नेता स्त्रोक्तम…
28 जन 2012 8s टिप्पणियाँ
in कविता, पद्मसिंह, व्यंग्य, हास्य व्यंग्य Tags: अन्ना, चुनाव, नेता, बाबा, भारत, व्यंग्य, स्त्रोक्तम, हास्य
28 जन 2012 8s टिप्पणियाँ
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जन 29, 2012 @ 01:20:12
पठित्वा त्वदीयम् नेतारः स्तोत्रम्
मनः गद्गदं करयोः खुजलीमारब्धम्
कि करूं पूजा नेतानां, पादत्राणेषु वार-वारं…
जन 29, 2012 @ 09:34:56
जमकर धुलाई, खरी है पिलाई, नहीं किन्तु ये सब सुधरें कभी,
महाभ्रष्ट रचना, बचना रे बचना, मिला आज अवसर रगड़ दो अभी
जन 29, 2012 @ 13:40:53
क्षय क्षय हो
सब भ्रष्टन की क्षय हो…
जन 29, 2012 @ 15:18:12
वाह जी इस नेते की भी बल्ले बल्ले
जन 29, 2012 @ 19:56:16
ठाकुर साहब!! ऐसी पैनी कवितावली पर तो वो गब्बर सिंह की तरह आपको खोजते फिरेंगे!!
जन 29, 2012 @ 23:09:35
आपका सृजनात्मक कौशल हर पंक्ति में झांकता दिखाई देता है।
फ़र 01, 2012 @ 19:04:09
हिम्मत बढ़ाने के लिए आभार
जन 31, 2012 @ 17:02:06
हाहा अब तो यह स्त्रोकतम का जाप करना पड़ेगा नेताजी के अनुयायियों को