पनीली आँखों से मुस्कुराता क्यों है!

मैंने पूछा….
ओ सुबह के फूल
पनीली आँखों से
मुस्कुराता क्यों है…!
बोला
दो पल के  जीवन में
खुश रहता हूँ
मुस्कुराता हूँ
करुणा से आँखें नम करता हूँ….
ये जानते हुए की
पतन निश्चित है
दिन भर झूमता हूँ
ये क्या कम करता हूँ ;
और तुम….
हँसे खुल कर
न जी भर रोये
अपने ही कन्धों पर
अपनी ही लाश ढोए
कभी झूमते…
सुनते दिल की आवाज़
बजाते मस्ती का साज़
तो शायद समझ सकते
पनीली आँखों से
मुस्कुराने का राज़


3 टिप्पणियाँ (+add yours?)

  1. indu puri
    दिसम्बर 20, 2009 @ 01:19:39

    यही तो मैं कहती हूँ,तुम सब समझते हो ,
    समझदार हो इतनी जीवनदायिनी,उमंग,प्रेरणा से भरपूर रचना रचते हो
    स्वयम प्रकाश -स्तम्भ हो
    और …..अपने शब्दों को जी जाओ बाबा

    प्रतिक्रिया

  2. अनीता सिंह
    दिसम्बर 22, 2009 @ 10:20:01

    जीवन की नश्वरता को जानते हुए भी ज़िन्दादिली से जीना ही तो जीवन का मन्त्र है
    सुन्दर रचना….

    प्रतिक्रिया

  3. list of best acne products product on the market
    जनवरी 25, 2010 @ 16:21:15

    I searched on google and I had a hard time located the right info….until I found your blog.

    प्रतिक्रिया

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