरों में बना लेते है….. देखने में अच्छा लगता है पर छूना, चखना,….. सब वर्जित है, ऊँचे घरों में पाए जाते है … आम आदमी की पहुच से दूर…. छूते ही…… !!! और गुलाब? ……. गुलाब …… जैसे प्रेमिका प्रेमी का रिश्ता  गुलाब को  छू सकते है , देख सकते है…. खाना वर्जित है (ये बात अलग है की लोग इस नियम का पूरी तरह से पालन नहीं करते) और तीसरा?? गुलाब जामुन?? …….हाँ जी  ये सरकारी मान्यता प्राप्त रिश्ता है….. जैसे पति पत्नी का ….. देखने में काली बदसूरत भले ही लगे…. पर गुलाब जामुन देख सकते है …. चख सकते है…. छू सकते है……और खा भी सकते है…… इतना कह गुरु जी अंतर्ध्यान हो गए और मै ध्यान मग्न हो गया………..” नया वर्ष मंगलमय हो”

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