गज़ल (दिल भरा बैठा हुआ है टूट कर रोता नहीं)

13-myfavoritegame

एक अरसा हो गया है,  बेधड़क  सोता नहीं

दिल  भरा बैठा हुआ है टूट कर रोता नहीं 

किसे कहते हाले दिल किसको सुनाते दास्ताँ

कफ़स का पहलू कोई दीवार सा होता नहीं

दूर हो कर भी मरासिम इस तरह ज़िंदा रहे

मै इधर जागूँ अगर तो वो उधर सोता नहीं

इश्क हो तो खुद-ब-खुद  हस्सास लगती है फिजाँ

कोई   दरिया,  पेड़,  बादल   चाँदनी बोता नहीं

तुम हमें चाहो न चाहो हम तुम्हारे हैं सदा 

ये कोई सौदा नहीं है कोई समझौता नहीं

 

…… पद्म सिंह =Padm singh 9716973262

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22s टिप्पणियाँ (+add yours?)

  1. अमिताभ मीत
    मार्च 06, 2011 @ 16:15:20

    किसे कहते हाले दिल किसको सुनाते दास्ताँ

    कफ़स का पहलू कोई दीवार सा होता नहीं

    दूर हो कर भी मरासिम इस तरह ज़िंदा रहे

    मै इधर जागूँ अगर तो वो उधर सोता नहीं

    क्या बात है ! कमाल !! कमाल !!!

    Reply

  2. राहुल सिंह
    मार्च 06, 2011 @ 17:12:15

    सच्‍ची चाहत.

    Reply

  3. प्रवीण पाण्डेय
    मार्च 06, 2011 @ 18:26:04

    अन्दर से निकली कविता।

    Reply

  4. MARKAND DAVE
    मार्च 06, 2011 @ 18:59:25

    आदरणीय श्रीपद्मसिंहजी,

    तुम हमें चाहो न चाहो हम तुम्हारे हैं सदा

    ये कोई सौदा नहीं है कोई समझौता नहीं

    अभिनंदन ।

    प्रेम में समर्पणभाव का ही आधिपत्य होता है।

    मार्कण्ड दवे

    Reply

  5. सतीश सक्सेना
    मार्च 06, 2011 @ 19:09:23

    बहुत खूब …बेहतरीन भाव अभिव्यक्ति में आप सफल हैं पद्म सिंह ! हार्दिक शुभकामनायें !

    Reply

  6. singhanita
    मार्च 06, 2011 @ 19:43:49

    दूर हो कर भी मरासिम इस तरह ज़िंदा रहे

    मै इधर जागूँ अगर तो वो उधर सोता नहीं

    तुम हमें चाहो न चाहो हम तुम्हारे हैं सदा

    ये कोई सौदा नहीं है कोई समझौता नहीं

    यू तो पूरी गज़ल ही अच्छी है पर ये शेर दिल मे उतरते महसूस होते है …………

    Reply

  7. समीर लाल
    मार्च 06, 2011 @ 20:00:41

    दूर हो कर भी मरासिम इस तरह ज़िंदा रहे
    मै इधर जागूँ अगर तो वो उधर सोता नहीं

    -वाह!! पद्म भाई..क्या बात है..छा गये आप तो!!

    Reply

  8. Shivam Misra
    मार्च 06, 2011 @ 20:38:05

    बेहद उम्दा नज़्म … बधाइयाँ !

    Reply

  9. राजीव तनेजा
    मार्च 06, 2011 @ 23:47:25

    “दूर हो कर भी मरासिम इस तरह ज़िंदा रहे
    मै इधर जागूँ अगर तो वो उधर सोता नहीं”…
    बहुत बढ़िया…एक दो शब्द मुश्किल लगे…जैसे.. हस्सास वगैरा…
    निवेदन है कि कठिन शब्दों के अर्थ भी साथ ही दे दिया करें तो मुझ जैसे कईयों को लाभ होगा

    Reply

  10. Manju Mishra
    मार्च 07, 2011 @ 01:42:42

    पद्म जी बहुत दिनों के बाद आपकी ग़ज़ल पढ़ने को मिली. बहुत सुन्दर ग़ज़ल ! भाव और तरन्नुम… दोनों ही लाजवाब !! यह पढ़ कर बहुत पहले पढ़ी हुयी एक नज़्म याद आ गयी… “तेरे प्यार का कुछ ऐसा असर हो मुझ पर, तेरी पलकों का आँसू मेरी आँखों से उठाया जाये, मै रहूँ भूखा तो तुझसे भी न खाया जाये”

    Reply

    • padmsingh
      मार्च 07, 2011 @ 07:54:51

      बहुत बहुत आभार आपका …. यह ब्लॉग मैंने अपनी रचनात्मकता को निखारने और कुछ नया सीखने के मकसद से ही बनाया था… फिर इसी नज़रिये से यहाँ सक्रिय होना चाहता हूँ

      Reply

  11. रवि कुमार
    मार्च 07, 2011 @ 20:18:56

    बेहतर…

    Reply

  12. Sumit Pratap Singh
    मार्च 10, 2011 @ 10:21:46

    पद्म जी अच्छी रचना के संग फोटो भी मर्यादित हो तो क्या बात हो….

    Reply

  13. राजीव नन्दन द्विवेदी
    मार्च 14, 2011 @ 04:07:57

    तुम हमें चाहो न चाहो हम तुम्हारे हैं सदा
    हम तुम्हारे हैं सदा, हमको लुभाए ये अदा.
    राम जी को भूल आया, भूल बैठा वो गदा.
    .
    .
    ये तिकुनिया कैसी लगी, पदम भाई. ;-P

    Reply

  14. mridula pradhan
    मार्च 14, 2011 @ 12:39:45

    इश्क हो तो खुद-ब-खुद हस्सास लगती है फिजाँ
    कोई दरिया, पेड़, बादल चाँदनी बोता नहीं
    wah….behad khoobsurat….

    Reply

  15. krjoshi
    मार्च 26, 2011 @ 23:10:05

    अन्दर से निकली कविता।

    Reply

  16. रघु
    मार्च 30, 2011 @ 23:45:48

    पद्म जी ,
    प्रणाम !
    कहाँ से और कैसे इतने सुन्दर भाव उतरते हैं आपके पास …
    बहुत खूब .

    Reply

  17. Dr.Danda Lakhnavi
    अप्रै 04, 2011 @ 19:51:54

    बीज बोना ही न काफी परवरिश भी चाहिए,
    क्या उगेगी फासलें उसमें खेत गर जोता नहीं।
    ——————————————
    बेहतरीन अंदाजे बयां के लिए -बधाई।
    शायद इसीलिए किसी शाइर ने कहा है-
    “जुस्तजू हो तो सफ़र ख़त्म कहाँ होता है।
    यूँ ही हर मोड़ पे मंजिल क गुमाँ होता है॥”
    ==========================
    सद्भावी -डॉ० डंडा लखनवी

    Reply

  18. harcharan singh bhatia
    मई 20, 2012 @ 10:08:41

    wow

    Reply

  19. jagmer sharma
    जून 04, 2012 @ 13:03:04

    kaas hum bhi is gajal ki umar ke hote. bahut achhi gajalm hai

    Reply

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