कवि सम्मेलन और रज़ाई वार्ता … सांपला ब्लागर मीट 24-12-11 (भाग-2) » रज़ाई के वीर

सांपला ब्लागर मिलन

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2s टिप्पणियाँ (+add yours?)

  1. indu puri
    जन 02, 2012 @ 21:25:39

    रजाई के वीर और वीरांगना तो थे पर …..तुम जैसा भी कोई नही था वहाँ.लेपटोप चालु करके नींद निकल रहेथे और जितनी बार उसे बंद करने के लिए मैंने बोला,जवाब मिला -’सो नही रहा..देख रहा हूँ ‘ और हम सब हँसते हँसते लोटपोट हो गये.रात को ढाई बजे चुपके से बंद किया तुम्हारा लेपटोप हा हा हा
    बेशक कभी ना भूलने वाला समय जिया था वहाँ हमने.

    Reply

    • Padm Singh पद्म सिंह
      जन 02, 2012 @ 21:46:04

      जो रात भर सो नहीं पाये वो कैसे रज़ाई के वीर थे… अपन तो सो भी रहे थे और सब कुछ देख भी रहा था…. और सिरहाने चार किलो गज़क भी रखी थी :)

      Reply

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