हे वीणा शोभायनी, हे विद्या की खान
मेरी भव बाधा करो, बाँह धरो अब आन
माँ तुमसे क्या छुपा है तू कब थी अनजान
तुम्हीं सँवारो काज सब, तुम्हीं बचाओ मान
आन बान सब छाँणि के आया मै नादान
पत राखो वागेश्वरी, शत शत तुम्हें प्रणाम











जन 28, 2012 @ 10:38:14
वीणा पाणी माता तुम्हें नमन!!
जन 28, 2012 @ 12:02:47
वर दे, वीणावादनि भर दे।
जन 28, 2012 @ 12:03:27
वर दे
जन 28, 2012 @ 13:18:37
बहुत सुन्दर,सार्थक प्रस्तुति।
ऋतुराज वसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएँ।
जन 28, 2012 @ 18:46:41
बहुत खूब
बसंत पंचमी की शुभकामनएं
जन 31, 2012 @ 17:49:08
ॐ सरास्वतेय नमह
नमस्कार
गुजराती हु. मैंने हिंदी में ब्लॉग लिखना शुरू किया है.
आपको निमंत्रित करता हूँ, आपके मित्रो को भी बताए.
आभार