गज़ल…

फिजां रंगीन होगी मस्त तराने होंगे
थी तमन्ना कभी अपने भी फ़साने होंगे

यूँ तो सोचे थे मोहोब्बत न करेंगे लेकिन
क्या पता था तेरी आँखों के निशाने होंगे

एक नहीं हम ही तलबगार तेरी आँखों के
तेरे मयख़ाने  में कुछ रिंद पुराने होंगे

वो मुस्करा के   मिले कोई तो वजह होगी
उन्हें भी दिल के कई ज़ख्म छुपाने होंगे

हम न समझे थे गोया ये मुकाम आयेगा
क़त्ल होंगे तो मोहोब्बत के बहाने होंगे

मरने वाले की कोई आरज़ू रही होगी
उसकी आँखों में भी कुछ सपने सुहाने होंगे
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3 टिप्पणियाँ (+add yours?)

  1. वीर
    दिसम्बर 28, 2009 @ 12:01:31

    बहूत खूब!

    संभल जायेगा तू फिर से ‘वीर’,
    उन्हें थोडा और सवारने दो|

    प्रतिक्रिया

  2. indu puri
    दिसम्बर 29, 2009 @ 11:22:00

    ‘मरने वाले की कोई आरज़ू रही होगी
    उसकी आँखों में भी कुछ ख्वाब सुहाने होंगे’
    बहूत सुंदर लिखा है,
    मैं जैसे उन पथराई खुली आँखों के
    अधूरे रह गए सपनों को देख रही हूँ कि
    काश वो यकीन करते जाते जाते ख्वाबों का ज़िक्र ही कर जाते
    जीते जी नही सोचा कभी उनके बारे में
    बाद उनके उनके ख्वाब पूरे कर पाते
    अरे !मैं नही गोस्वामीजी कहते आपकी ग़ज़ल पढने के बाद
    मेरे लिए ……………
    जिस रचना को पढने के बाद कुछ कहने,लिखने कि इच्छा हो जाये जाये
    समझ लो उसमे ‘दम’ है.

    प्रतिक्रिया

  3. संगीता पुरी
    जनवरी 01, 2010 @ 19:28:31

    इस नए ब्‍लॉग के साथ नए वर्ष में हिन्‍दी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. अच्‍छा लिखते हैं आप .. आपके और आपके परिवार वालों के लिए नववर्ष मंगलमय हो !!

    प्रतिक्रिया

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